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Bihar: बाढ़ से निपटने को लेकर जल संसाधन विभाग ने की पुख्ता तैयारी, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम करेगी मदद

Tue, 20 May 2025 04:44 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 20 May 2025 04:44 PM IST
सार

Bihar: पटना में बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र के तहत एक गणितीय मॉडल काम कर रहा है, जो गंगा नदी के बक्सर से कहलगांव तक और अन्य प्रमुख नदियों के कुल 42 स्थानों पर 72 घंटे पहले बाढ़ की चेतावनी देने में सक्षम है। इस सिस्टम में सेटेलाइट तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि तटबंधों की स्थिति और पानी के बहाव की निगरानी की जा सके।

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Bihar: Water Resources Department has made elaborate preparations to deal with possible floods
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में इस विषय पर एक समीक्षा बैठक की, जिसमें जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव ने अब तक किए गए इंतजामों की विस्तार से जानकारी दी। विभाग की ओर से बाढ़ पूर्व जो काम किए गए हैं, वे यह दिखाते हैं कि सरकार किसी भी आपदा से निपटने को पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

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बाढ़ से पहले कराए गए कटाव रोधी और सुरक्षा कार्य
राज्य के भीतर बहने वाली प्रमुख नदियों जैसे गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान और महानंदा के किनारे 394 स्थानों पर बाढ़ से पहले ही कटाव रोधी और तटबंध मजबूती के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। ये काम राज्य योजना, केंद्र सरकार की योजनाओं और आपदा राहत कोष से कुल 1310 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए हैं।

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तटबंधों की चौकसी और निगरानी का इंतजाम
राज्य में बाढ़ की स्थिति के दौरान तटबंधों पर खास निगरानी रखी जाएगी। कुल 3808 किलोमीटर लंबे तटबंध पर हर एक किलोमीटर पर एक कर्मचारी की तैनाती होगी, जो लगातार हालात पर नजर रखेगा। इसके अलावा तटबंध पर निगरानी करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अस्थायी आवास, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। नदियों पर बने बराज से पानी के बहाव की लगातार निगरानी की जाएगी और अगर जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो जिला प्रशासन को तुरंत सूचना दी जाएगी।

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तकनीकी विशेषज्ञों की टीम करेगी मदद
बाढ़ के समय तटबंधों और संवेदनशील जगहों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने एक तकनीकी टीम बनाई है। इसमें अनुभवी और रिटायर इंजीनियरों को शामिल किया गया है जो ज़रूरत पड़ने पर स्थानीय इंजीनियरों को सलाह देंगे और मुश्किल हालात में उनका मार्गदर्शन करेंगे।


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नेपाल से समन्वय बना कर चल रहा विभाग
बिहार की कई नदियाँ नेपाल क्षेत्र से होकर आती हैं, इसलिए नेपाल के साथ भी विभाग लगातार संपर्क में है। कोसी बराज और नेपाल क्षेत्र में मौजूद तटबंधों पर सुरक्षा से जुड़े सारे काम बिहार सरकार ने पूरे कर लिए हैं। नेपाल के मौसम और जल विज्ञान विभाग से बिहार को समय-समय पर बारिश की जानकारी और पूर्वानुमान मिलते रहते हैं। इसके लिए काठमांडू में बिहार सरकार का एक संपर्क कार्यालय भी है, जो दोनों देशों के बीच समन्वय बनाए रखने का काम करता है।

बाढ़ से जुड़ी जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था
बाढ़ नियंत्रण कोषांग के तहत एक सहायता केंद्र 1 जून से शुरू किया जाएगा, जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा। लोग टोल फ्री नंबर 1800 345 6145 पर फोन कर किसी भी तरह की जानकारी या मदद ले सकेंगे। इसके अलावा दो लैंडलाइन और दो मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर संपर्क किया जा सकता है।

बाढ़ की चेतावनी देने वाली प्रणाली भी तैयार
पटना में बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र के तहत एक गणितीय मॉडल काम कर रहा है, जो गंगा नदी के बक्सर से कहलगांव तक और अन्य प्रमुख नदियों के कुल 42 स्थानों पर 72 घंटे पहले बाढ़ की चेतावनी देने में सक्षम है। इस सिस्टम में सेटेलाइट तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि तटबंधों की स्थिति और पानी के बहाव की निगरानी की जा सके। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और बिहार मौसम सेवा केंद्र से रोजाना बारिश का पांच दिनों का पूर्वानुमान लिया जाता है, जिसे सभी जिलों के अधिकारियों और विभागों को समय पर भेजा जाएगा ताकि तैयारी पहले से की जा सके।

सरकार की प्राथमिकता: समय पर राहत, सटीक जानकारी
राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि बाढ़ जैसे हालात में लोगों को समय पर राहत पहुंचाना और सही जानकारी देना उसकी प्राथमिकता है। जल संसाधन विभाग की तैयारियाँ इसी दिशा में एक मजबूत कदम हैं, जिससे किसी भी संभावित आपदा से जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके।


 

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