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Bihar: PMO का ईमेल इनबॉक्स हुआ फुल, नए संदेश मिलने बंद; पद्मश्री सुरेंद्र किशोर ने सोशल मीडिया पर उठाया मामला
Mon, 18 May 2026 03:32 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
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Published by: पटना ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 03:32 PM IST
सार
Bihar News: पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने दावा किया है कि पीएमओ का आधिकारिक ईमेल इनबॉक्स फुल हो गया है। इसके कारण नए ईमेल रिसीव नहीं हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद पीएमओ की तकनीकी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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पद्मश्री सुरेंद्र किशोर ने सोशल मीडिया पर उठाया मामला
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ी एक चौंकाने वाली तकनीकी समस्या सामने आई है। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और सुरेंद्र किशोर ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक ईमेल इनबॉक्स पूरी तरह भर चुका है। इसके कारण अब नए ईमेल रिसीव नहीं हो पा रहे हैं और लोगों के संदेश पीएमओ तक नहीं पहुंच रहे हैं।
ईमेल भेजने पर मिला ‘मेल बॉक्स फुल’ का संदेश
पद्मश्री सुरेंद्र किशोर ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को संबोधित एक महत्वपूर्ण ईमेल भेजने के दौरान उन्हें डिलीवरी फेल होने का संदेश मिला। एरर मैसेज में स्पष्ट रूप से लिखा था कि प्राप्तकर्ता का मेलबॉक्स फुल हो चुका है, इसलिए ईमेल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय का ध्यान इस गंभीर तकनीकी खामी की ओर आकर्षित किया और इसे जल्द ठीक करने की मांग की।
जनता और सरकार के बीच अहम कड़ी है पीएमओ ईमेल
सुरेंद्र किशोर का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का ईमेल सिस्टम देश की जनता और केंद्र सरकार के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हर दिन हजारों लोग अपनी शिकायतें, सुझाव और जरूरी सूचनाएं पीएमओ को ईमेल के जरिए भेजते हैं। ऐसे में ईमेल इनबॉक्स का भर जाना और नए संदेशों का रुक जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है।
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ये भी पढ़ें- Bihar News: रेलवे ट्रैक पर मिले युवक-युवती के शव, इलाके में फैली सनसनी; आत्महत्या या हादसे के बीच उलझी गुत्थी
सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। लोग डिजिटल इंडिया के दौर में पीएमओ जैसी महत्वपूर्ण संस्था की तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे सिस्टम मैनेजमेंट की बड़ी चूक बताया है।
कौन हैं सुरेंद्र किशोर?
सुरेंद्र किशोर बिहार के जाने-माने पत्रकार और साहित्यकार हैं। वे वर्ष 1970 से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं और कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। अब देखना होगा कि पीएमओ की तकनीकी टीम इस समस्या को कितनी जल्दी दूर करती है और जनता के लिए ईमेल सेवा दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो पाती है या नहीं।
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ईमेल भेजने पर मिला ‘मेल बॉक्स फुल’ का संदेश
पद्मश्री सुरेंद्र किशोर ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को संबोधित एक महत्वपूर्ण ईमेल भेजने के दौरान उन्हें डिलीवरी फेल होने का संदेश मिला। एरर मैसेज में स्पष्ट रूप से लिखा था कि प्राप्तकर्ता का मेलबॉक्स फुल हो चुका है, इसलिए ईमेल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय का ध्यान इस गंभीर तकनीकी खामी की ओर आकर्षित किया और इसे जल्द ठीक करने की मांग की।
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जनता और सरकार के बीच अहम कड़ी है पीएमओ ईमेल
सुरेंद्र किशोर का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का ईमेल सिस्टम देश की जनता और केंद्र सरकार के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हर दिन हजारों लोग अपनी शिकायतें, सुझाव और जरूरी सूचनाएं पीएमओ को ईमेल के जरिए भेजते हैं। ऐसे में ईमेल इनबॉक्स का भर जाना और नए संदेशों का रुक जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। लोग डिजिटल इंडिया के दौर में पीएमओ जैसी महत्वपूर्ण संस्था की तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे सिस्टम मैनेजमेंट की बड़ी चूक बताया है।
कौन हैं सुरेंद्र किशोर?
सुरेंद्र किशोर बिहार के जाने-माने पत्रकार और साहित्यकार हैं। वे वर्ष 1970 से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं और कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। अब देखना होगा कि पीएमओ की तकनीकी टीम इस समस्या को कितनी जल्दी दूर करती है और जनता के लिए ईमेल सेवा दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो पाती है या नहीं।