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Bihar Politics: भाकपा माले ने कहा- ‘बुलडोज़र राज’ की ओर बढ़ रहा बिहार, नीतीश सरकार ने 10 हजार देकर दिया धोखा

Sun, 23 Nov 2025 07:11 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 23 Nov 2025 07:11 PM IST
सार

दीपांकर भट्टाचार्य ने एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एनडीए सरकार ने महिलाओं को चुनाव से पहले 10 हजार रुपये देकर धोखा देने का आरोप लगाया और भविष्य में सामाजिक उत्पीड़न बढ़ने की आशंका जताई।

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Bihar Politics: CPI(ML)'s Dipankar Bhattacharya attacks NDA government, Samrat Chaudhary, Nitish Kumar
दीपांकर भट्टाचार्य - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गृह विभाग छीन लिया है। अब सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद बिहार अब बुलडोजर राज की ओर बढ़ रहा है। सुपौल में चुनाव प्रचार के दौरान दिवंगत हुए भाकपा (माले) नेता विशेश्वर प्रसाद यादव की स्मृति में हाजीपुर में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में कानून नहीं, बुलडोज़र का राज चलेगा, उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर।

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बिहार एक खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी “बुलडोज़र राज” के खिलाफ सशक्त लड़ाई लड़ेगी। भट्टाचार्य ने दावा किया कि बिहार एक खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है और हाल में हुए विधानसभा चुनाव “अभूतपूर्व अनियमितताओं” से भरे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 70 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए और 20–25 लाख नए नाम जोड़े गए, जिससे बूथ-स्तर पर मतदाता संतुलन बदल गया। भट्टाचार्य ने चुनाव से ठीक पहले जनता को दी गई योजनागत राशि पर भी सवाल उठाया।
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30,000 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के नाम पर बांट दिए गए
उन्होंने कहा कि चार साल तक जनता की पूरी अनदेखी करने के बाद 30,000 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के नाम पर बांट दिए गए। पूरा चुनावी तंत्र मज़ाक बनकर रह गया है। भाकपा (माले) महासचिव ने चुनावों के बाद चार श्रमिक-विरोधी श्रम संहिताओं के लागू किए जाने का विरोध किया और 26 नवम्बर, संविधान दिवस पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की अपील की। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं में कार्य घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं, हड़ताल करना लगभग असंभव बना दिया गया है, नौकरी की सुरक्षा नहीं है, फिर भी कहा जा रहा है कि ये श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

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