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Bihar: विभा देवी का तेजस्वी यादव को खुला पत्र, पुराने यादव नेताओं की उपेक्षा और राजनीतिक साजिशों का लगाया आरोप

Thu, 17 Jul 2025 05:10 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नवादा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नवादा Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 17 Jul 2025 05:10 PM IST
सार

नवादा से राजद विधायक विभा देवी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को एक खुला पत्र लिखकर उन पर यादव समाज के पुराने प्रभावशाली नेताओं को खत्म करने का आरोप लगाया है। 
 

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Vibha Devi's open letter to Tejashwi Yadav, accuses him of neglecting old Yadav leaders and political conspira
राजद की नवादा विधायक विभा देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजद की नवादा विधायक विभा देवी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को एक खुला पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व और यादव समाज की बदलती राजनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने 1990 से पहले के दौर को यादव समाज का स्वर्णिम काल बताया और आरोप लगाया कि 1990 के बाद से तेजस्वी यादव का परिवार पुराने प्रभावशाली यादव नेताओं को खत्म करने में जुट गया।
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विभा देवी ने लिखा है कि एक समय था जब यादव समाज के नेता सभी प्रमुख दलों में ऊंचे पदों पर थे। उन्होंने राम लखन सिंह यादव, महावीर प्रसाद यादव, अनूप लाल यादव, रामशरण यादव, हुकुमदेव नारायण यादव जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी नेता राजनीति में मजबूत भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने यह भी लिखा कि 1987 में लोकदल के 47 में से 23 विधायक यादव समाज से थे, और इन्हीं ने लालू प्रसाद यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाया था।
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पत्र में उन्होंने वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव और अपने पति राजबल्लभ प्रसाद के खिलाफ कथित साजिशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि 1994 में तेजस्वी यादव के रिश्तेदारों ने राजबल्लभ के खिलाफ आशु मलिक हत्याकांड का फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य गवाह मोहम्मद सलमान रागीव और विनय यादव, तेजस्वी के रिश्तेदारों के करीबी माने जाते थे।
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विभा देवी ने आगे लिखा कि लालू यादव ने बिना सच्चाई जाने ही 1996 में उनके पति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करवा दी। उन्होंने 2004 की एक घटना का भी उल्लेख किया, जब तेजस्वी के एक रिश्तेदार जिला अध्यक्ष बने और मुख्यमंत्री आवास में कौशल यादव की उपस्थिति में नवादा के ठेकों को लेकर राजबल्लभ पर सवाल उठाए गए।

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पत्र में उन्होंने यह भी बताया कि उदय शंकर सिंह हत्याकांड के वक्त राजबल्लभ किसी कार्यक्रम में शामिल थे और घटनास्थल से 25 किलोमीटर दूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2007 में मामले को फिर से उठाया गया और वही गवाह फिर कोर्ट में पेश हुए। राजनीतिक माफीनामे का जिक्र करते हुए विभा देवी ने बताया कि 2015 के विधान पार्षद चुनाव में उनके पति ने सलमान रागीव को माफ कर जीतने में मदद की थी। बाद में सलमान ने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी।

पत्र में चारा घोटाले का भी उल्लेख है। उन्होंने लिखा कि 1996-97 में जब राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब समर्थन सूची में उनके पति का नाम भी जोड़ा गया, जबकि वे निर्दलीय विधायक थे। राज्यपाल रमेश भंडारी की आपत्ति के बाद उन्हें राजभवन बुलाया गया और उनका समर्थन औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया। पत्र के अंत में विभा देवी ने सवाल किया, "आखिर किसने किसे क्या दिया?" और कहा कि वे इस विषय पर और खुलासे अगले पत्र में करेंगी।
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