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1984 के दंगों में 32 सिखों को जिंदा जलाने वाला केस पहुंचा हाईकोर्ट, वजह जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Aug 2017 01:34 PM IST
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सिख दंगों की त्रासदी
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1984 के दंगों में 32 सिखों को जिंदा जलाने वाला केस पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करके नोटिस भी जारी किया गया है। याचिका में सिखों को जिंदा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई में कोताही बरतने वाले पुलिा कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, डीजीपी व अन्य को नोटिस जारी किया है।
याचिका में पुलिस की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा कर उन पर एफआईआर व विभागीय कार्रवाई करने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया कि वर्ष 1984 तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित कई जगहों पर दंगे हो गए थे। इसी दौरान हौंद चिल्लड़ में भी दंगे हुए। ट्रक भर कर लोग वहां पहुंचे और उन्होंने सिखों को निशाना बनाया। इस दौरान सिखों को उनके घरों में जला दिया गया था।
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याचिका में पुलिस की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा कर उन पर एफआईआर व विभागीय कार्रवाई करने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया कि वर्ष 1984 तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित कई जगहों पर दंगे हो गए थे। इसी दौरान हौंद चिल्लड़ में भी दंगे हुए। ट्रक भर कर लोग वहां पहुंचे और उन्होंने सिखों को निशाना बनाया। इस दौरान सिखों को उनके घरों में जला दिया गया था।
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जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई
सिख विरोधी दंगों की त्रासदी
याचिकाकर्ता ने कहा कि उस समय पुलिस का काम कानून व्यवस्था को संभालना था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनके सहायक की तरह काम किया। इस घटना के बाद भी पुलिस के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया और जांच के नाम पर खानापूर्ति कर फाइलों में इसे दबा दिया गया। इसके बाद टीपी गर्ग कमीशन का भी गठन किया गया और सिफारिशें भी आईं परंतु दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उस समय यदि पुलिस ने अपनी ड्यूटी निभाई होती तो लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। ऐसे में याचिकाकर्ता ने सभी दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और पीड़ितों के वारिसों को मुआवजा देने की अपील की है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
उस समय यदि पुलिस ने अपनी ड्यूटी निभाई होती तो लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। ऐसे में याचिकाकर्ता ने सभी दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और पीड़ितों के वारिसों को मुआवजा देने की अपील की है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।