हरियाणा: पराली प्रबंधन पर 137 करोड़ खर्च फिर भी पिछले साल से ज्यादा जली
हरियाणा में हर साल पराली जलाने के कारण लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास हर साल की तरह इस साल भी काम आते नहीं दिख रहे। इस साल भी इस समय में देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में हरियाणा का जींद कैथल और पानीपत शामिल है।
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पराली प्रबंधन पर हरियाणा सरकार ने इस बार 137 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। इतनी बड़ी रकम इस प्रोजेक्ट पर फूंकने के बावजूद सरकार किसानों को पराली फूंकने से नहीं रोक पाई। प्रदेश के तीन जिले जींद, कैथल और पानीपत ऐसे हैं, जो देश में सर्वाधिक प्रदूषित जिलों में शामिल हैं। किसानों ने सरकार के प्रयासों को धता बताते हुए जमकर पराली जलाई।
सब्सिडी पर मशीनें दिए जाने और जागरूकता फैलाने समेत तमाम दावे इस बार धरे रह गए। प्रदेश में पिछले साल के 4536 मामलों के मुकाबले 5200 स्थानों पर पराली जलाई जा चुकी है। हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) की रिपोर्ट के अनुसार इस समय औसतन रोजाना 200 स्थानों पर पराली फूंकी जा रही है। इससे प्रदेश की न केवल हवा जहरीली हो चुकी है, बल्कि तीन शहर आज भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी खरदीने को केंद्र सरकार की ओर से इस साल हरियाणा को 193 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके तहत प्रदेश में 137 करोड़ रुपये की लागत से 14794 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। इनमें से व्यक्तिगत कैटेगरी के लिए 6845 और 2074 सीएचसी (कस्टम हायर सेंटर) के लिए 7949 मशीनें खरीदी गई हैं। कुल 49166 मशीनों में से 23157 मशीनों का पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है।
कृषि विभाग की ओर से धान के सीजन से पहले ही पराली जलाने से रोकने के लिए तमाम बैठकें और दावे किए जा रहे हैं। धान वाले जिलों में कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से किसानों को ये मशीनें उपलब्ध भी कराई गई, लेकिन वह पराली जलाने से नहीं रोक पाए। पराली जलाने पर जुर्माने से लेकर कई प्रावधान हैं, लेकिन इस बार न तो विभाग की जागरूकता काम आई और न ही खरीदी गई मशीनें। धान का कटोरा कहे जाने वाले कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र और फतेहाबाद में सबसे अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई है।
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प्रोत्साहन योजना भी नहीं आई काम
पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन योजना भी काम नहीं आई। जो किसान स्ट्रा बेलर द्वारा पराली की गांठ, बेल बनाकर या उसका निष्पादन सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों में करेगा, उसको प्रति एकड़ 1000 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की योजना है।
50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी भी नहीं लुभा पाई
किसानों को मशीनें खरीदने पर व्यक्तिगत 50 प्रतिशत और परियोजना लागत का 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इनमें इन सीटू प्रबंधन के लिए सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्डी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड एवं फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्चर, पैडा स्ट्रा चापर, हाईड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल, क्रॉप रीपर और रीपर बाइंडर मशीनें और एक्स सीटू के तहत बेलर व हरेक मशीनें शामिल हैं। वहीं, पराली से चलने वाले कुल 265 कंप्रेस्ट बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इस साल तक 50 प्लांट चलाने का दावा है।
पराली जलाने से रोकने को लेकर प्रदेश सरकार ने काफी प्रयास किए हैं। प्रोत्साहन राशि से लेकर मशीनों पर सब्सिडी दी जा रही है। कुछ जिलों में पराली जलाने के अधिक मामले सामने आए हैं। इसकी समीक्षा की जाएगी। साफ स्वच्छ पर्यावरण हम सभी की जिम्मेदारी है, किसानों को और अधिक जागरूक किया जाएगा। - जेपी दलाल, कृषि मंत्री।
जिलेवार विवरण कहां कितनी जली पराली
- कैथल 1041
- करनाल 840
- फतेहाबाद 853
- कुरुक्षेत्र 518
- जींद 450
- अंबाला 263
- यमुनानगर 141
- पानीपत 92
- पलवल 98
- सिरसा 126
- सोनीपत 58
- हिसार 46
हरियाणा के कई जिलों में अभी भी जहरीली हवा
जिला एक्यूआई
- पानीपत 416
- कैथल 410
- जींद 407
- भिवानी 347
- फरीदाबाद 380
- फतेहाबाद 334
- गुरुग्राम 340
- हिसार 355
- कुरुक्षेत्र 330
- करनाल 310
- रोहतक 329
- यमुनानगर 319
- सोनीपत 315
- सिरसा 285
- अंबाला 251