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Chandigarh News: मेडिकल क्लेम नामंजूर करने पर 20 हजार रुपये हर्जाना

Wed, 08 Nov 2023 02:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Nov 2023 02:09 AM IST
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20 thousand rupees compensation for rejection of medical claim
चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से मेडिक्लेम नामंजूर करने पर मणिपाल सिग्ना हेल्थ बीमा कंपनी पर 20 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को याचिकाकर्ता की ओर से भर्ती होने के दौरान अस्पताल के बिल के तौर पर अदा किए गए 2 लाख 8 हजार 237 रुपये की रकम को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से अदा करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कंपनी को 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा। दायर याचिका के तहत शिकायतकर्ता किडनी में स्टोन होने के चलते अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल हुआ था, जहां अस्पताल की ओर से उपचार खर्च के तौर पर बनाए गए 2 लाख 8 हजार 237 रुपये के बिल का भुगतान किया था। ग्राहक ने जब क्लेम के लिए दावा किया तो कंपनी ने रद्द कर दिया।
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कंपनी ने आयोग में दाखिल जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता रूपेश कुमार खोसला ने अपनी डिस्क समस्या के बारे में पहले नहीं बताया। जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए उनके वकील योगिंदर नागपाल ने आयोग में कहा कि वे अस्पताल में किडनी से संबंधित बीमारी के लिए भर्ती हुए थे, जिसका याचिकाकर्ता की डिस्क प्रॉब्लम से कोई संबंध नहीं है। मामले में सामने आए तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी की दलील को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हर्जाना लगाया है।
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क्या था मामला... कांसल के रहने वाले रूपेश कुमार खोसला ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने सिग्ना प्रो हेल्थ बीमा कंपनी से पॉलिसी खरीदी थी। उन्होंने पॉलिसी के लिए 11 हजार 512 रुपये का भुगतान किया था। यह पॉलिसी 17 अगस्त 2017 से 16 अगस्त 2018 तक वैध थी। इसके बावजूद शिकायतकर्ता 2023 तक बीमा पॉलिसी को रिन्यू करवाते रहे। आरोपों के तहत उन्हें किडनी में पथरी की समस्या के चलते जुलाई 2022 में सेक्टर-34 के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता ने कैशलेस क्लेम के लिए बीमा कंपनी में आवेदन किया गया था लेकिन कंपनी ने 27 जुलाई 2022 को यह कहते हुए उनका क्लेम रद्द कर दिया कि उन्हें 2008 से डिस्क प्रॉब्लम है। इसके बाद भी उन्होंने पॉलिसी लेते वक्त इस बारे में कंपनी के जानकारी नहीं दी।
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