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मीट प्लांट के निर्माण पर ग्रामीणों में रोष, आज से बैठेंगे अनशन पर
Updated Tue, 24 Jul 2018 01:52 AM IST
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मीट प्लांट के निर्माण पर ग्रामीणों में रोष, आज से करेंगे अनशन
- मांग न मानने पर जासपुर सहित अन्य गांवों के सरपंच, पंच, पंचायत समिति मेंबर, जिप सदस्य देंगे अपने पदों से इस्तीफा: फोमलाल
- ग्रामीण बोले, जब तक मीट प्लांट को शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पिछले कुछ दिनों से रायपुररानी के जासपुर मीट प्लांट मामले में अब नया मोड़ आ गया है। ग्रामीणों के धरने और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई न करने पर ग्रामीणों ने मंगलवार से अनशन पर बैठने का निर्णय लिया है। मामले में सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक मीट प्लांट को शिफ्ट नहीं किया जाता है, विरोध जारी रहेगा।
सोमवार को राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जोनल अध्यक्ष हरियाणा फोम लाल, सरपंच प्रतिनिधि जासपुर मनीष शर्मा, समाजसेवी गौरव शर्मा, रमेश राणा ने अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का फैसला ले लिया है। पंचकूला में संवाददाताओं से बातचीत में जासपुर बूचड़खाना संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने इसकी जानकारी दी।
संगठन के जोनल अध्यक्ष ने बताया कि इससे प्रभावित पांच गांवों की आबादी करीब 25,000 है। मीट प्लांट खुलने से आसपास के ग्रामीणों के लिए रहना मुश्किल हो जाएगा। इस मामले की शिकायत प्रशासन को करने के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अपनी मांग को लेकर अनशन पर बैठेंगे। इसके बाद भी अगर सरकार ने ग्रामीणों के मांग की अनदेखी की तो जासपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में सरपंच, पंच, पंचायत समिति मेंबर, जिला परिषद मेंबर अपने अपने पदों से त्याग पत्र दे देंगे। फोम लाल ने आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह प्लांट मालिक ने बूचड़खाना न होने की दलील देते हुए इंटीग्रेटेड चिकन प्रोसेसिंग प्लांट का नाम दिया है। लेकिन वास्तविकता है कि यह एक स्लॉटर हाउस है। इससे संबंधित दस्तावेज में साफ लिखा हैै कि मीट मालिकों ने इस एम/एस चंडीगढ़ पोल्ट्री सेंटर के नाम पर हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से बूचड़खाने के लिए अनुमति ली हुई है। उन्होंने प्लांट मालिकों पर ग्रामीणों सहित संबंधित विभागों को भी गुजराह करने के आरोप लगाए हैं। समिति के सदस्य एवं यूथ कांग्रेस के महासचिव बहादुर सिंह राणा ने बताया कि 20 जुलाई को भी समिति की ओर से उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन दिया गया। सरकार ने पांच दिनों का वक्त मांगा, लेकिन कार्रवाई न होने पर रोष बढ़ता ही जा रहा है।
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- मांग न मानने पर जासपुर सहित अन्य गांवों के सरपंच, पंच, पंचायत समिति मेंबर, जिप सदस्य देंगे अपने पदों से इस्तीफा: फोमलाल
- ग्रामीण बोले, जब तक मीट प्लांट को शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पिछले कुछ दिनों से रायपुररानी के जासपुर मीट प्लांट मामले में अब नया मोड़ आ गया है। ग्रामीणों के धरने और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई न करने पर ग्रामीणों ने मंगलवार से अनशन पर बैठने का निर्णय लिया है। मामले में सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक मीट प्लांट को शिफ्ट नहीं किया जाता है, विरोध जारी रहेगा।
सोमवार को राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जोनल अध्यक्ष हरियाणा फोम लाल, सरपंच प्रतिनिधि जासपुर मनीष शर्मा, समाजसेवी गौरव शर्मा, रमेश राणा ने अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का फैसला ले लिया है। पंचकूला में संवाददाताओं से बातचीत में जासपुर बूचड़खाना संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने इसकी जानकारी दी।
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संगठन के जोनल अध्यक्ष ने बताया कि इससे प्रभावित पांच गांवों की आबादी करीब 25,000 है। मीट प्लांट खुलने से आसपास के ग्रामीणों के लिए रहना मुश्किल हो जाएगा। इस मामले की शिकायत प्रशासन को करने के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अपनी मांग को लेकर अनशन पर बैठेंगे। इसके बाद भी अगर सरकार ने ग्रामीणों के मांग की अनदेखी की तो जासपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में सरपंच, पंच, पंचायत समिति मेंबर, जिला परिषद मेंबर अपने अपने पदों से त्याग पत्र दे देंगे। फोम लाल ने आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह प्लांट मालिक ने बूचड़खाना न होने की दलील देते हुए इंटीग्रेटेड चिकन प्रोसेसिंग प्लांट का नाम दिया है। लेकिन वास्तविकता है कि यह एक स्लॉटर हाउस है। इससे संबंधित दस्तावेज में साफ लिखा हैै कि मीट मालिकों ने इस एम/एस चंडीगढ़ पोल्ट्री सेंटर के नाम पर हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से बूचड़खाने के लिए अनुमति ली हुई है। उन्होंने प्लांट मालिकों पर ग्रामीणों सहित संबंधित विभागों को भी गुजराह करने के आरोप लगाए हैं। समिति के सदस्य एवं यूथ कांग्रेस के महासचिव बहादुर सिंह राणा ने बताया कि 20 जुलाई को भी समिति की ओर से उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन दिया गया। सरकार ने पांच दिनों का वक्त मांगा, लेकिन कार्रवाई न होने पर रोष बढ़ता ही जा रहा है।
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