Bihar News: अपराध से अर्जित संपत्ति पर अब IO करेगा सीधी कार्रवाई, कोर्ट से होगी अटैचमेंट: DGP विनय कुमार
Bihar: डीजीपी ने स्पष्ट किया कि यदि संपत्ति का वास्तविक पीड़ित व्यक्ति मिल जाता है, तो वह संपत्ति उसे सौंप दी जाएगी। यदि पीड़ित की पहचान नहीं हो पाती, तो वह संपत्ति सरकार के कोष में चली जाएगी। पढ़ें खबर
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अब अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना होगा। नए कानून के तहत, विवेचना पदाधिकारी (IO) को विशेष अधिकार दिए गए हैं कि वे अपराध से अर्जित संपत्ति को कोर्ट में प्रस्तुत कर सकते हैं और 14 दिनों के भीतर संबंधित पक्ष को नोटिस देकर जवाब मांग सकते हैं। जवाब नहीं मिलने पर संपत्ति को अटैच किया जा सकेगा।
सोमवार को बिहार पुलिस मुख्यालय में डीजीपी विनय कुमार ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उनके साथ विधि-व्यवस्था के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज दराद भी मौजूद थे। डीजीपी ने बताया कि पहले आर्थिक अपराध इकाई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के माध्यम से ऐसी कार्रवाई की जाती थी, जिसमें काफी समय लगता था। अब नए प्रावधान के अनुसार IO सीधे कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगा। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर संपत्ति को अटैच किया जाएगा।
1278 अपराधी चिह्नित, हर जिले में होगी कार्रवाई
डीजीपी ने बताया कि दिसंबर 2024 से अब तक पूरे राज्य में 1278 अपराधियों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्रदेश के कुल 1249 थानों को इस बाबत निर्देशित किया गया है। जांच की प्रक्रिया में IO को SHO, सर्किल इंस्पेक्टर, SDPO और SP से अनुमोदन लेना होगा। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के कुछ कुख्यात अपराधियों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। अब उनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति पर प्रहार किया जा रहा है। इससे अपराधियों का मनोबल टूटेगा और अपराध करने की प्रवृत्ति में गिरावट आएगी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय कार्रवाई भी तेज
प्रेस वार्ता में डीजीपी ने यह भी कहा कि बिहार पुलिस सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रही है। भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर विभागीय कर्मियों पर कार्रवाई की जा रही है। विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत छह तरह की सजाओं का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम तीन वर्षों तक की सजा हो सकती है।
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साइबर अपराध बड़ी चुनौती, हर जिले में साइबर थाना
डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराध बिहार पुलिस के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रत्येक जिले में साइबर थाना खोला गया है। हालांकि, अपराध के अनुपात में मैनपावर की कमी है, जिसे दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। डीजीपी ने बताया कि गंभीर मामलों में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित करने के लिए केस की समीक्षा की जा रही है। गवाहों को कोर्ट तक लाकर गवाही दिलाने की जिम्मेदारी पुलिस की है, जिस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हत्या और अपहरण जैसे मामलों में कमी
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि आज से 20-25 साल पहले हत्या और फिरौती के लिए अपहरण के मामले ज्यादा होते थे, लेकिन अब इनमें उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा, “एक भी हत्या समाज के लिए असहनीय है, हमारा लक्ष्य है कि हत्या जैसे अपराध पूरी तरह समाप्त हों। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 जून को प्रस्तावित सिवान दौरे को लेकर मुकम्मल सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक नहीं होने दी जाएगी।
VIP नंबर प्लेट, हूटर और अंडरएज ड्राइविंग पर कार्रवाई
डीजीपी ने चेतावनी दी कि जो लोग बिना अनुमति के VIP नंबर प्लेट या हूटर लगाकर घूम रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। आने वाले समय में अंडरएज ड्राइविंग पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।
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रिश्वत मांगने पर तुरंत यहां करें शिकायत
बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति से कोई भी पुलिस अधिकारी या कर्मी रिश्वत मांगता है, तो तुरंत इसकी शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई, आर्थिक अपराध इकाई या फिर सीधे राज्य पुलिस मुख्यालय में दर्ज कराईये। उन्होंने कहा कि अपराधियों को उनके किए की सजा दिलाने के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय की तरफ से जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। राज्य के सभी जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर न केवल अपराधियों को उनके किए की त्वरित सजा दिलाने की व्यवस्था की जा रही है बल्कि इससे निर्दोष लोगों के साथ-साथ पीड़ितों को भी तत्काल न्याय मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में कुल सौ फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा।
नए कानून से पीड़ित पक्ष को मिलेगा आर्थिक फायदा
पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने कहा कि राज्य में कुल 1249 थाने हैं। इन थानों में ऐसे पेशेवर अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए कुल 1172 अपराधियों को चिन्हित किया गया है। उन्होंने कहा कि चिन्हित अपराधियों में से 239 अपराधियों के विरुद्ध अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं और उनकी संपत्ति जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इनमें 188 अपराधियों के विरुद्ध न्यायालयों में प्रस्ताव समर्पित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए कानून में अपराधियों की संपत्ति से पीड़ित परिवारों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की भी करें शिकायत
पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने कहा कि थानों से भ्रष्टाचार की शिकायतें अक्सर प्राप्त होती रहती हैं। पुलिस मुख्यालय भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कृत संकल्पित है। इसलिए यदि कोई भी पुलिस अधिकारी या कर्मी किसी भी मामले में मदद करने के नाम पर रिश्वत की मांगता है तो इसकी शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई, आर्थिक आप्तध इकाई या सीधे राज्य पुलिस मुख्यालय से तुरंत करें। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि निगरानी ब्यूरो द्वारा इस वर्ष जनवरी से 12 जून के बीच कुल एक दर्जन पुलिस पदाधिकारियों पुलिस पदाधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है। इतना ही नहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में इस वर्ष जनवरी से मई माह के बीच कुल 22 पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। इनमें कुल 15 पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर कोर्ट को अग्रसारित कर दिया गया है। साथ ही कुल 66 पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।