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Union Budget : एनीमिया उन्मूलन की केंद्रीय योजना में बिहार की जीविका-आशा से डॉक्टरों को उम्मीद

Wed, 01 Feb 2023 07:23 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति Updated Wed, 01 Feb 2023 07:23 PM IST
सार

'अमर उजाला' ने राज्य की दो ख्यातिनाम स्त्री रोग विशेषज्ञों और एक सीनियर फिजिशियन से एनीमिया समस्या की गंभीरता को समझा और सरकार के मिशन 2047 पर उनकी राय पूछी। जानने का प्रयास किया कि बिहार में किस हिसाब से काम करना होगा।

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Union Budget: Doctors hope from Bihar's Jeevika-asha worker in the central plan to eradicate anemia
महिलाओं में खून की कमी से कई तरह के खतरे उभरते हैं। - फोटो : Istock

विस्तार

केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने देश से 2047 तक एनीमिया के उन्मूलन की बात कही है। बिहार में यह समस्या काफी गंभीर है। खासकर बच्चों-महिलाओं को बहुत कुछ झेलना पड़ रहा है। सरकार आयरन की गोलियां बांट तो रही है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी रोजाना बड़ी संख्या में सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में स्त्री रोगियों को इससे जूझते देखा जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के सामने इस जमाने में कई बार एनीमिया से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। आंकड़े भी यही गवाही दे रहे। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, बिहार में 64% महिलाएं और 64.4% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। ऐसे में 'अमर उजाला' ने राज्य की दो ख्यातिनाम स्त्री रोग विशेषज्ञों और एक सीनियर फिजिशियन से इस समस्या की गंभीरता को समझा और सरकार के मिशन 2047 पर उनकी राय पूछी। जानने का प्रयास किया कि आखिर कमी कहां है और एनीमिया उन्मूलन में सरकार को बिहार में किस हिसाब से काम करना होगा।

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Union Budget: Doctors hope from Bihar's Jeevika-asha worker in the central plan to eradicate anemia
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय - फोटो : अमर उजाला

इस हाल में एनीमिया का उन्मूलन असंभव: डॉ. शांति राय
सुप्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय ने कहा कि बिहार में एनीमिया को लेकर जागरूकता की जैसी स्थिति है, ऐसे में 2047 तक एनीमिया का उन्मूलन असंभव प्रतीत होता है। महिलाओं के साथ पूरे परिवार में जागरुकता की भारी कमी है। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो महिलाओं को जब तक कोई खास समस्या नहीं होती, तब तक वह जांच कराने जाती ही नहीं। गर्भवती होकर अस्पताल पहुंचने पर महिलाओं को इस समस्या की जानकारी भी तब होती है, जब किसी कारण से जांच कराई जाए। सही समय पर जांच नहीं करवाने और आयरन की गोली का सेवन नहीं करने के कारण डिलीवरी में काफी दिक्कत होती है। बच्चों पर इसका काफी असर पड़ता है। सीवियर एनीमिया में हार्ट फेल्योर होने की भी आशंका रहती है। सरकार अगर लगातार जागरुकता अभियान चलाए तो एनीमिया के कारण होने वाले खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

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Union Budget: Doctors hope from Bihar's Jeevika-asha worker in the central plan to eradicate anemia
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू गीता मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला

पोलियो उन्मूलन की तरह चलाना होगा अभियान : डॉ. मंजू गीता मिश्रा
सुप्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू गीता मिश्रा ने कहा कि 2047 तक बिहार से एनीमिया उन्मूलन संभव है, लेकिन इसके लिए पोलियो उन्मूलन जैसा अभियान चलाना होगा। बिहार के पास अस्पताल कर्मियों के साथ आशा और जीविका का बढ़िया नेटवर्क है। घर-घर जाकर प्रत्येक महिला और बच्चों की जांच रिपोर्ट लेकर इसका डाटा तैयार करना होगा। फिर रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के मुताबिक महिलाओं और बच्चों को आयरन की गोलियां देनी होगी। इसका लगातार फॉलोअप भी करना होगा कि दी गई दवा का फायदा मिल रहा है या नहीं। वैसे भी, 19 से 50 साल की महिला को हर दिन 18 मिलीग्राम आयरन और 4 से 8 साल की उम्र के बच्चों को 10 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 6 माह से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में दो बार 1 मिली आयरन सिरप देना चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को सप्ताह में आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए। सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पर ये गोलियां मुफ्त में उपलब्ध हैं। अगर सरकार जीविका और आशा की मदद से घर-घर जाकर आयरन की गोलियां उपलब्ध करवाए तो जल्द ही बिहार से एनीमिया उन्मूलन संभव है। 

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सीनियर फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी। - फोटो : अमर उजाला

10 साल में ही एनीमिया का उन्मूलन हो सकता है: डॉ. दिवाकर तेजस्वी
सीनियर फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने दावा किया कि बिहार से 10 साल में ही एनीमिया का उन्मूलन किया सकता है। इसके लिए बिहार सरकार जो योजनाएं चला रही है, उसके अतिरिक्त डोर-टू-डोर प्रोग्राम चलाकर लोगों को जागरूक किया जा सकता है। गर्भवती माता, किशोरियों एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। इससे लिए स्कूल और कॉलेज की छात्राओं को जागरूक करना चाहिए। यहां भी छात्राओं को मुफ्त में आयरन की गोलियां सही मायने में पहुंचनी चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका सेवन हो रहा है। बिहार में सरकार जीविका का सपोर्ट ले सकती है। जीविका का नेटवर्क गांवों में था, अब अस्पतालों में भी होने जा रहा है। इस भीषण संकट से उबरने में राज्य सरकार को केंद्र की योजना से तुरंत जुड़ना चाहिए। गांवों में एनीमिया के केस सबसे अधिक सामने आते हैं। ग्रामीण इलाकों में इसे लेकर लोग कम जागरुक हैं। इसलिए जीविका दीदी की मदद से घर-घर जाकर महिलाओं को जागरुक करना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले फंड के अतिरिक्त बिहार सरकार को एनीमिया उन्मूलन की दिशा में अतिरिक्त फंड देना पड़े तो भी पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि यह इस राज्य की बड़ी समस्या है।

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