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80 के दशक की स्टार अभिनेत्री ने बताया, कैसा है आज का बॉलीवुड?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Oct 2016 05:07 PM IST
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पद्मिनी कोल्हापुरे
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80 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे से बातचीत हुई तो उन्होंने आज के बॉलीवुड को लेकर कई खुलासे किए। उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों में फिल्म स्टार्स को लेकर नजरिया बदला है। पहले तो लोगों में फिल्म स्टार्स को लेकर आह रहती थी। अगर शहर में किसी स्टार के आने के बारे में पता चलता था तो उसे देखने के लिए प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। वे रविवार को एक कार्यक्रम के सिलसिले में वह चंडीगढ़ आई हुई थीं।
अमर उजाला के साथ खास बात चीत के दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अब तक के सफर के बारे में बात की। पद्मिनी कोल्हापुरे ने वर्तमान और अपने दौर के बीच के फर्क पर बात करते हुए बताया कि हमारे समय में तो सिल्वर, गोल्डन और डायमंड जुबली होती थी, लेकिन वर्तमान फिल्म इंडस्ट्री तो बॉक्स ऑफिस में करोड़ो रुपये कमाने के चक्कर में फसी है। अब तो आर्ट फिल्मों को भी कॉमर्शियल रूप में बनाया जाने लगा है।
डायलॉग बोलने में करती हैं श्रद्धा कपूर की मदद
पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि कई बार शूट के दौरान श्रद्धा का फोन आता है और फोन करके बोलती हैं कि मासी यह डायलॉग कैसे बोलना है, इसे किस भाव में बोलूं। जब उसे बता देती हूं तो थैंक्यू बोलकर फोन काट देती है और यह हमेशा चलता रहता है। इसके अलावा सिद्धार्थ के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि आज सिद्धार्थ जिस जगह पर है वो उसकी खून पसीने की कमाई है।
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थिएटर सबसे कठिन माध्यम
थिएटर के बारे में बात करते हुए पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि फिल्मों की तुलना में थिएटर कहीं ज्यादा कठिन है। फिल्मों में तो अगर कोई एक्ट सही ना हो उसे दोबारा किया जा सकता है, जबकि थिएटर में कलाकार को लाइव प्रस्तुति देनी पड़ती है।
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अमर उजाला के साथ खास बात चीत के दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अब तक के सफर के बारे में बात की। पद्मिनी कोल्हापुरे ने वर्तमान और अपने दौर के बीच के फर्क पर बात करते हुए बताया कि हमारे समय में तो सिल्वर, गोल्डन और डायमंड जुबली होती थी, लेकिन वर्तमान फिल्म इंडस्ट्री तो बॉक्स ऑफिस में करोड़ो रुपये कमाने के चक्कर में फसी है। अब तो आर्ट फिल्मों को भी कॉमर्शियल रूप में बनाया जाने लगा है।
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डायलॉग बोलने में करती हैं श्रद्धा कपूर की मदद
पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि कई बार शूट के दौरान श्रद्धा का फोन आता है और फोन करके बोलती हैं कि मासी यह डायलॉग कैसे बोलना है, इसे किस भाव में बोलूं। जब उसे बता देती हूं तो थैंक्यू बोलकर फोन काट देती है और यह हमेशा चलता रहता है। इसके अलावा सिद्धार्थ के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि आज सिद्धार्थ जिस जगह पर है वो उसकी खून पसीने की कमाई है।
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थिएटर सबसे कठिन माध्यम
थिएटर के बारे में बात करते हुए पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि फिल्मों की तुलना में थिएटर कहीं ज्यादा कठिन है। फिल्मों में तो अगर कोई एक्ट सही ना हो उसे दोबारा किया जा सकता है, जबकि थिएटर में कलाकार को लाइव प्रस्तुति देनी पड़ती है।