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ये हाल है वर्ल्ड क्लास श्रेणी में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:40 AM IST
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बजट, कभी नक्शा बना राह का रोड़ा, प्रोजेक्ट पूरा होने पर फिर तोड़ दिया प्लेटफार्म
- रेलवे की करामात: नए प्लेटफार्म पर सेड डालने के लिए नहीं छोड़ी थी जगह
- 10 हजार रुपये गड्ढा खोदने में तो 40 हजार भरने में लगाकर की जा रही पैसों की बर्बादी
- सुरक्षा का हाल तो देखिए आरपीएफ थाने के ठीक सामने से एस्केलेटर की सीढ़ियों का लाखों का केबल और फोरप्लेट चोरी
- ये हाल है वर्ल्ड क्लास श्रेणी में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का
दीपक शाही
पंचकूला।
कभी बजट व नक्शा तो कभी रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग की लचर प्लानिंग यात्रियों को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर मिलने वाली सुविधाओं पर बट्टा लगा रही हैं। बता दें कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड का नया प्लेटफार्म नंबर छह तैयार किया जा रहा है। एक तो प्लेटफार्म निर्धारित समय के दो साल बाद तैयार हुआ। वहीं, अब रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग ने उसे तोड़ना शुरू कर दिया है। इसके पीछे वजह बताई जा रही है प्लेटफार्म के ऊपर सेड डालने के लिए कंस्ट्रक्शन विंग ने फर्श के प्लेटफार्म पर जगह छोड़ना ही भूल गया था। नतीजतन नए सिरे से प्लेटफार्म को तोड़कर वहां गड्ढा खोदा जा रहा है। यानि सरकार का पैसा, समय व यात्रियों को जल्द मिलने वाली सुविधाएं पूरी तरह से प्रभावित होगी। जो प्रोजेक्ट अक्तूबर 2015 में पूरा होना था, उसे पूरा होने में अभी कितना समय लगेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि बिना प्लानिंग चल रहे काम और रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग की धीमी रफ्तार के कारण रेल यात्रियों को नया प्लेटफार्म 2018 में कब तक मिलेगा इसका जवाब भी रेलवे के अधिकारियों के पास नहीं है।
सिर्फ एक सीमेंटेड गड्ढा खोदने में दस हजार रुपये खर्च, तो भरने में कितना लगेगा
रेलवे स्टेशन के नए प्लेटफार्म नंबर छह को करोड़ों रुपये खर्च करके रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग ने तैयार किया था। अब प्लेटफार्म पर सेड डालने के लिए प्लेटफार्म के फर्श को बनाकर तोड़ा जा रहा है। इसमें एक सीमेंटेड गड्ढे को खोदने में करीब दस हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे करीब 70 गड्ढे खोदे जाएंगे। अब तक करीब 20 गड्ढों की खुदाई हो चुकी है। इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि इस गड्ढे को भरने में कितना पैसा खर्च होगा। रेलवे के अधिकारिक सूत्र अनुमान से बता रहे हैं कि एक गड्ढे पर सेड का पोल डालने के बाद भरने में करीब चालीस हजार का खर्च मैटेरियल और मजदूरी समेत आएगा। वहीं, पूरे गड्ढों को भरने में करीब 28 लाख रुपये का खर्च आएगा। ये रेलवे बजट की बर्बादी नहीं तो और क्या है?
बिना प्लेटफार्म पंचकूला की तरफ विकास संभव नहीं
रेलवे स्टेशन से जुड़ी सुविधाओं की बात करें या फिर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की। जब तक पंचकूला साइड प्लेटफार्म नंबर-6 का कार्य पूरा नहीं हो जाता, पंचकूला की तरफ स्टेशन का विकास संभव नहीं है। हालांकि यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ सुविधाएं बढ़ाने की कई बार मांग की। लेकिन सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हो पाया। रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ से आने वाले यात्रियों की उम्मीद प्लेटफार्म नंबर छह से जगी है, लेकिन लचर प्लानिंग के चलते टूटने लगी है। यहां दूूर दराज से आने वाले पर्यटक कहते हैं कि एक रेलवे स्टेशन दोनों साइड में इतना अंतर क्यों हैं। वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों की श्रेणी में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का दूसरा छोर इतना दुर्गम क्यों है?
