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सड़क दुर्घटना के लिहाज से 17 किलोमीटर का दायरा बेहद खतरनाक

Tue, 07 Aug 2018 01:40 AM IST
Updated Tue, 07 Aug 2018 01:40 AM IST
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सड़क दुर्घटना के लिहाज से 17 किलोमीटर का दायरा बेहद खतरनाक
सड़क दुर्घटना के लिहाज से 17 किमी. का दायरा बेहद खतरनाक
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- 24 दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्र, तीन ब्लैक स्पॉट की पहचान
- सड़कों पर हो चुकी है 30 मौतें
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। शहर में सड़क हादसे में दो साल के दौरान 30 मौतें हुईं। इनमें 17 नेशनल हाईवे पर जबकि 13 नगर निगम क्षेत्र के दायरे में। पंचकूला की 115 किलोमीटर की सड़कों पर तीन ब्लैक स्पॉट और 24 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है। 115 में से 98 किमी. में नगर निगम क्षेत्र में है जबकि एनएच का 17 किलोमीटर का क्षेत्र हादसों का सबब बन चुका है। औसतन, नेशनल हाइवे के हर किलोमीटर पर होने वाली दुर्घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। हादसों के लिहाज से इस दायरे को बेहद खतरनाक माना गया है। नगर निगम के रोड सेफ्टी एडवाइजर की ओर से जारी सर्वे रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। हालांकि इनमें उन आंकड़ों को शामिल नहीं किया जा सका है, जिनमें सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट में शहर के 24 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के अलावा तीन ब्लैक स्पॉट में बड़े हादसे हो चुके हैं। खासकर तीन ब्लैक स्पॉट जिन्हें चिन्हित किया गया है, जहां तीन मौतें या दो खतरनाक हादसे हो चुके हैं। इनमें मोरनी टी प्वाइंट, माजरी चौक और अग्रसेन चौक को शामिल किया गया है।
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हालांकि प्रदेश के 10 जिलों में निगम के सेफ्टी एडवाइजर की नियुक्ति की जा चुकी है, लेकिन पंचकूला निगम ने पिछले छह महीनों के दौरान इसके अध्ययन की जिम्मेवारी नवदीप असीजा को सौंपी। उन्होंने रोड इंजीनियरिंग, डिजाइन और रोड सेफ्टी से संबंधित सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के बाद रिपोर्ट तैयार की है। इस आधार पर रोड इंजीनियरिंग और डिजाइन में तब्दीली की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। पंचकूला में राउंड अबाउट्स के डिजायन में बदलाव, सड़कों के किनारे में साइकिल ट्रैक बनाने के प्रस्ताव सहित कुछ और भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि नगर निगम क्षेत्र में दुर्घटनाओं की आशंका को दूर किया जा सके। हादसों में होने वाली मौत को गंभीरता से लेते हुए निगम आयुक्त ने नए सिरे से इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।
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बेल कॉरिडोर में साइकिल ट्रैक के साथ होगा पैदल पथ भी
पंचकूला रोड सेफ्टी एडवाइजर की ओर से किए गए अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें नेशनल हाइवे पर हुए हादसों में 57 फीसदी जबकि 43 फीसदी हादसों नगर निगम की सड़कों पर हुई हैं। इनमें से भी 53 फीसदी जान साइकिल चालक और पैदल चलने वालों की हुई है। इसे देखते हुए नगर निगम ने बेल कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। इसमें पैदल चलने वालों के लिए जगह होने सहित अलग साइकिल ट्रैक भी तैयार किया जाएगा। राउंड अबाउट के साइज को भी छोटा किया जा रहा है ताकि सड़कों पर वाहनों को आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इससे हादसों की आशंका भी कम हो जाएगी।
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