आज के समय में अगर इंसान के पास मोबाइल या टीवी न हो तो लगता है जिंदगी में कुछ है ही नहीं। शायद ही दुनिया में ऐसा कोई घर होगा, जहां परिवार में किसी के पास मोबाइल न हो या उनका इस्तेमाल न करता हो। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक ऐसा शहर भी है, जहां के लोगों के लिए मोबाइल से लेकर टीवी और रेडियो सब प्रतिबंधित हैं। इन चीजों का इस्तेमाल कोई नहीं कर सकता और अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाए तो उसे गिरफ्तार कर जेल भी जेल भी भेजा जा सकता है।
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ग्रीन बैंक टेलिस्कोप
- फोटो : Social media
इस शहर का नाम है ग्रीन बैंक, जो अमेरिका के पश्चिमी वर्जिनिया में पोकाहॉन्ट्स काउंटी में पड़ता है। इस शहर की आबादी 150 के आसपास है, लेकिन कोई भी यहां मोबाइल, टीवी या रेडियो का इस्तेमाल नहीं करता है। यह शहर इसलिए भी मशहूर है, क्योंकि यहां दुनिया का सबसे बड़ा स्टीयरेबल रेडियो टेलिस्कोप है, जिसे 'ग्रीन बैंक टेलिस्कोप' के नाम से जाना जाता है। यह टेलिस्कोप परिवहन योग्य है, यानी इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं।
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दुनिया का सबसे बड़ा रेडियो टेलिस्कोप
- फोटो : Social media
ग्रीन बैंक टेलिस्कोप 485 फीट लंबा और 7,600 मीट्रिक टन वजनी है। इसके ऊपर लगा डिश इतना बड़ा है कि उसमें एक पूरा का पूरा फुटबॉल मैदान समा सकता है। यह टेलिस्कोप जिस इलाके में स्थित है, वहां अमेरिका की राष्ट्रीय रेडियो खगोल विज्ञान वेधशाला है, जिसकी स्थापना साल 1958 में की गई थी। यहां अंतरिक्ष से आने वाली रेडियो तरंगों का अध्ययन किया जाता है। इस इलाके में बहुत सारे टेलिस्कोप हैं, जो गुरुत्वाकर्षण तरंगों से लेकर ब्लैक होल्स तक का पता लगाने में सक्षम हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस टेलिस्कोप के बारे में कहा जाता है कि यह अंतरिक्ष में 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर के सिग्नल को भी पकड़ सकता है। रेडियो तरंगों के मामले में यह काफी संवेदनशील है। यही वजह है कि इस इलाके में मोबाइल फोन से लेकर टीवी, रेडियो, आईपैड, वायरलेस हेडफोन, रिमोट कंट्रोल खिलौने, कॉर्डलेस फोन और माइक्रोवेव अवन जैसी चीजों पर पाबंदी है, क्योंकि इन उपकरणों की वजह से टेलिस्कोप को अंतरिक्ष की रेडियो तरंगों का पता लगाने में परेशानी होगी।
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राष्ट्रीय रेडियो खगोल विज्ञान वेधशाला, अमेरिका
- फोटो : Facebook/National Radio Astronomy Observatory (NRAO)
कहते हैं कि ग्रीन बैंक वेधशाला में एलियंस पर भी शोध होता है। यह काम 1960 से ही चल रहा है। यहां रेडियो तरंगों के माध्यम से अंतरिक्ष में मौजूद दूसरों ग्रहों पर जीवन का पता लगाया जाता है। पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर जीवन है या नहीं, यह तो अभी तक पता नहीं चल सका है, लेकिन इस वेधशाला में इसको लेकर काम लगातार जारी है।