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चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में हंगामे के बीच 1260 करोड़ का बजट पास, कोई नया टैक्स नहीं

Fri, 15 Feb 2019 03:09 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 15 Feb 2019 03:09 PM IST
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1260 crore budget pass in nagar nigam chandigarh Meeting
नगर निगम चंडीगढ़
बजट पास करने के लिए बुलाई गई नगर निगम की विशेष बैठक में खूब हंगामा हुआ। वही पार्षद सतीश कैंथ और दिलीप शर्मा ने बैठक का बायकॉट कर दिया। कैंथ का कहना था कि सदन की विशेष बैठक निगम एक्ट के अनुसार नहीं बुलाई गई है। एक्ट का हवाला देते हुए वह साथी पार्षद दिलीप शर्मा के साथ बैठक से वॉकआउट कर गए। हालांकि बैठक में नगर निगम का वर्ष 2019-20 का 1260 करोड़ का बजट बिना किसी कर के पास कर दिया गया।
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इससे पहले वित्त एवं अनुबंध समिति की बैठक में इसे पहले ही पास कर दिया गया था। वित्त एवं अनुबंध समिति ने 1260 करोड़ 31 लाख रुपये का बजट पास किया था। बजट के लिए बुलाई गई विशेष बैठक में शहरवासियों पर कोई नया कर नहीं लगाया गया है। वॉकआउट से पहले कैंथ ने अधिकारियों को एक्ट भी याद दिलाने की कोशिश की। कैंथ ने पूछा कि जिस बैठक में पैसे की बर्बादी हो, उसकी जवाबदेही किसकी होगी? उन्होंने कहा कि वे रिकवरी का वह नहीं बनना चाहते हैं। कैंथ का मत था कि बिना एजेंडों पर आधारित विशेष बैठक फरवरी के पहले सप्ताह में होनी चाहिए।
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किसी भी बजट बैठक से पहले पिछली बैठक के मिनट्स पास कराना जरूरी होता है। यह एक्ट में है। कैंथ का दावा है कि विशेष बैठक एक चौथाई पार्षदों का एडवांस में लिखित सहमति लेनी जरूरी होती है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में सभी जिम्मेवारी कंपीटेंट ऑथरिटी की बनती है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में पास होने वाले बजट का सारा खर्च मेयर राजेश कालिया से वसूला जाए। कैंथ ने कहा कि वह अदालत में भी जाएंगे। उन्होंने गृह सचिव, कमिश्नर और प्रशासक को शिकायत दी है। साथ में निगम एक्ट की कॉपी भी सौंपी है।
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सूद ने साधा निशाना तो बबला बोले- सब आपका ही सिखाया हुआ है

वहीं, कैंथ और दिलीप शर्मा के वॉकआउट के बाद पूर्व मेयर अरुण सूद ने दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां पर कुछ लोग सिर्फ गलतियां ढूंढने आते हैं। इस पर कांग्रेसी पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने तंज कसते हुए कहा कि यह सब आपका ही सिखाया हुआ है।

अपने वार्ड की चिंता छोड़ अन्य वार्ड की सीवरेज समस्या को उठाने में उलझे ढिल्लो
बैठक में भाग लेने के लिए आए पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर और पार्षद गुरप्रीत सिंह ढिल्लों अपने खुद के वार्ड नंबर-21 की चिंता छोड़ अपनी ही पार्टी के साथी पार्षद और पूर्व मेयर देवेश मोदगिल के वार्ड नंबर-22 के अधीन आते सेक्टर-47 डी की सीवरेज लाइन का मसला उठाया। इसका सांसद समर्थक पार्षद हीरा नेगी, अनिल दुबे और कंवर राणा ने यह कहकर विरोध किया कोई भी पार्षद सिर्फ अपने वार्ड के बारे में बात करें। जिसको भी समस्या उठानी है अपने संबंधित वार्ड की बात खुद उठाए।

किसी की गैर मौजूदगी में उस पार्षद के वार्ड के बारे में बात उठाना सही नहीं है। उनका ढिल्लों से सवाल था कि जिस वार्ड की बात वह उठा रहे हैं, क्या वह उस वार्ड के पार्षद हैं। जिस वक्त पार्षद ढिल्लों सीवरेज की समस्या उठा रहे थे, तब पूर्व मेयर मोदगिल खराब स्वास्थ्य की वजह से सदन से काफी पहले जा चुके थे। ढिल्लों ने इसे जांच का विषय करार देते हुए कहा कि इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहां की बुरी हालात है। उन्होंने मेयर को संबोधित करते हुए कहा कि यह विषय आप के भी ध्यान में है। ढिल्लें ने कहा कि देवेश मौजूद होते तो उनसे भी पूछ लिया जाता।

 

सूद के बैठक लेने पर उठे सवाल तो मेयर बोले अनजाने में हो गई गलती

नगर निगम सदन की बैठक के शुरू होते ही कांग्रेसी पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने बुधवार को निगम सदन में मेयर की गैरमौजूदगी में पार्षद अरुण सूद के द्वारा अधिकारियों की बैठक लिए जाने का मामला सदन में सवाल उठाया। बबला का सवाल था कि किस एक्ट के तहत एक पार्षद अधिकारियों की बैठक ले सकता है, मेयर की अनुपस्थिति में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को बैठक लेने का ही अधिकार है। इस बीच बबला ने शहर में पानी की किल्लत का मसला भी उठाया।

बबला ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कजौली वाटर वर्क्स में कार्यों की समीक्षा के लिए उनकी पार्टी के पार्षदों को साथ नहीं ले जाया गया। इस पर पार्षद गुरबख्श रावत ने भी कहा कि इससे पहले जितने भी मेयर हुए हैं, उनके ऑफिस के पीए द्वारा सभी को कॉल आती थी, यहां केवल एक के ही सेहरा न बांधा जाए। उन्होंने कहा कि समझ-बुद्धि के हिसाब से हर पार्षद को अधिकार दें, जबकि बबला का कहना था कि उनकी किसी के साथ दुश्मनी नहीं है, यहां मसला विचाराधारा का है जबकि पार्षद कैंथ ने कहा कि पानी की समस्या के लिए हम सभी वचनबद्ध हैं।

हम सभी चाहते हैं शहर में पानी आएं। वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते लेकिन एक ही आदमी के पास बुद्धि है, यह पूरे शहर में एक गलत संदेश जाता है। जबकि बबला का कहना था कि अरुण बैठक में बेशक आए लेकिन उसमें मेयर की मौजूदगी होनी जरूरी है। तमाम आरोपों के बीच मेयर ने कहा कि वह दस मिनट के लिए पार्टी कार्यालय गए थे। वहां आधा घंटा लग गया। उन्होंने अरुण सूद को योगदान देने के लिए कहा था। शहर के विकास के लिए वह आप से (बबला) योगदान और सहयोग लेने से पीछे नहीं हटेंगे।

उनकी गैरमौजूदगी में बैठक होना अनजाने में हुई गलती है। शहर में अतिरिक्त पानी लाने के लिए निगम की टीम पूरी कोशिश में जुटी हुई है, लोगों को असुविधा पेश ना आए पानी की किल्लत के समय वह खुद भी लोगों के बीच में थे।
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