फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Patna News ›   Bihar News Tap water has reached 99 percent of houses 98 percent of complaints are being resolved

Bihar News: 99 फीसदी घरों तक पहुंचा नल का जल, 98 प्रतिशत शिकायतों का हो रहा समाधान

Mon, 10 Mar 2025 11:04 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 10 Mar 2025 11:04 PM IST
सार

Bihar News: 99 फीसदी घरों तक नल का जल पहुंच गया है। वहीं, 98 फीसदी शिकायतों का समाधान हो रहा है। सीजीआरजी प्रणाली के जरिए विभाग को जलापूर्ति से जुड़ी 70 हजार 343 शिकायतें आई थी। इनमें 69 हजार 774 शिकायतें का समाधान विभाग ने कर लिया है।

विज्ञापन
Bihar News Tap water has reached 99 percent of houses 98 percent of complaints are being resolved
नल जल योजना - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 99.20 प्रतिशत घरों को हर घर नल का जल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल मयस्सर कराया जा रहा है। इस योजना का क्रियान्वयन सुचारू तरीके से करने के लिए पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) ने शिकायतों का निपटारा कम से कम समय में कराने की व्यवस्था स्थापित की है। विभिन्न जिलों से सीजीआरसी प्रणाली के जरिए विभाग को जलापूर्ति से जुड़ी 70 हजार 343 शिकायतें प्राप्त हुई, जिसमें से 69 हजार 774 शिकायतों का विभाग ने समाधान कर जलापूर्त्ति शुरू कर दी है। योजना के निर्मित और संचालन से जुड़ी 31 हजार 585 शिकायतें प्राप्त हुई थी, जिसमें 31 हजार 292 का निवारण कर लिया गया है। वहीं, पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित योजनाओं के तहत प्राप्त 38 हजार 758 शिकायतों में 38 हजार 487 का निवारण किया जा चुका है।

विज्ञापन

   
मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में शामिल हर घर नल का जल योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में मौजूद सभी घरों को इससे जोड़ दिया गया है। सितम्बर 2024 तक राज्य के एक लाख 14 हजार 050 में एक लाख 13 हजार 874 ग्रामीण और 203 शहरी वार्डों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। 18.47 लाख परिवारों को पानी का कनेक्शन दिया गया है। जबकि 75 हजार परिवार कनेक्शन से वंचित हैं। चार हजार परिवारों ने नल जल का कनेक्शन लेने इनकार कर दिया है। स्थानीय निकायों और बुडको के स्तर से तीन हजार 398 में 3 हजार 370 वार्डों में नल जल कनेक्शन दिया है। वर्तमान में 1.74 करोड़ से अधिक घरों तक नल का जल पहुंचाया जा रहा है। 
विज्ञापन


टोल-फ्री नंबर पर भी कर सकते हैं शिकायत
पीएचईडी इस योजना से संबंधित शिकायतों पर तत्वरित कार्रवाई करने के लिए एक टोल-फ्री नंबर भी जारी कर रखा है। फरवरी 2025 तक आम नागरिकों के स्तर से टोल-फ्री नंबर 1800-123-1121/1800-345-1121/155367 पर 4 हजार 511 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 2 हजार 237 शिकायतें व्हाट्स एप नंबर 8544429024/8544429082 के माध्यम से 128 शिकायतें स्वच्छ नीर एप पर सीधे प्राप्त हुई हैं। 4 हजार 297 शिकायतें जिला नियंत्रण कक्ष, 4 हजार 083 शिकायतें वेब पोर्टल पर, 466 शिकायतें ई-मेल से प्राप्त की गई हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 15 हजार 722 शिकायतों में 14 हजार 295 शिकायतों का समाधान कर संबंधित जलापूर्ति को क्रियाशील किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सभी जिलों में ऑन स्पॉट खाद्य पदार्थ टेस्टिंग की व्यवस्था जल्द

  • पहली माइक्रोबायोलॉजी लैब तैयार, आम लोग भी यहां करा सकते खाद्य पदार्थों की जांच

  • पटना में इस माइक्रोबायोलॉजी लैब को किया गया स्थापित

  • अब आम लोग भी इस लैब में किसी खाद्य सामाग्री की करवा सकेंगे जांच


अब राज्य में सभी तरह के खाद्य एवं पेय पदार्थों की ऑन स्पॉट जांच की सुविधा शुरू होने जा रही है। इस लैब की मदद से ऑन स्पॉट टेस्टिंग पर भी काम कर रही है। अभी राजधानी पटना, भागलपुर और पूर्णिया में फूड टेस्टिंग वैन चलाई गई है। ये वैन बाजार से सैंपल लेकर ऑन स्पॉट टेस्टिंग करते हैं। सरकार जल्द ही प्रदेश के हर जिले में चलंत टेस्टिंग वैन की सुविधा शुरू होने जा रही है। पटना में राज्य का पहला माइक्रोबायोलॉजी लैब सुचारू तरीके से काम करने लगा है। यहां दूध, दही, मिठाई, मांस, मछली, पानी समेत अन्य किसी तरह के खाद्य पदार्थों की जांच कराकर इसकी असलियत का पता लगाया जा सकता है। यहां आम लोग भी किसी तरह के खाद्य पदार्थ में मिलावट की जांच करवा सकते हैं। 


45 साल पुराना है ये लैब
शहर के अगमकुआं में बने इस फूड और ड्रग टेस्टिंग लैब को बनाया गया है। ऐसे तो यह लैब 1980 से काम कर रहा है। परंतु अभी यहां माइक्रोबायोलॉजी और एडवांस टेक्नोलॉजी के उच्च स्तरीय उपकरण अनुभाग की शुरुआत की गई है। यह राज्य का एक मात्र आधुनिक तकनीकों से लैस विश्व स्तरीय खाद्य प्रयोगशाला है। इस प्रभाग के शुरू होने से पहले तक यहां सिर्फ केमिकल टेस्टिंग होती थी। अब इसमें माइक्रोबायोलॉजी और एडवांस टेक्नोलॉजी आधारित जांच शुरू हो गई है। इसे नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड (NABL) और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से भी मान्यता मिल चुकी है।


तीन तरह की जांच होगी 

  • हाईटेक मशीनों से जांच- एडवांस मशीनों से खाने की चीजों में मिलावट और हानिकारक तत्वों की पहचान

  • बैक्टीरिया और माइक्रोब्स की जांच- दूध, मांस, मछली और पानी में मौजूद बैक्टीरिया की सही पहचान

  • केमिकल टेस्टिंग- खाने-पीने की चीजों में केमिकल और जहरीले पदार्थों की जांच।


छह करोड़ की लागत से तैयार हुई यह लैब
इस लैब को राज्य सरकार और FSSAI ने संयुक्त रूप से 6 करोड़ रुपये खर्च कर अपग्रेड किया है। लैब में गैस क्रोमाटोग्राफी मास स्पेक्ट्रोमेटरी (जीसी-एमएसएमएस) की मदद से खाने में कीटनाशकों और फैट की जांच होती है। लिक्विड क्रोमाटोग्राफी मास स्पेक्ट्रोमेटरी (एलसी-एमएसएमएस) खाने में एंटीबायोटिक्स, हानिकारक रंग और जहरीले पदार्थ की जांच कर सकते हैं। इंडक्टिवली कपल्ड प्लाजमा मास स्पेक्ट्रोमेटरी (आईसीपी-एमएस) की मदद से खाने में लेड, कैडमियम जैसे भारी धातुओं की पहचान की जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed