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1947 में पाक से भारत आए 22 परिवार की हाईकोर्ट से गुहार, कहा- एक कमरे में रहने को मजबूर
Mon, 02 Sep 2019 11:41 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 02 Sep 2019 11:41 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से पटियाला के राजपुरा में आए परिवार कस्तूरबा सेवा आश्रम के एक कमरे में रहने को मजबूर हैं। न तो वहां साफ-सफाई की व्यवस्था है और ना ही सीवर का कनेक्शन। नरक तुल्य इस जीवन को बेहतर बनाने के लिए वहां के निवासियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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कस्तूरबा सेवा आश्रम निवासी तरलोक सिंह सहित अन्य 21 परिवारों ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के याचिका दायर कर कहा कि 1947 में बंटवारे के समय 46 परिवार पाकिस्तान से यहां आए थे। तब से वह इस आश्रम में महज 15 स्क्वेयर मीटर के कमरे में रह रहे हैं। इस आश्रम में पीने के पानी और सीवर आदि जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
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समय बीतने के साथ यह आश्रम एक झोंपड़ पट्टी का रूप ले चुका है। यहां की झोपड़पट्टियों सहित उन्हें आश्रम के लोगों को अन्य जगह बसाए जाने के लिए सरकार एक प्रोजेक्ट लेकर आई थी। 2014 में यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आदेश दिए थे कि इस प्रोजेक्ट के तहत उनके आश्रम के सभी लोगों को बसाया जाएगा, लेकिन सिर्फ 13 परिवारों को प्रोजेक्ट के तहत बसाया गया।
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कुछ इस आश्रम को छोड़कर चले गए और बाकी के 22 परिवार अभी भी यहां अमानवीय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनमें अधिकतर दिहाड़ी मजदूर हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि या तो उनका पुनर्वास किया जाए या जहां वह रह रहे हैं उसका ही उन्हें मालिकाना हक दे दिया जाए, ताकि मूलभूत सुविधाएं बाहल की जा सके। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।