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Bihar News: पुलिया का मुहाना बंद होने से 200 एकड़ फसल बर्बाद होने की कगार पर, किसानों ने दी चेतावनी
Mon, 04 Nov 2024 08:03 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 04 Nov 2024 08:03 PM IST
सार
Gopalganj News: किसानों ने कहा कि पानी का बहाव बंद होने से उनकी धान की फसल भी अब बर्बाद होने लगी है और खेतों में अब भी पानी जमा है। इससे फसल की कटाई में कठिनाई हो रही है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
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अपनी समस्या को लेकर अंचल पदाधिकारी से मिला किसानों का प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के हाता टोला गांव के पास एक व्यक्ति द्वारा पुलिया का मुहाना बंद कर दिए जाने से लगभग 200 एकड़ धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने पुलिया के बंद मुहाने को जल्द नहीं खुलवाया, तो न केवल धान की फसल बर्बाद होगी, बल्कि गेहूं की बुवाई भी संभव नहीं हो पाएगी।
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किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अंचल पदाधिकारी मणि भूषण कुमार से मिला और अपनी समस्या से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर लिखित आवेदन देकर समाधान की गुहार लगाई। किसानों ने बताया कि कुचायकोट प्रखंड के दक्षिणी हिस्से में अहियापुर, रतनपुरा, करवतही, कर्णपुरा और निरजलहा सहित आधा दर्जन गांवों में धान और गेहूं की खेती प्रमुखता से होती है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अखिलानंद त्रिपाठी कर रहे थे।
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किसानों ने बताया कि बरसात के मौसम में हाता टोला गांव के पास स्थित पुलिया से पानी निकलकर दाहा नदी में चला जाता था। लेकिन इस वर्ष बरसात शुरू होने के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिया का मुहाना बंद कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र में पानी का बहाव पूरी तरह से रुक गया है।
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किसानों ने कहा कि पानी का बहाव बंद होने से उनकी धान की फसल भी अब बर्बाद होने लगी है और खेतों में अब भी पानी जमा है। इससे फसल की कटाई में कठिनाई हो रही है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी और समय पर गेहूं की बुवाई भी नहीं हो सकेगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अन्य किसानों में अखिलेश सिंह, अवध किशोर सिंह, मुक्तेश्वर तिवारी, योगिंदर राय, कृपाशंकर तिवारी, प्रदीप ओझा और रामेश्वर तिवारी शामिल रहे। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उनकी आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है।