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सुप्रीम कोर्ट नीतीश कुमार को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई जनवरी 2018 में करेगा
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:33 PM IST
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नीतीश कुमार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में होगी। याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ हत्या का केस दर्ज होने की बात छुपाई थी।
यह भी पढ़ें: भाजपा की बोली बोलने लगे हैं नीतीश कुमार, खुद की लोकतांत्रिक सोच खत्म हुई: कौकब कादरी
सुप्रीम कोर्ट नीतीश कुमार को बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तारीख तय की थी।
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याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने दायर याचिका में कहा गया था कि साल 2006 से 2015 के दौरान नीतीश कुमार ने हलफनामे में यह खुलासा नहीं किया कि 1991 में उन पर हत्या के मामले में एफआइआर दर्ज हुई थी। याचिका में दावा किया गया था कि नीतीश कुमार ने चुनाव के लिए दायर अपने हलफनामे में इस तथ्य का जिक्र नहीं किया था कि उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज है, इसलिए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।
याचिका में नीतीश कुमार के खिलाफ हत्या के मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार अपने आपराधिक रिकॉर्ड को छुपाने के बाद संवैधानिक पद पर नहीं बने रह सकते।
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सुप्रीम कोर्ट नीतीश कुमार को बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तारीख तय की थी।
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Supreme Court adjourned a plea against Bihar chief minister Nitish Kumar alleging that he did not disclose in his election affidavits an FIR against him in a murder case; Further hearing in the case to be in second week of January.
— ANI (@ANI) December 8, 2017
याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने दायर याचिका में कहा गया था कि साल 2006 से 2015 के दौरान नीतीश कुमार ने हलफनामे में यह खुलासा नहीं किया कि 1991 में उन पर हत्या के मामले में एफआइआर दर्ज हुई थी। याचिका में दावा किया गया था कि नीतीश कुमार ने चुनाव के लिए दायर अपने हलफनामे में इस तथ्य का जिक्र नहीं किया था कि उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज है, इसलिए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।
याचिका में नीतीश कुमार के खिलाफ हत्या के मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार अपने आपराधिक रिकॉर्ड को छुपाने के बाद संवैधानिक पद पर नहीं बने रह सकते।