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Bihar News: अमेरिकी जज सबिता सिंह 21 साल बाद पहुंचीं अपने पैतृक गांव; भोजपुरी में की बात, झूम उठे ग्रामीण
Tue, 18 Feb 2025 09:03 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 18 Feb 2025 09:03 PM IST
सार
Chhapra News: छपरा की बेटी और अमेरिकी जज सबिता सिंह 21 साल बाद अपने पैतृक गांव परिवार के साथ लौटीं। इस दौरान उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने लोगों से भोजपुरी में बात की, जिससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखने को मिला।
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अपने परिवार के साथ अमेरिकी जज सबिता सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार की बेटी और अमेरिका की मशहूर जज सबिता सिंह जब 21 साल बाद अपने पैतृक गांव मुकरेड़ा (रिविलगंज, छपरा) पहुंचीं, तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। उनकी एक झलक पाने के लिए सैकड़ों ग्रामीण उमड़ पड़े। गांववालों ने उन्हें अपनी बेटी और बहन के रूप में गले लगाया, तो वहीं खुद सबिता भी अपने गांव की गलियों में लौटकर भावुक हो गईं। अमेरिका में एक प्रतिष्ठित न्यायाधीश बनने के बावजूद उन्होंने अपने गांव की मिट्टी को नहीं भुलाया और भोजपुरी में बातचीत कर सभी का दिल जीत लिया।
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बोस्टन हाईकोर्ट की जज हैं सबिता सिंह
सबिता सिंह का जन्म मुकरेड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता शिवेंद्र प्रसाद सिंह एक इंजीनियर थे और अप्रवासी भारतीय के रूप में अमेरिका चले गए। जब सबिता सिर्फ तीन साल की थीं, तब वे भी अपने माता-पिता के साथ अमेरिका चली गईं। वहां उन्होंने कठिन मेहनत से पढ़ाई की और कानून की पढ़ाई करने के बाद पहली दक्षिण एशियाई महिला जज बनने का गौरव हासिल किया। वर्तमान में वे अमेरिका के बोस्टन हाईकोर्ट में जस्टिस के पद पर कार्यरत हैं।
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गांव में लौटकर छलके जज के आंसू
गांव में जब सबिता सिंह पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। उनके सम्मान में फूल-मालाओं से स्वागत किया गया, ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा गांव गूंज उठा। उन्होंने बुजुर्गों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, महिलाओं को गले लगाया और छोटे बच्चों को दुलारते हुए भविष्य के लिए प्रेरित किया। इतने सालों बाद भी उनकी सादगी और गांव से जुड़ाव देखकर लोग भावुक हो गए।
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परिवार के साथ आईं अमेरिका से
इस बार सबिता सिंह अकेले नहीं आईं, बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ भारत लौटीं। उनके साथ उनके पिता शिवेंद्र प्रसाद सिंह, मां सीता सिंह, छोटी बहन कविता सिंह, उनके दो बेटे भीगो और सोरेन, बेटी आन्या, बहन कविता के बेटे नवीन और बेटी काजल भी आए हुए हैं। उनके दादा रामप्रसाद सिंह छपरा विधि मंडल में वरीय अधिवक्ता थे। उनके परिवार के कई सदस्य आज भी कानून के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनके चाचा ब्रजेश कुमार सिंह, मुक्तेश्वर कुमार सिंह और अमरेंद्र कुमार सिंह छपरा बार एसोसिएशन में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। छोटी बहन कविता सिंह अमेरिका में शिक्षिका हैं, जबकि बड़ी बहन सरिता सिंह भी वहीं बस चुकी हैं।
2006 में पहली बार आई थीं भारत
सबिता सिंह पहली बार 2006 में जज बनने के बाद अपने गांव आई थीं, लेकिन इस बार का स्वागत कहीं ज्यादा भव्य और यादगार रहा। ग्रामीणों को गर्व है कि उनकी बेटी अमेरिका में न्यायाधीश बनकर पूरे देश का नाम रोशन कर रही है।
गांव में सबिता सिंह के स्वागत के लिए मुखिया मनोज कुमार, उप मुखिया रोहित कुमार सिंह, वरीय अधिवक्ता श्रीनिवास सिंह, अधिवक्ता ब्रजेश कुमार सिंह, संजय सिंह, अमरेंद्र सिंह, मुक्तेश्वर सिंह, अभिनव सिंह, रघुवंश सिंह, नृपेन्द्र सिंह, जितेंद्र सिंह, अजय तिवारी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। गांव में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है, क्योंकि मुकरेड़ा गांव की बेटी आज अमेरिका में न्याय की कुर्सी पर बैठी है और फिर भी अपनी जड़ों को नहीं भूली।