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Bihar: सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं को मिली नई दिशा, वन भूमि उपयोग को लेकर विभाग ने लिया अहम निर्णय
Fri, 25 Jul 2025 09:02 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Fri, 25 Jul 2025 09:02 PM IST
सार
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने बिहार में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं में वन भूमि के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब वृक्षों की गणना और स्थल निरीक्षण का कार्य पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : X (@NitishKumar)
विस्तार
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं में वन भूमि के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग की अपर मुख्य सचिव हरजोत कौर बम्हरा की अध्यक्षता में अरण्य भवन, पटना में हुई समीक्षा बैठक में यह तय किया गया कि इन परियोजनाओं के तहत वृक्षों की गणना और संयुक्त स्थलीय निरीक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कार्य पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर किया जाएगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत जिन मामलों में वन भूमि के बदले समतुल्य गैर-वन भूमि की आवश्यकता होती है, उनमें पथ निर्माण विभाग को ऐसी भूमि को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर वन एवं पर्यावरण विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि राज्य में विभिन्न एजेंसियों द्वारा सड़कों के किनारे रिटेल आउटलेट का निर्माण किया जा रहा है। यदि ये आउटलेट अधिसूचित सुरक्षित वनों के निकट स्थित हैं, तो उनके लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अंतर्गत अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया में पहले पथ निर्माण विभाग और फिर पर्यावरण विभाग से अनुमति ली जानी होगी। इसके लिए पथ निर्माण विभाग से प्राप्त सभी रिटेल आउटलेट की सूची संबंधित पदाधिकारियों से साझा की गई है, ताकि अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा सके।
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बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव अभय कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैंपा) सुरेन्द्र सिंह, पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार, बीएसआरडीसीएल के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार सुमन, और आरसीपीएलडब्ल्यूईए के नोडल पदाधिकारी अंजनी कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत जिन मामलों में वन भूमि के बदले समतुल्य गैर-वन भूमि की आवश्यकता होती है, उनमें पथ निर्माण विभाग को ऐसी भूमि को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर वन एवं पर्यावरण विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
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बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि राज्य में विभिन्न एजेंसियों द्वारा सड़कों के किनारे रिटेल आउटलेट का निर्माण किया जा रहा है। यदि ये आउटलेट अधिसूचित सुरक्षित वनों के निकट स्थित हैं, तो उनके लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अंतर्गत अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया में पहले पथ निर्माण विभाग और फिर पर्यावरण विभाग से अनुमति ली जानी होगी। इसके लिए पथ निर्माण विभाग से प्राप्त सभी रिटेल आउटलेट की सूची संबंधित पदाधिकारियों से साझा की गई है, ताकि अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा सके।
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बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव अभय कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैंपा) सुरेन्द्र सिंह, पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार, बीएसआरडीसीएल के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार सुमन, और आरसीपीएलडब्ल्यूईए के नोडल पदाधिकारी अंजनी कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।