Bihar Election: 'दलितों-गरीबों के बूथों को बेवजह घोषित किया जा रहा संवेदनशील', भाकपा माले ने लगाया यह आरोप
Bihar Vidhan Sabha Election: पहले चरण के मतदान से दो दिन पहले भाकपा माले ने चुनाव आयोग को एक गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेने के लिए कहा है। माले के राज्य सचिव ने पर्यवेक्षक ने उलटा ही काम कर दिया है। इससे मतदान पर असर पड़ सकता है।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवाद) के राज्य सचिव कुणाल ने चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि संवदेनशील-अतिसंवेदनशील बूथों के चयन में भेदभाव बरता जा रहा है। तरारी विधानसभा में हमने चुनाव पर्यवेक्षक को 47 बूथों की लिस्ट दी थी और उसे अतिसंवेदनशील घोषित करने की मांग की थी, लेकिन पर्यवेक्षक ने उलटा ही काम किया। इस विधानसभा में 155 बूथों को अतिसंवेदनशील या संवेदनशील सूची में रखा गया है। हमारी मांग के विपरीत दलित-गरीब-कमजोर वर्ग के मतदाताओं के कुल 149 बूथों को इस सूची में डाल दिया गया है। वहीं जिन बूथों को इस दायरे में लाना था, उन्हें सामान्य घोषित कर दिया गया।
किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं रहा है
राज्य सचिव कुणाल सभी 149 बूथों पर पिछले दिनों मतदान के दौरान किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं रहा है, फिर भी उन्हें इस सूची में डाल दिया गया है। आखिर यह किस आधार पर किया जा रहा है। पर्यवेक्षक महोदय की ओर से कोई भी संतोषजनक उतर नहीं मिला। हम बिहार चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि वह अपने स्तर से संज्ञान लेते हुए इस विसंगति को तत्काल ठीक करे ताकि दलित-गरीब व कमजोर समुदाय के मतदाता निर्भीक होकर मतदान कर सकें। चुनाव आयोग को इसकी गारंटी करनी होगी। यह प्रतीत होता है कि यह सबकुछ तरारी से भाजपा प्रत्याशी के इशारे पर किया जा रहा है।
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जदयू प्रत्याशी के दबाव में छापेमारी
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने भोरे में जदयू प्रत्याशी के दवाब में प्रशासन हमारे कार्यालयों पर बेवजह छापा मारने और हमारे प्रचार अभियान को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे ही चुनाव आयोग की विश्वसनीयता व निष्पक्षता पर सवाल खड़े नहीं हो रहे। हम मांग करते हैं कि ऐसी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाई जाए और निष्पक्ष प्रचार व मतदान की गारंटी की जाए।