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Ajab-Gajab: जब बारूद खत्म हो गया तो दुश्मनों पर तोप से दाग दिए चांदी के गोले, जानिए भारत के किले की कहानी

Sun, 28 Sep 2025 01:30 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sun, 28 Sep 2025 01:30 PM IST
सार

Churu Fort: यह किला दुनिया का एकमात्र ऐसा किला है, जहां युद्ध के समय गोला बारूद खत्म हो जाने पर तोप से दुश्मनों पर चांदी के गोले दागे गए थे। यह इतिहास की बेहद ही हैरान कर देने वाली घटना थी, जो वर्ष 1814 में घटी थी।

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fort of churu in rajasthan silver balls were fired from a cannon on the enemies churu fort history
जब बारूद खत्म हो गया तो दुश्मनों पर तोप से दागे थे चांदी के गोले (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Ajab-Gajab: भारत में कई प्राचीन किले हैं। उस दौर में राज अपने राज्य और किले की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। यहां तक की राजा सोने-चांदी, हीरे-जवाहरात की भी कीमत नहीं समझते थे। अपनी खबर में हम आपको एक ऐसा एतिहासिक किले के बारे में बताएंगे, जो इतिहास में अमर है। किले में एक ऐसी घटना घटी थी, वो न तो दुनिया में कहीं और घटी है और न ही कभी घटेगी। इस घटना के कारण ही किले का नाम विश्व इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। 

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इस किल को 'चूरू किले' के नाम से जाना जाता है, जो राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है। वर्ष 1694 में ठाकुर कुशल सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था। इस किले को बनवाने का मकसद आत्मरक्षा के साथ-साथ राज्य के लोगों को भी सुरक्षा प्रदान करना था। 
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यह किला दुनिया का एकमात्र ऐसा किला है, जहां युद्ध के समय गोला बारूद खत्म हो जाने पर तोप से दुश्मनों पर चांदी के गोले दागे गए थे। यह इतिहास की बेहद ही हैरान कर देने वाली घटना थी, जो वर्ष 1814 में घटी थी। उस समय इस किले पर ठाकुर कुशल सिंह के वंशज ठाकुर शिवजी सिंह का राज था। 
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इतिहासकारों के मुताबिक, ठाकुर शिवजी सिंह की सेना में 200 पैदल और 200 घुड़सवार सैनिक थे, लेकिन युद्ध के समय सेना की संख्या अचानक से बढ़ जाती थी, क्योंकि यहां रहने वाले लोग अपने राजा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते थे और इसीलिए वो एक सैनिक की तरह दुश्मनों से लड़ते थे। सिर्फ यही नहीं, वो अपने राजा और राज्य की रक्षा के लिए अपनी धन-दौलत तक लुटा देते थे। 

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साल 1814, अगस्त का महीना था। बीकानेर रियासत के राजा सूरत सिंह ने अपनी सेना के साथ चूरू किले पर हमला बोल दिया। इधर, ठाकुर शिवजी सिंह ने भी अपनी सेना के साथ उनका डटकर मुकाबला किया, लेकिन कुछ ही दिनों में उनके गोला-बारूद खत्म हो गए। अब राजा चिंतित हो गए, लेकिन उनकी प्रजा ने उनका भरपूर साथ दिया और राज्य की रक्षा के लिए अपने सोने-चांदी सब राजा पर न्यौछावर कर दिए, जिसके बाद ठाकुर शिवजी सिंह अपने सैनिकों को आदेश दिया कि दुश्मनों पर तोप से चांदी के गोले दागे जाएं। इसका असर ये हुआ कि दुश्मन सेना ने हार मान ली और वहां से भाग खड़े हुए। यह घटना चुरू के इतिहास में अमर है। 

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