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यूटी के बिजली विभाग पर जल्द नया फैसला.. जानने को पढ़ें
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के बिजली विभाग को खरीदने की दौड़ से 14 कंपनियां बाहर हो गई हैं। अब सिर्फ 6 कंपनियां ही बची हैं। इनमें अडानी, टाटा और अन्य शामिल हैं। अब इन 6 कंपनियों में से जिसने सबसे ज्यादा बोली लगाई होगी, यूटी प्रशासन की ओर से उसे बिजली विभाग बेच दिया जाएगा।
चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार विभाग को खरीदने के लिए 20 कंपनियों ने बिड डॉक्यूमेंट्स खरीदे थे, लेकिन छह कंपनियों ने ही प्रशासन के पास बोली जमा कराई है। 14 कंपनियां अपने दस्तावेज नहीं जमा करा सकीं और न ही बोली जमा कराई है। सोमवार को बोली जमा कराने का आखिरी दिन था। अब तक जिन कंपनियों ने बोली जमा कराई है, उनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड हैं। प्रशासन की ओर से जिस भी कंपनी को नियुक्त किया जाएगा, उसके पास शहर में बिजली वितरण और रिटेल सप्लाई की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन की ओर से कंपनी को एक रुपये की लीज पर विभाग की संपत्तियां दी जाएंगी। यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा इनमें से कई कंपनियों के साथ प्री-बिड बैठक भी कर चुके हैं। प्रशासन की कोशिश है कि फरवरी के महीने में निजीकरण की इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए।
इन कंपनियों ने खरीदा था बिड डॉक्यूमेंट
सीईएससी लिमिटेड, टोरेंट पावर लिमिटेड, स्टेरेलाइट पावर, अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड, जीएमआर जेनरेशन एसेट लिमिटेड, इंडिया पावर कारपोरेशन लिमिटेड, डीएनएच पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड, एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई लिमिटेड (एनईएससीएल), एमएस रिन्यू पॉवर, एमएस ग्रीनको ग्रुप, नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर ग्रिड कारपोरेशन, फीडबैक एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन, एमबी पावर लिमिटेड, सीएलपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईडीएफ इंडिया, एनेल ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क, मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड।
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चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार विभाग को खरीदने के लिए 20 कंपनियों ने बिड डॉक्यूमेंट्स खरीदे थे, लेकिन छह कंपनियों ने ही प्रशासन के पास बोली जमा कराई है। 14 कंपनियां अपने दस्तावेज नहीं जमा करा सकीं और न ही बोली जमा कराई है। सोमवार को बोली जमा कराने का आखिरी दिन था। अब तक जिन कंपनियों ने बोली जमा कराई है, उनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड हैं। प्रशासन की ओर से जिस भी कंपनी को नियुक्त किया जाएगा, उसके पास शहर में बिजली वितरण और रिटेल सप्लाई की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन की ओर से कंपनी को एक रुपये की लीज पर विभाग की संपत्तियां दी जाएंगी। यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा इनमें से कई कंपनियों के साथ प्री-बिड बैठक भी कर चुके हैं। प्रशासन की कोशिश है कि फरवरी के महीने में निजीकरण की इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए।
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इन कंपनियों ने खरीदा था बिड डॉक्यूमेंट
सीईएससी लिमिटेड, टोरेंट पावर लिमिटेड, स्टेरेलाइट पावर, अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड, जीएमआर जेनरेशन एसेट लिमिटेड, इंडिया पावर कारपोरेशन लिमिटेड, डीएनएच पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड, एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई लिमिटेड (एनईएससीएल), एमएस रिन्यू पॉवर, एमएस ग्रीनको ग्रुप, नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर ग्रिड कारपोरेशन, फीडबैक एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन, एमबी पावर लिमिटेड, सीएलपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईडीएफ इंडिया, एनेल ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क, मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड।
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