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1150 गौवंश के लिए सरकार ने प्रति गाय 40 पैसे भेजी ग्रांट
Updated Thu, 06 Jul 2017 02:03 AM IST
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गोवंश- शब्द सही किया है। रोहतक और नोएडा के ध्यानार्थ
1150 गोवंश के लिए सरकार ने प्रति गाय 40 पैसे भेजी ग्रांट
श्री कामधेनु गोशाला प्रबंधन ने सरकारी ग्रांट कम देने पर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर।
शहर में कौशल्या नदी के किनारे स्थित श्री कामधेनु गोशाला को सरकार की ओर से भेजी गई ग्रांट को कम बताते हुए गोशाला प्रबंधन ने रोष जताया। गौरतलब है कि कामधेनु गोशाला में करीब 1150 गोवंश हैं। सरकार ने प्रति गाय 40 पैसे रोजाना के हिसाब से 637 गायों के लिए मात्र 95 हजार 850 रुपये की वार्षिक ग्रांट भेजी है। कमेटी के प्रधान हरीश गोयल, विनोद कुमार ने बताया कि गायों के लिए सालभर की तूड़ी ही 30 लाख रुपये की आती है। जबकि हरे चारे का खर्च अलग से है। इसके अलावा 3 प्राइवेट डाक्टरों पर लगभग 43 हजार रुपये मासिक, रख रखाव के लिए कर्मचारियों पर लगभग ढाई लाख और बिजली-पानी, दुर्घटना में घायल गायों की दवाई का खर्च अलग है। हरीश गोयल ने बताया गोशाला का वार्षिक खर्च लगभग पौने 2 करोड़ रुपये है। जबकि सरकार ग्रांट के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। हालांकि गोशाला से दूध आदि बेचकर मात्र 2 लाख रुपये मासिक जुटाते हैं। जो कर्मियों के वेतन में चला जाता है।
सांसद कटारिया के कोट से भी नहीं मिली राशि
लगभग डेढ़ वर्ष पहले गोशाला के कार्यक्रम में भाजपा उपाध्यक्ष बंतो कटारिया ने अपने पति सांसद रतन लाल कटारिया की ओर से सालाना 5 लाख रुपये अनुदान राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक सांसद कोटे से अनुदान राशि नहीं आई है। उन्होंने सरकार से 3 वेटरनरी डॉक्टर, पूरी अनुदान राशि भेजने और सभी गायों के टैग लगाने की मांग की है।
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1150 गोवंश के लिए सरकार ने प्रति गाय 40 पैसे भेजी ग्रांट
श्री कामधेनु गोशाला प्रबंधन ने सरकारी ग्रांट कम देने पर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर।
शहर में कौशल्या नदी के किनारे स्थित श्री कामधेनु गोशाला को सरकार की ओर से भेजी गई ग्रांट को कम बताते हुए गोशाला प्रबंधन ने रोष जताया। गौरतलब है कि कामधेनु गोशाला में करीब 1150 गोवंश हैं। सरकार ने प्रति गाय 40 पैसे रोजाना के हिसाब से 637 गायों के लिए मात्र 95 हजार 850 रुपये की वार्षिक ग्रांट भेजी है। कमेटी के प्रधान हरीश गोयल, विनोद कुमार ने बताया कि गायों के लिए सालभर की तूड़ी ही 30 लाख रुपये की आती है। जबकि हरे चारे का खर्च अलग से है। इसके अलावा 3 प्राइवेट डाक्टरों पर लगभग 43 हजार रुपये मासिक, रख रखाव के लिए कर्मचारियों पर लगभग ढाई लाख और बिजली-पानी, दुर्घटना में घायल गायों की दवाई का खर्च अलग है। हरीश गोयल ने बताया गोशाला का वार्षिक खर्च लगभग पौने 2 करोड़ रुपये है। जबकि सरकार ग्रांट के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। हालांकि गोशाला से दूध आदि बेचकर मात्र 2 लाख रुपये मासिक जुटाते हैं। जो कर्मियों के वेतन में चला जाता है।
सांसद कटारिया के कोट से भी नहीं मिली राशि
लगभग डेढ़ वर्ष पहले गोशाला के कार्यक्रम में भाजपा उपाध्यक्ष बंतो कटारिया ने अपने पति सांसद रतन लाल कटारिया की ओर से सालाना 5 लाख रुपये अनुदान राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक सांसद कोटे से अनुदान राशि नहीं आई है। उन्होंने सरकार से 3 वेटरनरी डॉक्टर, पूरी अनुदान राशि भेजने और सभी गायों के टैग लगाने की मांग की है।
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