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कर्ज के बोझ तले दबे किसानों-खेत मजदूरों ने बुलंद आवाज में उठाई अपनी मांगें
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:56 AM IST
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कर्ज के बोझ तले दबे किसानों-खेत मजदूरों ने बुलंद आवाज में उठाई अपनी मांगें
- विरोध जता रहे संगठन के सदस्य सीएम के ओएसडी को ज्ञापन सौंपने के बाद हटे
- दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन में जमकर की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
किसान और खेत मजदूरों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। कर्ज के बोझ तले दबे आर्थिक बदहाली का शिकार ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के सैकड़ों सदस्य पंचकूला-चंडीगढ़ बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के बाद धरने पर बैठ गए। अपनी मांगे लागू करने पर डटे संगठन के सदस्यों ने कहा कि प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान अभी भी कर्ज के बोझ तले हैं। अगर उनकी समस्याएं दूर नहीं की गईं तो आत्महत्या जैसा कदम भी उठाने की मजबूरी होगी। सेक्टर-पांच स्थित हैफेड ग्राउंड से विधानसभा पर विरोध दर्ज कराने के लिए रवाना हुए किसानों को आखिरकार प्रदेश की सीमा में सीमित कर दिया गया। विधानसभा तक पहुंचने का मौका इन्हें नहीं मिल सका, लेकिन संगठन के प्रतिनिधियों ने इस आवाज को प्रदेश सरकार तक पहुंचा दिया।
नारेबाजी कर रहे सैकड़ों खेत मजदूरों को हाउसिंग बोर्ड चौराहे से पहले ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फायर टेंडर, वज्र वाहन के अलावा चंडीगढ़ और पंचकूला की तरफ सैकड़ों पुलिस कर्मियों की तैनाती भी पहले से की गई थी। आखिरकार, प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम के ओएसडी को मांग पत्र सौंपने के बाद विरोध प्रदर्शन को समाप्त किया। लेकिन करीब दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल और सचिव जयकरण मांडोठी सहित पूरे प्रदेश से आए किसान और खेत मजदूर संगठन के सदस्यों ने विधानसभा के लिए कूच किया। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि खेती व किसानों के साथ साथ खेत मजदूरों की दुर्दशा होती जा रही है। इसके लिए बार-बार सरकार से आग्रह कर, इनकी समस्याएं दूर करने के लिए कारगर उपाय भी सुझाए गए। लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं की गई।
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इन मांगों को लागू करे सरकार:
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की नीतियों पर चोट करते हुए कहा कि छोटे और भूमिहीन खेत मजदूर पूरी तरह उपेक्षित हुए हैं। प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान कर्ज तले दबे हुए हैं जबकि फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने में भी आनाकानी की जा रही है। इसे ध्वस्त करने के लिए भ्रामक नीतियां लाई जा रही है, जिससे कर्ज में डूबते किसानों अपनी जमीन बेचने या आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होने लगे हैं। उन्होंने किसानों का कर्ज माफ करने सहित फसलों की लागत मूल्य से डेढ़ गुना दाम पर सरकारी खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण मजदूरों को रोजाना 600 रुपये पारिश्रमिक के साथ-साथ पूरे साल काम की गारंटी भी होनी चाहिए। घर बनाने के लिए 100 गज जमीन, बुढ़ापा पेंशन के तौर पर 5000 रुपये मासिक भुगतान के अलावा फसलों के होने वाले नुकसान पर मुआवजा और जंगली पशुओं की वजह से फसलों की बर्बादी रोकने के लिए भी कारगर कदम उठाने चाहिए। सिंचाई के लिए महंगी बिजली पर भी संगठन के सदस्यों ने सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार बंजर और शामलात जमीनें निजी कंपनियों को दे रही है, जबकि बजट में भी किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान और प्रदेश सचिव जयकरण ने भी कहा कि अगर किसानों और खेत मजदूर किसानों की मांगों की अनदेखी की गई तो प्रदेश भर में सरकार को भीषण विरोध का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर बाबूराम, विजय कुमार, राजकुमार, रोहतास सैनी, जिले सिंह, रामकरण, देवी चंद, नंदलाल समेत अन्य नेताओं ने भी सदस्यों को संबोधित किया।
