शुगर प्राइस: सरकारी उपायों से कीमतें काबू में, त्योहारी मांग के बावजूद 60 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे भाव
सरकार की ओर से ओर से उठाए गए कठोर कदमों के बाद चीनी की अखिल भारतीय स्तर पर खुदरा कीमतें लगातार चौथे दिन 60 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे रहीं। त्योहारी मांग के बावजूद कीमतों में स्थिरता देखी गई, हालांकि कुछ दक्षिणी राज्यों में कीमतों में मामूली वृद्धि भी देखी गई।
विस्तार
सरकारी उपायों की एक शृंखला के बाद सोमवार को लगातार चौथे दिन अखिल भारतीय चीनी का औसत खुदरा मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे रहा। यह स्थिति तब बनी है जब त्योहारी मांग के कारण कुछ क्षेत्रों में चीनी की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की कीमतें शुक्रवार को 60 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे गिर गई थीं। इसके बाद पिछले तीन दिनों में इनमें और कमी आई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
सोमवार को औसत खुदरा चीनी मूल्य 59.57 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह पिछले दिन के 58.99 रुपये प्रति किलोग्राम से मामूली अधिक था। हालांकि, यह 21 अगस्त को दर्ज 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम से अभी भी अधिक है। उस दिन केंद्र सरकार ने पहली बार चीनी आयात की अनुमति दी थी। सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाए थे।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को अधिकतम खुदरा मूल्य 85 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। वहीं, न्यूनतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार के हस्तक्षेप से कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। सरकार ने थोक उपयोगकर्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग नियमों को भी सख्त किया था। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
क्या हैं चीनी की मौजूदा कीमतें?
सोमवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा चीनी मूल्य 59.57 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। यह पिछले दिन के 58.99 रुपये प्रति किलोग्राम से थोड़ा बढ़ा है। चीनी की कीमतें शुक्रवार को 60 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गई थीं। इसके बाद पिछले तीन दिनों में इनमें और कमी आई है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। 21 अगस्त को जब केंद्र ने चीनी आयात की अनुमति दी थी, तब औसत खुदरा मूल्य 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम था। मौजूदा मूल्य उस स्तर से अधिक है। अधिकतम खुदरा मूल्य 85 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना हुआ है। वहीं, न्यूनतम खुदरा मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि कीमतों में एक निश्चित सीमा बनी हुई है।
राज्यों में कीमतों का क्या हाल है?
दक्षिणी राज्यों में खुदरा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कीमतें बढ़ीं। वहीं, तमिलनाडु और केरल में मामूली गिरावट दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश में सोमवार को औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 55.56 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। यह 21 अगस्त को 49.58 रुपये प्रति किलोग्राम था। केरल में भी इसी अवधि में मूल्य 56.75 रुपये से बढ़कर 57.8 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।
प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कीमतें कम हुईं। महाराष्ट्र में औसत खुदरा मूल्य 59 रुपये से घटकर 58.22 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। उत्तर प्रदेश में यह 21 अगस्त को 59.64 रुपये से घटकर 57.88 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश में तेज गिरावट देखी गई। वहां कीमतें 62.36 रुपये से घटकर 56.57 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं। पश्चिम बंगाल में मामूली गिरावट के साथ मूल्य 60.95 रुपये से 60.43 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।
सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या किया?
सरकार ने 21 अगस्त को चीनी आयात की अनुमति दी थी। इसके साथ ही थोक उपयोगकर्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग नियमों को और सख्त किया गया। सरकार ने चीनी मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि देश में मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। हालांकि, सरकार ने 2025-26 के विपणन वर्ष (अक्तूबर-सितंबर) के लिए उत्पादन अनुमान घटाया है। पहले यह 343 लाख टन था, जिसे अब 306 लाख टन कर दिया गया है। वार्षिक घरेलू मांग 280-285 लाख टन अनुमानित है। सरकार का लक्ष्य है कि चीनी की कीमतें स्थिर बनी रहें।