Bihar : पुस्तक मेले में ज्ञान और कला का संगम, डिजिटल जंजीरें' नुक्कड़ नाटक का हुआ मंचन; रंजन को सम्मान
Book fair in Patna : पटना का गांधी मैदान अभी पुस्तकों से सजा हुआ है, क्यों कि यहां अभी पुस्तक मेला लगा हुआ है। इस पुस्तक मेले में रोज अलग-अलग तरह के कार्यक्रम हो रहे हैं, जहां सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक गतिविधियों का समागम देखने को मिल रहा है।
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बिहार की राजधानी पटना में पुस्तक मेला का आयोजन किया गया है जहां रोज अलग-अलग तरह के कार्यक्रम भी हो रहे हैं। इस पुस्तक मेले में सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक गतिविधियों का समागम देखने को मिला। 'व्यास मंच' पर गंभीर विमर्श से लेकर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति ने मेले की गरिमा बढ़ाई। पटना पुस्तक मेले के मुख्य मंच 'व्यास मंच' पर "बिहार विहार के नज़र से" विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। पटना शहर पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिख चुके लेखक और पत्रकार अरुण सिंह ने बिहार को समझने के लिए यात्रा की महिमा को किताबों से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यात्रा आपको समृद्ध करती है, फिर अगर आप उसे कलमबद्ध करते हैं तो ज्यादा प्रभावी होता है। बिहार के व्यंजनों पर किताब लिखने वाले पत्रकार रविशंकर उपाध्याय ने बिहार को लिट्टी-चोखा और चंपारण मटन से आगे देखने पर जोर दिया। उन्होंने ठेकुआ, सिलाव के खाजा, तिलकुट जैसे स्थानीय व्यंजनों को प्रमोट करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने बिहार को धार्मिक सर्किट, संगीत, स्थानीय परंपराओं और मौसम के अनुरूप बदलते खानपान के माध्यम से और अधिक जानने पर जोर दिया।
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'डिजिटल जंजीरें' नुक्कड़ नाटक का सशक्त मंचन
ज्ञान, कला और संस्कृति के महोत्सव यानी पुस्तक मेला में नुक्कड़ नाटक 'डिजिटल जंजीरें' का प्रभावशाली मंचन किया गया। अरविंद महिला कॉलेज के छात्रों ने दिव्यानि के कुशल निर्देशन में यह नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से जन मानस को यह संदेश दिया गया कि स्मार्ट मोबाइल का इस्तेमाल सही और जरूरत के अनुसार हो, न कि एक आदत की तरह। इस अवसर पर रंगकर्मी पुंज प्रकाश मुनचुन को नाट्यकला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। बिहार कला पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी सनत कुमार ने नुक्कड़ नाटक के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे एक प्रभावी विधा बताया। आहार विशेषज्ञ रूपाली सिंह को प्रथम दर्शक के रूप में सम्मानित किया गया।
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रंजन सिन्हा को फिल्म पीआर में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान
पटना पुस्तक मेला 2025 में राजापाकर, वैशाली के राजीव रंजन कुमार उर्फ़ रंजन सिन्हा को फिल्म पीआर के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रसिद्ध निर्देशक रंजन कुमार सिंह के हाथों मिला। रंजन सिन्हा ने पिछले 21 वर्षों में 900 से ज्यादा फिल्मों और 5000 से अधिक गानों का प्रचार किया है और वह भोजपुरी सिनेमा के एक 'ब्रांड आइकॉन' के रूप में जाने जाते हैं।
उन्होंने प्रकाश पर्व, पटना फिल्म फेस्टिवल जैसे बिहार सरकार के बड़े आयोजनों में भी अहम भूमिका निभाई है, जिससे बिहार की सांस्कृतिक पहचान देशभर में मजबूत हुई है। रंजन सिन्हा का लक्ष्य अब भोजपुरी कंटेंट को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स और बड़े OTT प्लेटफॉर्म्स तक ले जाना है, ताकि क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहचान मिल सके।