{"_id":"5b2e9a4f4f1c1bf96e8b9ae7","slug":"15297808161869-pkl-office-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छ सर्वेक्षण में पंचकूला की रैंकिंग में 69 अंकों का सुधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छ सर्वेक्षण में पंचकूला की रैंकिंग में 69 अंकों का सुधार
Updated Sun, 24 Jun 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वच्छ सर्वेक्षण में पंचकूला की रैंकिंग में 69 अंकों का सुधार
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के न होने से बढ़ी चुनौतियां
- गोवा, शिमला और उत्तरी दिल्ली से साफ है पंचकूला
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। स्वच्छ सर्वेक्षण में पंचकूला का रैकिंग हरियाणा में करनाल, गुरुग्राम और रोहतक के बाद चौथे स्थान पर है। पिछले साल की तुलना में रैकिंग में 69 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पिछले साल पंचकूला की रैकिंग 211 थी जबकि वर्तमान में यह 142वें स्थान पर है। बावजूद इसके पंचकूला स्वच्छता के मामले में गोवा, शिमला, उत्तरी दिल्ली सहित देश के कई शहरों से आगे है।
जनवरी में हुए पंचकूला-स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के बारे में नगर निगम कमिश्नर राजेश जोगपाल ने बताया कि सॉलिंग वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से पंचकूला पीछे रह गया। इसके लिए 25 फीसदी अंक मिलते हैं, जिससे शहर वंचित रह गया। रैंक में सुधार पर कहा कि ज्वाइन करने के करीब साढ़े तीन महीने बाद सर्वेक्षण की शुरुआत हुई। बावजूद इसके इस बार का लक्ष्य पंचकूला की रैकिंग 100 तक लाने की थी। स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में देश के 4041 शहरों को चुना गया था। शहरों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण भी पंचकूला के लिए चुनौतियां बढ़ीं, फिर भी रैकिंग में सुधार हुआ है।
कमिश्रर ने बताया कि रैजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, स्कूलों के प्रिंसिपल और स्टाफ के अलावा छात्रों ने भी स्वच्छता अभियान में साथ दिया। इसके तहत थोक में कचरा पैदा होने वाले जगहों की पहचान, सार्वजनिक शौचालय और सामुदायिक शौचालय का रख-रखाव, वेस्ट को अलग अलग करने, ओडीएफ, डी-स्लज ऑपरेटरों की पहचान, एसटीपी का रखरखाव, पेट्रोल पंप शौचालय पर सार्वजनिक शौचालय, कर्मचारी एक्सपोजर विजिट, कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटक, रेडियो के जरिये इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। आम जनता के लिए सभी सार्वजनिक शौचालयों में जियो टैगिंग, शौचालयों में स्वच्छता के लिए प्रणाली के अलावा सेनिटरी पैड के लिए सुरक्षित निपटान प्रणाली सहित कई कार्य किए गए।
विज्ञापन
पेश आईं कई अड़चनें भी
स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम में कई तरह की अड़चनें भी पेश आईं। कभी राजनीति तो कभी तत्कालीन उपायुक्त ने भी पंचकूला नगर निगम को सर्वेक्षण में सहयोग के लिए स्टाफ या वाहन मुहैया करवाने से साफ इंकार कर दिया। प्रतिनिधियों की तरफ से भी रैंक में सुधार के लिहाज से कोई ऐसी बड़ी पहल नहीं की गई, जिसकी मिसाल पेश की जा सके।
जीरो वेस्टेज होगी प्राथमिकता
निगम आयुक्त राजेश जोगपाल ने रैकिंग में सुधार पर कहा कि अगली बार पंचकूला को जीरो वेस्टेज जोन बनाने की प्राथमिकता होगी। इसके लिए जीरो बर्निंग, रिसाइक्लिंग, साइंटिफिक सेनिटरी लैंडफिल के अलावा कचरे से कंपोस्ट या दूसरे ऐसे उत्पाद तैयार किए जाने चाहिए, ताकि कचरा पैदा ही न हो। उन्होंने कहा कि घरों से निकलने वाले कचरे को भी पहले सीमित करने के बाद शून्य तक लाया जा सकता है। इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा ताकि पंचकूला का नाम स्वच्छता के मामले में देश के अग्रणी शहरों में शुमार हो सके।
