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राजनीतिक दोस्ती: कभी मोदी के नाम भर से चिढ़ जाते नीतीश, इस बार जन्मदिन पर मनाएंगे महोत्सव

Wed, 15 Sep 2021 11:13 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Wed, 15 Sep 2021 11:13 AM IST
सार

नीतीश कुमार कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेने से भी परहेज करते थे, लेकिन हालिया घटनाक्रम से उनके स्वभाव में अंतर देखने को मिल रहा है। जातीय जनगणना पर मिले सकारात्मक संकेत के बाद नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने की घोषणा कर दी है। 
 

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Nitish Kumar on narendra modi Birthday he used to get annoyed by the name of Modi now they become political friend
नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी बहुत लंबी नहीं रहती। महात्वाकांक्षाएं रिश्तों के मायनों को बदलती रहती हैं। बिहार की राजनीति में भी इस समय यही देखने को मिल रहा है। एक समय था जब नरेंद्र मोदी के नाम भर से नीतीश कुमार चिढ़ जाते थे, लेकिन अब वह उनका जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। इसकी घोषणा खुद नीतीश कुमार ने की है। 

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दरअसल, 17 सितंबर को नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन है। भाजपा की ओर से उनके जन्मदिन पर बड़ा टीकाकरण अभियान चलाने की घोषणा हुई है। ऐसे में नीतीश कुमार ने भी बिहार में टीकाकरण महोत्सव आयोजित करने का एलान कर दिया है। भले ही यह सामान्य घटना हो, लेकिन राजनीतिक पंडित इस एलान को भविष्य और भूत से जोड़कर देख रहे हैं। 
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नीतीश के लिए मोदी मतलब 'दुखती रग'
बात 2010 की है। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। बिहार में बाढ़ आई हुई थी और जनजीवन बेहाल था। ऐसे में गुजरात सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपए की सहायता राशि बिहार सरकार को दी गई। इसका विज्ञापन भी अखबार में छपा, जिससे नीतीश कुमार भड़क गए और उन्होंने सहायता लेने से इंकार कर दिया। इसी समय नीतीश कुमार ने भाजपा के कई नेताओं को अपने आवास पर भोज का निमंत्रण दिया था, बाद में यह भोज रद्द कर दिया गया था। 
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17 साल का साथ छोड़ थामा था आरजेडी का हाथ 
बिहार में बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन वाली सरकार थी। 2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया। इससे नीतीश कुमार बिफर गए और उन्होंने गठबंधन तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने आरजेडी से बाहर से समर्थन लेकर सरकार चलाई। हालांकि, इसके 20 महीने बाद ही 2014 में जैसे एनडीए की सरकार बनी। नीतीश को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, नौ महीने बाद 2015 में नीतीश दोबारा आरजेडी के साथ आए और सरकार बनाई। यह सरकार 20 महीने ही चली और नीतीश फिर भाजपा के साथ हो लिए और सरकार गठित की। 


जातीय जनगणना पर मिल रहा साथ 
जातीय जनगणना की मांग करने वाले दलों का नेतृत्व नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। हाल ही में नीतीश ने इसको लेकर प्रधानमंत्री से मुलाकात भी की थी। भले ही भाजपा के एक मंत्री ने जातीय जनगणना से इंकार कर दिया हो, लेकिन प्रधानमंत्री की चुप्पी ने नीतीश को कुछ सकारात्मक संकेत तो जरूर दे दिए हैं।

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