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Bihar: सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, जन्मभूमि पटना से शहादतों की अमर गाथा

Sat, 27 Dec 2025 02:17 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: पटना ब्यूरो Updated Sat, 27 Dec 2025 02:17 PM IST
सार

सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का जीवन साहस, त्याग, मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मिसाल है। 22 दिसंबर 1666 को पटना में जन्मे गुरु जी ने कम उम्र में सिखों के दसवें गुरु के रूप में गद्दी संभाली।

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गुरु गोविंद सिंह जी की अमर कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का जीवन साहस, त्याग, आध्यात्मिक चेतना और मानवता की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों की अद्वितीय मिसाल है। उनका जीवन भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक उज्ज्वल अध्याय है। यह गाथा विशेष रूप से तख्त श्री हरिमंदिर जी, पटना साहिब और श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर से गहराई से जुड़ी हुई है।
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22 दिसंबर 1666 को बिहार की पावन धरती पटना में श्री गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म हुआ। जन्म के समय उनका नाम गोबिंद राय रखा गया। वे नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज और माता गुजरी जी के पुत्र थे। उनका जन्मस्थान आज तख्त श्री हरिमंदिर जी, पटना साहिब के रूप में विश्वविख्यात है। पटना साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि गुरु गोविंद सिंह जी के बचपन की स्मृतियों का जीवंत साक्ष्य भी है। 1675 में जब नौ वर्षीय गोबिंद राय के पिता, श्री गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिल्ली में शहादत दी, उसी समय गोबिंद राय को सिखों का दसवां गुरु घोषित किया गया। इतनी कम उम्र में गुरु गद्दी संभालना अपने आप में एक अद्भुत घटना थी।
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गुरु गोविंद सिंह जी ने शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा पर जोर दिया और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया। 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने पंज प्यारे बनाकर जाति, भेदभाव और भय से मुक्त समाज की नींव रखी, जो सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चले। स्वयं अमृत छककर उन्होंने सिद्ध किया कि गुरु और शिष्य समान हैं।
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मुगलों और पहाड़ी राजाओं के साथ संघर्ष के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके पुत्र धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अमर हो गए। उन्हें इस्लाम स्वीकार करने का दबाव दिया गया, लेकिन दोनों बालकों ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। उनकी अडिग आस्था और निर्भीकता आज भी मानवता को प्रेरित करती है। परिवार का यह बलिदान धर्म, न्याय और मानव गरिमा की रक्षा के लिए सर्वोच्च मूल्य का संदेश देता है।


तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना सिटी का बाल लीला गुरुद्वारा और कंगन घाट गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से गहराई से जुड़े हैं। बाल लीला गुरुद्वारा उस स्थान पर स्थित है, जहाँ बाल गोबिंद राय अपने बाल सखाओं के साथ खेला करते थे। कंगन घाट गंगा नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक स्थल है, जहां गुरु जी बाल्यकाल में आए करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहां माता जी को गंगा में गिरे कंगन के बारे में भविष्यवाणी दी थी।

तख्त श्री हरमंदिर साहिब प्रबंधन कमेटी के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती पर दिसंबर माह के अंत में प्रकाश उत्सव पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी सहित विदेशों से भी हजारों सिख श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस वर्ष 27 दिसंबर 2025, शनिवार को रात्रि 12:00 बजे श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का जन्म उत्सव बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी आमंत्रित किया गया है।
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