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134 ए : 9 साल से निजी स्कूलों के 700 करोड़ रुपये अटके

Mon, 08 Jul 2024 05:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 05:47 AM IST
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134A: Rs 700 crores of private schools stuck for 9 years
चंडीगढ़। हरियाणा में गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने की योजना में निजी स्कूलों के करीब 700 करोड़ रुपये पिछले नौ साल से अटके हुए हैं। 134 ए के नियम के तहत निजी स्कूलों में दी गई गरीब बच्चों की शिक्षा की यह राशि है, लेकिन अधिकारी आज तक इसे जारी नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में निजी स्कूल संचालक कई बार विभाग के एसीएस से लेकर शिक्षा मंत्री तक से मिल चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अब हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने इसको लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने चेताया है कि अगर जल्द यह राशि जारी नहीं की गई तो विधानसभा चुनावों में निजी स्कूल संचालक भाजपा का विरोध करेंगे।
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संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू व संरक्षक तेलू राम नेे कहा कि प्राइवेट स्कूलों का नियम 134-ए का 9 वर्षों का करीब 700 करोड़ रुपए सरकार की तरफ बकाया है। इसके साथ ही स्कूल सोसाइटियों पर लगाए गए नाजायज जुर्माने को माफ करने, स्कूल बसों की एनओसी लेते समय टैक्स के साथ लगाए जा रहे जुर्माने को समाप्त करने की मांग की गई थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकाला गया।
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संघ के महासचिव पवन राणा व रणधीर पूनिया, प्रांतीय वरिष्ठ उप प्रधान संजय धत्तरवाल व अशोक कुमार ने कहा कि दस वर्ष बाद स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों से रिव्यू के नाम पर दोबारा से दो नंबर फॉर्म भरने के आदेश को रद्द करने, नियमों को सरल कर एग्जिस्टिग, एमआईएस पोर्टल, परमिशन व अस्थाई स्कूलों को मान्यता देने, प्लेज मनी को कम करने, आरटीई व चिराग योजना की राशि देने, स्कूलों में सोलर लगवाने पर सब्सिडी देने, बस ड्राइवर या किसी अन्य कर्मचारी की गलती की सजा स्कूल प्रिंसिपल व डायरेक्टर को न देने, बसों की आयु सीमा 20 वर्ष करने आदि मांगों को पूरा करने को लेकर सीएम को पत्र लिख चुके हैं। सरकार बार बार आश्वासन देती है, लेकिन कागजों में कोई बात नहीं लाई जा रही है।
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शिक्षा विभाग केवल दे रहा है आश्वासन

सत्यवान कुंडू ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से सितंबर 2022 में कक्षा दूसरी से आठवीं तक दाखिल ऐसे बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया था जिस पर आवेदन करने के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूलों को कुछ नहीं मिला वहीं दूसरी तरफ 9वी से 12वीं कक्षा के लिए सत्र 2015-16 से लेकर आज तक एक भी पैसा प्रदेश में किसी भी स्कूल को नहीं मिला है। बीते नौ वर्षों में सैकड़ों बार उच्च अधिकारियों व शिक्षा मंत्री से प्राइवेट स्कूल संचालक मिलकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन आज तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। इससे प्राइवेट स्कूल संचालकों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। अगर अब भी मुख्यमंत्री को पत्र में लिखी गई इन मांगों को सरकार ने पूरा नही किया तो भाजपा को विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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