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नियमों की अनदेखी के मामले में अस्टिंट फायर ऑफिसर सस्पेंड
Updated Wed, 13 Jun 2018 02:12 AM IST
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बगैर इजाजत जारी कर दी गई तीन बिल्डिंगों को फायर सेफ्टी एनओसी
- नियमों की अनदेखी के मामले में अस्टिेंट फायर ऑफिसर सस्पेंड
- बगैर इजाजत जारी कर दी गई तीन बिल्डिंगों को फायर सेफ्टी एनओसी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। नियमों की अनदेखी कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर तीन इमारतों को फायर सेफ्टी संबंधी एनओसी जारी करने के मामले में नगर निगम कमिश्नर राजेश जोगपाल ने असिस्टेंट फायर ऑफिसर राजबीर सिंह को निलंबित कर दिया है। पिछले दिनों एफएसओ एसएस मलिक के निलंबन के दौरान राजबीर सिंह के पास फायर ऑफिसर का अतिरिक्त कार्यभार था। इस दौरान ही आला अधिकारियों से फाइल पर अनुमति लिए बगैर अमरावती के एक मल्टीप्लेक्स, रेड बिशप और हारट्रॉन की बिल्डिंग को फायर सेफ्टी की एनओसी जारी कर दी गई थी।
निगम आयुक्त ने कहा कि एएफओ के पास किसी भी भवन को एनओसी जारी करने की पावर नहीं थी। इस संबंध में न तो मेरे पास कोई फाइल आई थी। इस लापरवाही के कारण यह कार्रवाई की गई है।
एनओसी जारी करते वक्त बिल्डिंग में अग्निशमन सुरक्षा के लिहाज से सभी इंतजामों का मुआयना किया जाता है। इसके बाद संबंधित मामला नगर निगम के आला अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद भी एनओसी जारी की जा सकती है। मानकों के पूरा न होने पर आला अधिकारी की ओर से एनओसी जारी करने पर रोक लगा दी जाती है। इसके बाद कमियों को दूर करने के बाद ही एनओसी जारी करने के आदेश देने का प्रावधान है। आग से बचाव के लिहाज से इंतजाम पर्याप्त की जाएगा और इसे खारिज कर दिया जाता है। एएफओ के पास एनओसी जारी करने का अधिकार नहीं होने के बावजूद लापरवाही बरती गई, जिसकी छानबीन के बाद यह कार्रवाई की गई है।
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एनओसी जारी करने में छोटी चूक से भी हो सकती है बड़ी घटना
आग के लिहाज से सभी बिल्डिंगों को महफूज रखने की जिम्मेवारी नगर निगम के पास है। सुरक्षा के लिहाज से तय मानकों को अगर पूरा नहीं किया गया हो तो इन्हें दूर करने के लिए नोटिस भेजे जाते हैं। जब तक कमियों को दूर नहीं किया जाता, एनओसी जारी नहीं की जाती है। अगर, संबंधित अधिकारी की तरफ से छोटी भी चूक होती है तो इन कमियों का खामियाजा किसी बड़े आग की घटना के तौर पर भुगतना पड़ सकता है। इस मामले को निगम आयुक्त ने बेहद गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की है।
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- नियमों की अनदेखी के मामले में अस्टिेंट फायर ऑफिसर सस्पेंड
- बगैर इजाजत जारी कर दी गई तीन बिल्डिंगों को फायर सेफ्टी एनओसी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। नियमों की अनदेखी कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर तीन इमारतों को फायर सेफ्टी संबंधी एनओसी जारी करने के मामले में नगर निगम कमिश्नर राजेश जोगपाल ने असिस्टेंट फायर ऑफिसर राजबीर सिंह को निलंबित कर दिया है। पिछले दिनों एफएसओ एसएस मलिक के निलंबन के दौरान राजबीर सिंह के पास फायर ऑफिसर का अतिरिक्त कार्यभार था। इस दौरान ही आला अधिकारियों से फाइल पर अनुमति लिए बगैर अमरावती के एक मल्टीप्लेक्स, रेड बिशप और हारट्रॉन की बिल्डिंग को फायर सेफ्टी की एनओसी जारी कर दी गई थी।
निगम आयुक्त ने कहा कि एएफओ के पास किसी भी भवन को एनओसी जारी करने की पावर नहीं थी। इस संबंध में न तो मेरे पास कोई फाइल आई थी। इस लापरवाही के कारण यह कार्रवाई की गई है।
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एनओसी जारी करते वक्त बिल्डिंग में अग्निशमन सुरक्षा के लिहाज से सभी इंतजामों का मुआयना किया जाता है। इसके बाद संबंधित मामला नगर निगम के आला अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद भी एनओसी जारी की जा सकती है। मानकों के पूरा न होने पर आला अधिकारी की ओर से एनओसी जारी करने पर रोक लगा दी जाती है। इसके बाद कमियों को दूर करने के बाद ही एनओसी जारी करने के आदेश देने का प्रावधान है। आग से बचाव के लिहाज से इंतजाम पर्याप्त की जाएगा और इसे खारिज कर दिया जाता है। एएफओ के पास एनओसी जारी करने का अधिकार नहीं होने के बावजूद लापरवाही बरती गई, जिसकी छानबीन के बाद यह कार्रवाई की गई है।
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एनओसी जारी करने में छोटी चूक से भी हो सकती है बड़ी घटना
आग के लिहाज से सभी बिल्डिंगों को महफूज रखने की जिम्मेवारी नगर निगम के पास है। सुरक्षा के लिहाज से तय मानकों को अगर पूरा नहीं किया गया हो तो इन्हें दूर करने के लिए नोटिस भेजे जाते हैं। जब तक कमियों को दूर नहीं किया जाता, एनओसी जारी नहीं की जाती है। अगर, संबंधित अधिकारी की तरफ से छोटी भी चूक होती है तो इन कमियों का खामियाजा किसी बड़े आग की घटना के तौर पर भुगतना पड़ सकता है। इस मामले को निगम आयुक्त ने बेहद गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की है।