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- विरोध जता रहे संगठन के सदस्य सीएम के ओएसडी को ज्ञापन सौंपने के बाद हटे
- दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन में जमकर की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
किसान और खेत मजदूरों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। कर्ज के बोझ तले दबे आर्थिक बदहाली का शिकार ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के सैकड़ों सदस्य पंचकूला-चंडीगढ़ बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के बाद धरने पर बैठ गए। अपनी मांगे लागू करने पर डटे संगठन के सदस्यों ने कहा कि प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान अभी भी कर्ज के बोझ तले हैं। अगर उनकी समस्याएं दूर नहीं की गईं तो आत्महत्या जैसा कदम भी उठाने की मजबूरी होगी। सेक्टर-पांच स्थित हैफेड ग्राउंड से विधानसभा पर विरोध दर्ज कराने के लिए रवाना हुए किसानों को आखिरकार प्रदेश की सीमा में सीमित कर दिया गया। विधानसभा तक पहुंचने का मौका इन्हें नहीं मिल सका, लेकिन संगठन के प्रतिनिधियों ने इस आवाज को प्रदेश सरकार तक पहुंचा दिया।
नारेबाजी कर रहे सैकड़ों खेत मजदूरों को हाउसिंग बोर्ड चौराहे से पहले ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फायर टेंडर, वज्र वाहन के अलावा चंडीगढ़ और पंचकूला की तरफ सैकड़ों पुलिस कर्मियों की तैनाती भी पहले से की गई थी। आखिरकार, प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम के ओएसडी को मांग पत्र सौंपने के बाद विरोध प्रदर्शन को समाप्त किया। लेकिन करीब दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की।
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संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल और सचिव जयकरण मांडोठी सहित पूरे प्रदेश से आए किसान और खेत मजदूर संगठन के सदस्यों ने विधानसभा के लिए कूच किया। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि खेती व किसानों के साथ साथ खेत मजदूरों की दुर्दशा होती जा रही है। इसके लिए बार-बार सरकार से आग्रह कर, इनकी समस्याएं दूर करने के लिए कारगर उपाय भी सुझाए गए। लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं की गई।
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इन मांगों को लागू करे सरकार:
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की नीतियों पर चोट करते हुए कहा कि छोटे और भूमिहीन खेत मजदूर पूरी तरह उपेक्षित हुए हैं। प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान कर्ज तले दबे हुए हैं जबकि फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने में भी आनाकानी की जा रही है। इसे ध्वस्त करने के लिए भ्रामक नीतियां लाई जा रही है, जिससे कर्ज में डूबते किसानों अपनी जमीन बेचने या आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होने लगे हैं। उन्होंने किसानों का कर्ज माफ करने सहित फसलों की लागत मूल्य से डेढ़ गुना दाम पर सरकारी खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण मजदूरों को रोजाना 600 रुपये पारिश्रमिक के साथ-साथ पूरे साल काम की गारंटी भी होनी चाहिए। घर बनाने के लिए 100 गज जमीन, बुढ़ापा पेंशन के तौर पर 5000 रुपये मासिक भुगतान के अलावा फसलों के होने वाले नुकसान पर मुआवजा और जंगली पशुओं की वजह से फसलों की बर्बादी रोकने के लिए भी कारगर कदम उठाने चाहिए। सिंचाई के लिए महंगी बिजली पर भी संगठन के सदस्यों ने सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार बंजर और शामलात जमीनें निजी कंपनियों को दे रही है, जबकि बजट में भी किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान और प्रदेश सचिव जयकरण ने भी कहा कि अगर किसानों और खेत मजदूर किसानों की मांगों की अनदेखी की गई तो प्रदेश भर में सरकार को भीषण विरोध का सामना करना पड़ेगा। इस मौके पर बाबूराम, विजय कुमार, राजकुमार, रोहतास सैनी, जिले सिंह, रामकरण, देवी चंद, नंदलाल समेत अन्य नेताओं ने भी सदस्यों को संबोधित किया।