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Bihar News : 'उन्मेष साहित्य महोत्सव' में उपराष्ट्रपति ने की शिरकत, कहा-विविधता में भी एकता 'धर्म' से संभव
Sun, 28 Sep 2025 05:49 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Sun, 28 Sep 2025 05:49 PM IST
सार
Vice President C.P. Radhakrishnan In Bihar : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि भारत को एकजुट रखने में धर्म की अवधारणा ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है, भले ही यहां लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हों। वे यहां साहित्य अकादमी और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उन्मेष अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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Vice President C.P. Radhakrishnan In Bihar : उन्मेष अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के दौरान राष्ट्रपत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उपराष्ट्रपति ने कहा, “यूरोप के एक गणमान्य व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि भारत बिना किसी साझा भाषा के एकजुट कैसे है। मैंने उत्तर दिया कि यहां लोग भले ही अलग-अलग भाषाओं में बोलते हैं, लेकिन धर्म की अवधारणा ने सबको जोड़े रखा है।” उन्होंने यह धारणा भी खारिज की कि "लोकतंत्र पश्चिमी अवधारणा" है। उन्होंने कहा, “2500 साल पहले यही बिहार की धरती एक ओर शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य का साक्षी बनी, तो दूसरी ओर वैशाली जैसी प्राचीन गणतंत्र का जन्म भी यहीं हुआ।” यह बातें पटना मेंं आयोजित उन्मेष अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के दौरान उपराष्ट्रपति के द्वारा कही गईं हैं।
'बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर गौरवशाली'
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘उन्मेष’ नए विचारों, कथाओं और दृष्टिकोणों के जागरण का प्रतीक है, जो भाषा, संस्कृति, भूगोल और विचारधारा की खाइयों को पाटता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उन्मेष आने वाली पीढ़ियों के लेखकों, विचारकों और पाठकों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में यही भूमि भगवान बुद्ध और महावीर के आध्यात्मिक जागरण की साक्षी रही। नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे विद्या केंद्रों ने दूर-दराज से विद्वानों को आकर्षित किया।
उपराष्ट्रपति ने चंपारण सत्याग्रह की भी याद दिलाई
राधाकृष्णन ने चंपारण सत्याग्रह की भी याद दिलाई और कहा कि बिहार की लोक संस्कृति, जैसे मधुबनी पेंटिंग और छठ महापर्व, अद्वितीय पहचान रखते हैं। देश के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन का यह बिहार का पहला दौरा था। पटना एयरपोर्ट पर उनका स्वागत राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने खान को “पुराना मित्र” बताया और कहा कि जब दोनों संसद सदस्य थे, तभी से उनका साथ रहा है।
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ये भी पढ़ें- Bihar News : '2005 से पहले भय का माहौल था, आज शांति और विकास है', सीएम नीतीश ने रोजगार को लेकर किया बड़ा वादा
'संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया था'
समारोह स्थल पर जाते समय उपराष्ट्रपति ने जेपी (लोकनायक जयप्रकाश नारायण) की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैंने 19 वर्ष की उम्र में लोकनायक के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया था। बाद में उस आंदोलन का जिला महासचिव भी बना।” उपराष्ट्रपति ने यह भी याद किया कि उनका राजनीतिक जीवन तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक के रूप में शुरू हुआ था।
ये भी पढ़ें- Bihar News: विधायक विजय कुमार मंडल पर फूटा जनता का गुस्सा, लालू यादव से शिकायत का वीडियो वायरल
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'बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर गौरवशाली'
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘उन्मेष’ नए विचारों, कथाओं और दृष्टिकोणों के जागरण का प्रतीक है, जो भाषा, संस्कृति, भूगोल और विचारधारा की खाइयों को पाटता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उन्मेष आने वाली पीढ़ियों के लेखकों, विचारकों और पाठकों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में यही भूमि भगवान बुद्ध और महावीर के आध्यात्मिक जागरण की साक्षी रही। नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे विद्या केंद्रों ने दूर-दराज से विद्वानों को आकर्षित किया।
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उपराष्ट्रपति ने चंपारण सत्याग्रह की भी याद दिलाई
राधाकृष्णन ने चंपारण सत्याग्रह की भी याद दिलाई और कहा कि बिहार की लोक संस्कृति, जैसे मधुबनी पेंटिंग और छठ महापर्व, अद्वितीय पहचान रखते हैं। देश के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन का यह बिहार का पहला दौरा था। पटना एयरपोर्ट पर उनका स्वागत राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने खान को “पुराना मित्र” बताया और कहा कि जब दोनों संसद सदस्य थे, तभी से उनका साथ रहा है।
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'संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया था'
समारोह स्थल पर जाते समय उपराष्ट्रपति ने जेपी (लोकनायक जयप्रकाश नारायण) की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैंने 19 वर्ष की उम्र में लोकनायक के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया था। बाद में उस आंदोलन का जिला महासचिव भी बना।” उपराष्ट्रपति ने यह भी याद किया कि उनका राजनीतिक जीवन तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक के रूप में शुरू हुआ था।
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