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Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी लागू होने से हाई कोर्ट में जमानत आवेदनों का ढेर, सुप्रीम कोर्ट से गुहार 

Fri, 14 Jan 2022 09:53 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 14 Jan 2022 09:53 PM IST
सार

बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण नियमित जमानत आवेदनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसका असर भी अदालतों पर दिखने लगा है। 

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Phenomenal rise in bail pleas due to Bihar liquor law, causing delay in disposal: Patna HC to SC
पटना हाई कोर्ट में जमानत आवेदनों का ढेर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पटना हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य में शराबबंदी लागू होने के कारण जमानत आवेदनों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है और लगभग 25 प्रतिशत नियमित जमानत याचिकाएं केवल बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत दायर की जा रही हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि वह अपनी स्वीकृत संख्या की आधी से भी कम क्षमता के साथ काम कर रहा है और जमानत आवेदन दाखिल करने में वृद्धि के कारण नियमित जमानत याचिकाओं के निपटान में देरी हो रही है।

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जमानत आवेदनों का लगा ढेर  
हाई कोर्ट ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में 39,622 जमानत आवेदन हैं जिसमें 21,671 अग्रिम और 17,951 नियमित जमानत आवेदन शामिल हैं, जो निर्धारित पीठों के समक्ष लंबित हैं। इसके अलावा 20,498 अग्रिम और 15,918 नियमित जमानत आवेदनों सहित 36,416 ताजा जमानत आवेदनों पर अभी विचार किया जाना बाकी है। 11 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक अन्य मामले में बिहार सरकार की उन याचिकाओं के एक बैच को खारिज कर दिया था, जिसमें राज्य के कड़े शराब कानून के तहत आरोपियों को अग्रिम और नियमित जमानत देने को चुनौती दी गई थी। 
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25 फीसदी नियमित जमानत के आवेदन शराबबंदी से जुड़े
न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने हाई कोर्ट के समक्ष जमानत आवेदनों के लंबित होने में देरी और विचाराधीन कैदियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई में देरी के कारण लंबे समय तक जेल में रहने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने मामले के पक्षकारों और अदालत में मौजूद अधिवक्ता शोएब आलम से सुझाव मांगे।  बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण नियमित जमानत आवेदनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। मोटे तौर पर 25 फीसदी नियमित जमानत के आवेदन बिहार आबकारी अधिनियम के तहत आ रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने अपने हलफनामे में कहा है कि इससे नियमित जमानत याचिकाओं के निपटारे में देरी हुई है।
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सुप्रीम कोर्ट का याचिकाओं को हस्तांतरित करने का आदेश, बिहार सरकार से तीन हफ्ते के अंदर जवाब मांगा
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार सरकार को उसके शराबबंदी कानून की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने खुद इसी तरह की अन्य याचिकाओं को पटना हाईकोर्ट से शीर्ष अदालत में हस्तांतरित करने का आदेश भी दिया है।

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि इस कोर्ट के समक्ष पहले से ही ऐसी याचिकाएं लंबित है। ऐसे में यह उचित होगा कि हाईकोर्ट में दायर अन्य रिट याचिकाओं को यहां हस्तांतरित कर दिया जाए और लंबित एसएलएपी के साथ इनकी सुनवाई हो। 

ऐसे में पीठ याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के हस्तांतरण की अनुमति देता है। पीठ इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया समेत तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। 


पीठ ने कहा कि सभी याचिकाओं में कानून की वैधता का मुद्दा उठाया गया है। पीठ ने बिहार सरकार के प्रतिनिधि वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार को तीन हफ्ते के अंदर इस मामले पर जवाब देने को कहा है। साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई अप्रैल के पहले हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

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