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FDI में 15% वृद्धि: पहली तिमाही में 18 अरब डॉलर पार, टैरिफ दिक्कतों के बावजूद अमेरिका से निवेश तीन गुना बढ़ा

Thu, 04 Sep 2025 03:19 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क,अमर उजाला
बिजनेस डेस्क,अमर उजाला Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 04 Sep 2025 03:19 AM IST
सार

अप्रैल-जून तिमाही में भारत में विदेशी निवेश 15% बढ़कर 18.62 अरब डॉलर हुआ। अमेरिका से निवेश तीन गुना बढ़कर 5.61 अरब डॉलर हो गया। सिंगापुर, मॉरीशस, साइप्रस और यूएई भी शीर्ष निवेशक रहे। कुल एफडीआई 25.2 अरब डॉलर पहुंचा, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर है।

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FDI increase 15% Crossed $18 billion in the First Trimester investment from America increased threefold
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे के चलते अप्रैल-जून तिमाही में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 15 फीसदी बढ़कर 18.62 अरब डॉलर हो गया। 2024-25 की समान अवधि में यह 16.17 अरब डॉलर रहा था। इस दौरान अमेरिका से आने वाला निवेश लगभग तीन गुना बढ़कर 5.61 अरब डॉलर हो गया। एक साल पहले समान अवधि में यह 1.50 अरब डॉलर था।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 की मार्च तिमाही में एफडीआई सालाना आधार पर 24.5 फीसदी घटकर 9.34 अरब डॉलर रहा था। कुल एफडीआई (इक्विटी निवेश, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी) समीक्षाधीन तिमाही के दौरान बढ़कर 25.2 अरब डॉलर हो गया। 2024-25 की इसी अवधि में यह 22.5 अरब डॉलर था।
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रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के बाद 4.59 अरब डॉलर के साथ सिंगापुर दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद मॉरीशस (2.08 अरब डॉलर), साइप्रस (1.1 अरब डॉलर) व संयुक्त अरब अमीरात (1 अरब डॉलर) शीर्ष पर रहे। एक अरब डॉलर से कम वाले देशों में केमैन आइलैंड्स (67.6 करोड़ डॉलर), नीदरलैंड (66.7 करोड़ डॉलर), जापान (55.1 करोड़ डॉलर) और जर्मनी (19.1 करोड़ डॉलर) रहे।
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20 साल में अमेरिका से आया 76 अरब डॉलर
अप्रैल,2000 से जून, 2025 के बीच 76.26 अरब डॉलर के निवेश के साथ अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है। शीर्ष पर रहने वाले मॉरीशस ने इसी अवधि में 182.2 अरब डॉलर का निवेश किया। सिंगापुर 179.48 अरब डॉलर के निवेश के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर शीर्ष पर
क्षेत्रवार बात करें तो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर (5.4 अरब डॉलर) शीर्ष पर रहा। 3.28 अरब डॉलर के साथ सेवा दूसरे स्थान पर रहा।व्यापार में 50.6 करोड़ डॉलर का निवेश आया। दूरसंचार में 2.4 करोड़ डॉलर आया। इसके बाद ऑटोमोबाइल (1.29 अरब डॉलर), निर्माण विकास (7.5करोड़ डॉलर) रहे। गैर-परंपरागत ऊर्जा में 1.14 अरब डॉलर) और रसायन में 14 करोड़ डॉलर का निवेश रहा।

कर्नाटक में सबसे अधिक निवेश
तिमाही के दौरान कर्नाटक को सबसे अधिक 5.69 अरब डॉलर का निवेश मिला। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा, जहां 5.36 अरब डॉलर का निवेश आया। इसके बाद तमिलनाडु (2.67 अरब डॉलर), हरियाणा (1.03 अरब डॉलर), गुजरात (1.2 अरब डॉलर), दिल्ली (1 अरब डॉलर) और उत्तर प्रदेश (एक अरब डॉलर) रहा।

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पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा एफडीआई
बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में देश का एफडीआई निवेश तेज रफ्तार से बढ़ा है। इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 12.6 फीसदी रही है। यह वैश्विक औसत 3.9 फीसदी से अधिक है। 2024 में एफडीआई बढ़कर रिकॉर्ड 23.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। इस वृद्धि का श्रेय वैश्विक निवेश चक्र के साथ एकीकरण और नए बाजारों का दोहन करने के लिए सरकार के प्रयासों को दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंगापुर शीर्ष गंतव्य के रूप में उभरा है। यहां 2015 से भारत केएफडीआई का 25 फीसदी हिस्सा आता है। इसके बाद अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और जापान का स्थान है।

देश एफडीआई के लिए अन्य देशों की तुलना में अधिक विविधतापूर्ण है। इसलिए अस्थिर वैश्विक नीतिगत क्षेत्र में यह तत्काल कोई जोखिम पैदा नहीं करता है। अध्ययन में भारत के रुझानों को वैश्विक निवेश प्रवाह के व्यापक संदर्भ में भी रखा गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसे समय में जब कई देश व्यापार संबंधों को मजबूत करने और पारस्परिक शुल्कों से बचने के लिए अमेरिका में निवेश का वादा कर रहे हैं, एफडीआई की दिशा और महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिकी ऊर्जा, रक्षा, विमानन, ऑटो और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
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