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कैसे हो गया लाखों का सामान चोरी, अब यात्रियों को जल्द नहीं मिलेंगी सुविधाएं
बड़ी मुश्किल से रेलवे को आधुनिक और वर्ल्ड क्लास बनाने की कवायद शुरू हुई है, लेकिन रेलवे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की चूक इन सफल प्रयासों पर पानी फेरने लगी हैं। क्योंकि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार और पांच पर लग रहे एस्केलेटर का सामान दो बार चोरी हो चुका हैं। अभी कुछ दिन पहले एस्केलेटर का करीब साठ हजार का केबल आरपीएफ थाने के ठीक सामने फ्री पार्किंग एरिया से चोरी हो गया था। यहीं नहीं आरपीएफ के ढीले रवैये के चलते चोरों ने दोबारा प्लेटफार्म नंबर चार और पांच से एस्केलेटर का चार फोर प्लेट चोरी कर ले गए। इस एस्केलेटर से करीब लाखों रुपये का सामान चोरी हुआ है। ऐसे में रेलवे के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि जब तक दोबारा कंपनी की ओर से नया प्लेट नहीं आ जाता एस्केलेटर का संचालन नहीं होगा।
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बजट, कभी नक्शा बना राह का रोड़ा, प्रोजेक्ट पूरा होने पर फिर तोड़ दिया प्लेटफार्म
- रेलवे की करामात: नए प्लेटफार्म पर सेड डालने के लिए नहीं छोड़ी थी जगह
- 10 हजार रुपये गड्ढा खोदने में तो 40 हजार भरने में लगाकर की जा रही पैसों की बर्बादी
- सुरक्षा का हाल तो देखिए आरपीएफ थाने के ठीक सामने से एस्केलेटर की सीढ़ियों का लाखों का केबल और फोरप्लेट चोरी
- ये हाल है वर्ल्ड क्लास श्रेणी में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का
दीपक शाही
पंचकूला।
कभी बजट व नक्शा तो कभी रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग की लचर प्लानिंग यात्रियों को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर मिलने वाली सुविधाओं पर बट्टा लगा रही हैं। बता दें कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड का नया प्लेटफार्म नंबर छह तैयार किया जा रहा है। एक तो प्लेटफार्म निर्धारित समय के दो साल बाद तैयार हुआ। वहीं, अब रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग ने उसे तोड़ना शुरू कर दिया है। इसके पीछे वजह बताई जा रही है प्लेटफार्म के ऊपर सेड डालने के लिए कंस्ट्रक्शन विंग ने फर्श के प्लेटफार्म पर जगह छोड़ना ही भूल गया था। नतीजतन नए सिरे से प्लेटफार्म को तोड़कर वहां गड्ढा खोदा जा रहा है। यानि सरकार का पैसा, समय व यात्रियों को जल्द मिलने वाली सुविधाएं पूरी तरह से प्रभावित होगी। जो प्रोजेक्ट अक्तूबर 2015 में पूरा होना था, उसे पूरा होने में अभी कितना समय लगेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि बिना प्लानिंग चल रहे काम और रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग की धीमी रफ्तार के कारण रेल यात्रियों को नया प्लेटफार्म 2018 में कब तक मिलेगा इसका जवाब भी रेलवे के अधिकारियों के पास नहीं है।
सिर्फ एक सीमेंटेड गड्ढा खोदने में दस हजार रुपये खर्च, तो भरने में कितना लगेगा
रेलवे स्टेशन के नए प्लेटफार्म नंबर छह को करोड़ों रुपये खर्च करके रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग ने तैयार किया था। अब प्लेटफार्म पर सेड डालने के लिए प्लेटफार्म के फर्श को बनाकर तोड़ा जा रहा है। इसमें एक सीमेंटेड गड्ढे को खोदने में करीब दस हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे करीब 70 गड्ढे खोदे जाएंगे। अब तक करीब 20 गड्ढों की खुदाई हो चुकी है। इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि इस गड्ढे को भरने में कितना पैसा खर्च होगा। रेलवे के अधिकारिक सूत्र अनुमान से बता रहे हैं कि एक गड्ढे पर सेड का पोल डालने के बाद भरने में करीब चालीस हजार का खर्च मैटेरियल और मजदूरी समेत आएगा। वहीं, पूरे गड्ढों को भरने में करीब 28 लाख रुपये का खर्च आएगा। ये रेलवे बजट की बर्बादी नहीं तो और क्या है?
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बिना प्लेटफार्म पंचकूला की तरफ विकास संभव नहीं
रेलवे स्टेशन से जुड़ी सुविधाओं की बात करें या फिर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की। जब तक पंचकूला साइड प्लेटफार्म नंबर-6 का कार्य पूरा नहीं हो जाता, पंचकूला की तरफ स्टेशन का विकास संभव नहीं है। हालांकि यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ सुविधाएं बढ़ाने की कई बार मांग की। लेकिन सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हो पाया। रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ से आने वाले यात्रियों की उम्मीद प्लेटफार्म नंबर छह से जगी है, लेकिन लचर प्लानिंग के चलते टूटने लगी है। यहां दूूर दराज से आने वाले पर्यटक कहते हैं कि एक रेलवे स्टेशन दोनों साइड में इतना अंतर क्यों हैं। वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों की श्रेणी में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का दूसरा छोर इतना दुर्गम क्यों है?
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कैसे हो गया लाखों का सामान चोरी, अब यात्रियों को जल्द नहीं मिलेंगी सुविधाएं
बड़ी मुश्किल से रेलवे को आधुनिक और वर्ल्ड क्लास बनाने की कवायद शुरू हुई है, लेकिन रेलवे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की चूक इन सफल प्रयासों पर पानी फेरने लगी हैं। क्योंकि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार और पांच पर लग रहे एस्केलेटर का सामान दो बार चोरी हो चुका हैं। अभी कुछ दिन पहले एस्केलेटर का करीब साठ हजार का केबल आरपीएफ थाने के ठीक सामने फ्री पार्किंग एरिया से चोरी हो गया था। यहीं नहीं आरपीएफ के ढीले रवैये के चलते चोरों ने दोबारा प्लेटफार्म नंबर चार और पांच से एस्केलेटर का चार फोर प्लेट चोरी कर ले गए। इस एस्केलेटर से करीब लाखों रुपये का सामान चोरी हुआ है। ऐसे में रेलवे के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि जब तक दोबारा कंपनी की ओर से नया प्लेट नहीं आ जाता एस्केलेटर का संचालन नहीं होगा।