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Patna High Court Verdict: नालंदा कलेक्टर को JDU नेता रिशु कुमार को देना पड़ा पांच हजार रुपये, जानें पूरा मामला
Fri, 14 Feb 2025 09:45 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 14 Feb 2025 09:45 PM IST
सार
JDU leader Rishu Kumar: प्रशासनिक अधिकारों के पद के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जहां जिलाधिकारी शशांक शुभंकर को जनता दल यूनाइटेड के नेता रिशु कुमार पर गलत तरीके से लगाए गए क्रिमिनल कंट्रोल एक्ट के लिए आर्थिक दंड भरना पड़ा।
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जुर्माना देते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जेडीयू नेता रिशु कुमार पर गलत तरीके से सीसीए लगाना नालंदा कलेक्टर को भारी पड़ गया। जुझारु नेता रिशु कुमार ने DM के आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और मात्र सात दिन में ही DM के आदेश के विरुद्ध स्टे ले लिया था। बाद में सुनवाई के दरमियान हाईकोर्ट ने नालंदा कलेक्टर के रिशु कुमार पर लगाए CCA को गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया और DM को जुर्माने के तौर पर 5000 रुपये देने का निर्देश दिया। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी DM द्वारा न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाया जाता रहा।
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बता दें कि बाध्य होकर रिशु कुमार को DM के विरुद्ध अवमानना वाद दाखिल करना पड़ा, जिसमें दोबारा DM को HC द्वारा निर्देश मिला कि 14 फ़रवरी के पहले 5000 रुपये रिशु कुमार को दें, अन्यथा अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। HC की कार्रवाई से हठी DM को आखिरकार झुकते हुए 13/2/25 को रिशु कुमार को 5000 रुपये का चेक घर पर सरकारी कर्मी को भेजकर हस्तगत कराना पड़ा।
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जदयू नेता ने कहा कि हमारे ऊपर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नालंदा जिलाधिकारी महोदय के द्वारा सीसीए लगा दिया गया था। आज तक मेरे ऊपर सीसीए से पहले कभी भी न तो 107 और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बावजूद दुर्भावना से ग्रसित होकर नालंदा डीएम के आदेश पर फर्जी तरीके से तीन सनहा दर्ज कर मेरे ऊपर सीसीए लगाया गया। इसके खिलाफ मैंने पटना उच्च न्यायालय में अपील किया और पटना उच्च न्यायालय के द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए सीसीए को निरस्त करते हुए नालंदा डीएम के ऊपर पांच हजार रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया गया था।
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समय सीमा बीत जाने के बावजूद भी जुर्माने की राशि मुझे नहीं दी जा रही थी। इसके बाद मैं पुनः पटना उच्च न्यायालय के शरण में गया और पटना उच्च न्यायालय के द्वारा तीन सप्ताह के भीतर फटकार लगाते हुए जुर्माने की राशि देने का आदेश दिया गया। नहीं तो उपस्थित होने का आदेश जारी किया गया। इसके बाद समय सीमा के एक दिन पूर्व समाहरणालय के नजारत शाखा के कर्मी के द्वारा मुझे जुर्माने का चेक दिया गया।
मैं लोगों से अपील करूंगा कि कभी भी कोई गलत-शलत तरीके से फंसाए तो उसके खिलाफ जरूर लड़ें और हमेशा सच के साथ रहें। कोई भी ऐसा काम न करें, जिससे की समाज में किरकिरी हो। आज हमारे साथ समाज के हर वर्ग के लोग जुड़े हुए हैं। कभी भी ऐसा कुछ मामला है। उसके खिलाफ़ जरूर खड़ा हो और पुरज़ोर तरीके से इसका सामना करें।