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17 तरह के घड़ियाल देखने हैं तो पहुंचें छतबीड़ जू

Tue, 05 Aug 2014 04:29 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 05 Aug 2014 04:29 PM IST
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17 Types Crocodiles in Chhatbir Zoo

पंजाब की नदियों में एक बार फिर से घड़ियाल दिखेंगे। इसके लिए छतबीड़ जू में घड़ियाल के 17 बच्चों को पाला जा रहा है। घड़ियाल को नदियों में डालने की योजना पंजाब वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने सरकार को भेज दी है। तमाम विभागों के कमेंट्स आ चुके हैं और गवर्नमेंट आफ इंडिया की मुहर लगनी बाकी है।

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घड़ियाल के बच्चों को असुविधा और कोई इंफेक्शन न हो इसकी चाक चौबंद व्यवस्था छतबीड़ में है। हरनेक सिंह और रघुबीर सिंह की ड्यूटी जू अस्पताल में बनाए गए खास इनक्लोजर पर रखने की है।
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जिंदगी के लिए एकसमान तापमान
छतबीड़ में घड़ियाल के बच्चों का तापमान मेंटेन करने के लिए हीटर, ब्लोवर, पंखा, एक्जास्ट, कूलर, बल्ब लगाए गए हैं। घड़ियाल के बच्चों पर सीधी धूप न पड़े इसके लिए ग्रीन नेट का इस्तेमाल किया गया है। छतबीड़ जू के मेडिकल अधिकारी ने बताया कि इनका तापमान 24 से 25 फीसदी तक रखना पड़ता है।
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ह्यूमिडिटी 65-75 फीसदी होती है और ताजे पानी के साथ जीवित फिश डाली जाती हैं। तापमान को मापने एक थर्मामीटर लगाया गया है जो बाहर और भीतर का तापमान दिखाता है। इनक्लोजर में पानी और रेत का इंतजाम किया गया है जिससे प्राकृतिक माहौल मिल सके।

पहले दिन ही आ गए नर्सरी में
घड़ियाल के 17 बच्चों को अंडे से निकलते ही 28 जून 2012 को नर्सरी में ले आया गया। अब बच्चों की औसत लंबाई करीब ढाई फुट (एक मीटर) हो चुकी है। इनके लिए सप्ताह में तीन बार मछलियों की सप्लाई आती है। जिसको छतबीड़ के पौंड में रखा जाता है। एक घड़ियाल का बच्चा पचास फिश खाता है।

हमारी घड़ियाल की ब्रीडिंग की योजना सफल हो गई है। एक साल हो चुका है और बच्चे सर्वाइव कर रहे हैं। अगर आप देखें तो घड़ियाल पहले व्यास और सतलुज में पाए जाते थे। वर्ष 1965 में आखिरी घड़ियाल मरा। अब कम रह गए हैं। यह फिश खाता है। बड़े जानवर को नहीं पकड़ता। हमने इसे दोबारा से नदी में डालने का प्रोजेक्ट सरकार को भेजा है। उम्मीद है प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाएगी।

धीरेंद्र सिंह, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पंजाब
 
हमने एक साल तक घड़ियाल के बच्चों पर हर वक्त नजर रखी। अभी एक साल और इनको देखना होगा। दो साल बाद हम उनको रिलीज करेंगे। सभी बच्चे एक्टिव हैं। यह एक कोल्ड ब्लडेड जीव है इसलिए इसका तापमान मेंटेन करना हमारे लिए सबसे आवश्यक है।
डा. एमपी सिंह, सीनियर वेटरिनरी अफसर, छतबीड़ जू

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