पंजाब: सरकारी विभागों के पेट्रोलियम खर्च में 25 फीसदी और बजट में 1625 करोड़ की कटौती को मंजूरी
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पंजाब सरकार ने मंगलवार को सभी सरकारी विभागों के पेट्रोलियम उत्पादों के खर्चों में 25 प्रतिशत कटौती करने समेत कई खर्चे घटाने का एलान किया। हालांकि कोविड-19 के विरुद्ध जंग में सीधे तौर पर शामिल स्वास्थ्य, मेडिकल शिक्षा, पुलिस, खाद्य व कृषि विभाग इस कटौती के दायरे में नहीं आएंगे। यह कटौती उस समय तक लागू रहेगी, जब तक वित्त विभाग वाहनों के अधिकार, व्हीकल मॉडल और पेट्रोल / डीजल की सीमा संबंधी समीक्षा का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को फिर से नहीं सौंपता।
यह फैसला मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वित्त संबंधी सब-कमेटी की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई मीटिंग में लिया गया। कमेटी ने मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि राज्य को अनिश्चित समय के लिए लॉकडाउन में नहीं रखा जा सकता। इस संबंध में विशेषज्ञों की 20-सदस्यीय समिति की रिपोर्ट अगले हफ्ते आने की संभावना है।
मीटिंग में फैसला लिया गया कि उन व्यक्तियों, जिनके पास न तो कोई सार्वजनिक पद है और न ही पहले कोई सार्वजनिक पद संभाला हो, की सुरक्षा संबंधी नियमों और खर्चों संबंधी 15 मई तक समीक्षा की जाए ताकि इन पर संभावित खर्चों की कटौती संबंधी कोई फैसला लिया जा सके। राज्य में मुख्यमंत्री समेत कई सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के सुरक्षा अमले में पहले ही कटौती करते हुए उस फोर्स को कर्फ्यू प्रबंधन के अति जरूरी काम और कोविड राहत ड्यूटियों पर तैनात कर दिया गया था।
विभागों के अधीन सोसाइटियों का पैसा खजाने में जमा करने के आदेश
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राजस्व को जुटाने के लिए एक और कदम उठाते हुए सभी प्रशासनिक विभागों को उनके अधीन सोसाइटियों के पास मौजूद धनराशि में से, सोसाइटियों के दो महीनों के खर्च और रखरखाव (ओ एंड एम) का पैसा छोड़कर बाकी राशि 30 अप्रैल तक राज्य के खजाने में जमा करवाने के लिए कहा है। विभिन्न विभागों में 40 के करीब ऐसी सोसाइटियां काम कर रही हैं।
बजट में 1625.87 करोड़ की कटौती को मंजूरी
वीडियो कॉन्फ्रेंस ने विभिन्न प्रशासनिक विभागों द्वारा दिए गए सुझाव पर बजट में 1625.87 करोड़ रुपए की कटौती को भी मंजूर कर लिया गया। इस संबंध में जून, 2020 में दोबारा समीक्षा भी की जाएगी। मीटिंग में मुख्यमंत्री की उस घोषणा को भी औपचारिक मंजूरी दे दी गई, जिसमें उन्होंने ड्यूटी के दौरान कोविड-19 से राज्य सरकार के किसी भी सरकारी कर्मचारी की मौत होने की सूरत में उसके आश्रित अथवा कानूनी वारिस को 50 लाख रुपए की एक्स ग्रेशिया अनुदान देने का फैसला किया था।
कोरोना पर खर्च का व्यापक बजट बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग से कहा है कि वह कोविड से संबंधित खर्चों के बारे में व्यापक बजट तैयार करे। यह भी फैसला किया गया कि वित्त विभाग स्वास्थ्य एवं मेडीकल शिक्षा विभागों और राहत व पुनर्वास विभाग की जरूरतें पूरी करने के बाद 30 जून तक के पक्के खर्चे मुहैया करवाएगा और जून के पहले हफ्ते में राज्य की वित्तीय हालत संबंधी दोबारा समीक्षा की जाएगी।
मुआवजे के लिए केंद्र को भेजा जाएगा ज्ञापन
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को यह भी हिदायत दी है कि वह कोविड-19 के कारण हुए नुकसान के मुआवजे के लिए भारत सरकार को एक व्यापक ज्ञापन भेजे। यह भी फैसला लिया गया कि अगर राज्य को हुए पूरे नुकसान का तुरंत मुल्यांकन करना संभव नहीं है तो 30 जून तक खत्म होने वाली पहली तिमाही के लिए राज्य के राजस्व के नुकसान के मुआवजे और राहत व पुनर्वास की अन्य जरूरतों की मांग करते हुए एक अंतरिम ज्ञापन केंद्र सरकार को सौंपा जा सकता है। इसके बाद जून के अंत तक एक मुकम्मल अंतिम ज्ञापन भारत सरकार को भेजा जाएगा।