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Mid Day Meal: मध्याह्न भोजन खाकर स्कूल में ही तड़पकर 23 बच्चे दुनिया छोड़ गए थे; 12वीं बरसी पर दी श्रद्धांजलि

Wed, 16 Jul 2025 08:40 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 16 Jul 2025 08:40 PM IST
सार

Saran News: ग्रामीणों ने इस बात पर अफसोस जताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस गांव को गोद लेने का वादा तो किया था, लेकिन वह वादा भी अब कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। शहीद बच्चों की समाधियां अब टूटकर खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं, और किसी अधिकारी ने वहां पहुंचकर उनकी सुध नहीं ली है।

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Mid Day Meal: 23 children died in agony in school after eating mid-day meal; Tribute paid on 12th anniversary
मध्याह्न भोजन खाकर स्कूल में जान गंवाने वाले 23 बच्चों को दी गई श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के सारण जिले के मशरक प्रखंड स्थित गंडामन गांव में 12 साल पहले मिड डे मील के विषाक्त भोजन से दम तोड़ने वाले 23 मासूमों की बरसी बुधवार को भावुक माहौल में मनाई गई। परिजनों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बच्चों की स्मृति में पूजा-पाठ, हवन और दो मिनट का मौन रखकर शहीद आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। लेकिन इस बार भी सरकार और प्रशासन की ओर से एक भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे शोकाकुल परिवारों की पीड़ा और भी गहरी हो गई।

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23 मासूमों की याद में सिसकती संवेदनाएं
2013 में गंडामन गांव के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील के तहत परोसे गए विषाक्त भोजन ने 23 मासूमों की जान ले ली थी। यह घटना उस समय देशभर में सनसनी और आक्रोश का कारण बनी थी। लेकिन अब एक दशक बीत जाने के बाद भी न तो मृत बच्चों की स्मृति स्थल का रख-रखाव हो रहा है, और न ही सरकार की कोई ठोस सहानुभूति जमीनी स्तर पर नजर आ रही है।
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ग्रामीणों ने इस बात पर अफसोस जताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस गांव को गोद लेने का वादा तो किया था, लेकिन वह वादा भी अब कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। शहीद बच्चों की समाधियां अब टूटकर खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं, और किसी अधिकारी ने वहां पहुंचकर उनकी सुध नहीं ली है।
 
आंसुओं के साथ की गई पूजा-अर्चना
बुधवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मृतक बच्चों के परिजन, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गांव के दर्जनों लोग शामिल हुए। स्कूल परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-पाठ और हवन का आयोजन किया गया। शहीद ममता कुमारी के पिता सुरेंद्र प्रसाद ने नम आंखों से कहा कि भगवान किसी भी माता-पिता को ऐसा दिन न दिखाए। उस दिन का मंजर आज भी हमारी रूह को कंपा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सावधानी बरतना अनिवार्य है। उन्होंने अपील की कि सभी प्रधानाध्यापक और रसोइया यह सुनिश्चित करें कि रसोईघर में अनाधिकृत प्रवेश किसी भी हालत में न हो, ताकि ऐसी घटना दोबारा न घटे।

 
प्रशासनिक मौन और ग्रामीणों की नाराजगी
बरसी कार्यक्रम में भाग लेने वाले ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक उपेक्षा पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि हर वर्ष की तरह इस बार भी कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि श्रद्धांजलि सभा में शामिल नहीं हुआ। वे मृतकों के परिजनों का हालचाल पूछने तक नहीं आए, जो कि सरकारी संवेदनहीनता का स्पष्ट संकेत है। ग्रामीणों ने इस बात को भी रेखांकित किया कि जिन बच्चों की मौत ने एक समय पूरे देश को हिला दिया था, उनके लिए स्थायी स्मृति स्थल या स्मारक तक बनाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है। राजनीति और सिस्टम की उपेक्षा ने इन मासूमों की शहादत को लगभग भुला दिया है।

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श्रद्धांजलि सभा में जुटे जनप्रतिनिधि और समाजसेवी
बरसी कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक राज किशोर सिंह, शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं सहित जिला परिषद प्रतिनिधि बिट्टू कुमार सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष बीरबल कुशवाहा, पंचायत प्रतिनिधि वरुण राय, समिति सदस्य शशिभूषण सिंह, उपमुखिया पंकज सिंह, पूर्व सैनिक शंभूनाथ सिंह, सरपंच संघ अध्यक्ष अजय कुमार सिंह, समाजसेवी मिथिलेश राय, बिट्टू यादव और शंकर ठाकुर सहित दर्जनों बुद्धिजीवी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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