विज्ञापन
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के न होने से बढ़ी चुनौतियां
- गोवा, शिमला और उत्तरी दिल्ली से साफ है पंचकूला
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। स्वच्छ सर्वेक्षण में पंचकूला का रैकिंग हरियाणा में करनाल, गुरुग्राम और रोहतक के बाद चौथे स्थान पर है। पिछले साल की तुलना में रैकिंग में 69 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पिछले साल पंचकूला की रैकिंग 211 थी जबकि वर्तमान में यह 142वें स्थान पर है। बावजूद इसके पंचकूला स्वच्छता के मामले में गोवा, शिमला, उत्तरी दिल्ली सहित देश के कई शहरों से आगे है।
जनवरी में हुए पंचकूला-स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के बारे में नगर निगम कमिश्नर राजेश जोगपाल ने बताया कि सॉलिंग वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से पंचकूला पीछे रह गया। इसके लिए 25 फीसदी अंक मिलते हैं, जिससे शहर वंचित रह गया। रैंक में सुधार पर कहा कि ज्वाइन करने के करीब साढ़े तीन महीने बाद सर्वेक्षण की शुरुआत हुई। बावजूद इसके इस बार का लक्ष्य पंचकूला की रैकिंग 100 तक लाने की थी। स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में देश के 4041 शहरों को चुना गया था। शहरों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण भी पंचकूला के लिए चुनौतियां बढ़ीं, फिर भी रैकिंग में सुधार हुआ है।
विज्ञापन
कमिश्रर ने बताया कि रैजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, स्कूलों के प्रिंसिपल और स्टाफ के अलावा छात्रों ने भी स्वच्छता अभियान में साथ दिया। इसके तहत थोक में कचरा पैदा होने वाले जगहों की पहचान, सार्वजनिक शौचालय और सामुदायिक शौचालय का रख-रखाव, वेस्ट को अलग अलग करने, ओडीएफ, डी-स्लज ऑपरेटरों की पहचान, एसटीपी का रखरखाव, पेट्रोल पंप शौचालय पर सार्वजनिक शौचालय, कर्मचारी एक्सपोजर विजिट, कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटक, रेडियो के जरिये इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। आम जनता के लिए सभी सार्वजनिक शौचालयों में जियो टैगिंग, शौचालयों में स्वच्छता के लिए प्रणाली के अलावा सेनिटरी पैड के लिए सुरक्षित निपटान प्रणाली सहित कई कार्य किए गए।
विज्ञापन
पेश आईं कई अड़चनें भी
स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम में कई तरह की अड़चनें भी पेश आईं। कभी राजनीति तो कभी तत्कालीन उपायुक्त ने भी पंचकूला नगर निगम को सर्वेक्षण में सहयोग के लिए स्टाफ या वाहन मुहैया करवाने से साफ इंकार कर दिया। प्रतिनिधियों की तरफ से भी रैंक में सुधार के लिहाज से कोई ऐसी बड़ी पहल नहीं की गई, जिसकी मिसाल पेश की जा सके।
जीरो वेस्टेज होगी प्राथमिकता
निगम आयुक्त राजेश जोगपाल ने रैकिंग में सुधार पर कहा कि अगली बार पंचकूला को जीरो वेस्टेज जोन बनाने की प्राथमिकता होगी। इसके लिए जीरो बर्निंग, रिसाइक्लिंग, साइंटिफिक सेनिटरी लैंडफिल के अलावा कचरे से कंपोस्ट या दूसरे ऐसे उत्पाद तैयार किए जाने चाहिए, ताकि कचरा पैदा ही न हो। उन्होंने कहा कि घरों से निकलने वाले कचरे को भी पहले सीमित करने के बाद शून्य तक लाया जा सकता है। इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा ताकि पंचकूला का नाम स्वच्छता के मामले में देश के अग्रणी शहरों में शुमार हो सके।