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बिहार कैबिनेट का फैसला: नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन अब पार्षद करेंगे, जानें
Wed, 10 Sep 2025 05:27 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 10 Sep 2025 05:27 PM IST
सार
Bihar News: नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जिवेश कुमार ने कहा कि पार्षदों की लंबे समय से मांग थी कि स्थायी समिति के सदस्यों को चुनने का अधिकार मनोनयन न होकर निर्वाचन हो। अब सदस्यों का चयन जिला अधिकारी के मार्गदर्शन में होगा।
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मंत्री जिवेश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्य के नगर निकायों के सशक्त स्थायी समिति के गठन को अधिक पारदर्शी एवं नगर निकाय बोर्ड के प्रति उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 (बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2024) की धारा 12 के उपधारा 3 में संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक, लोकसभा/राज्यसभा/विधानसभा/विधान परिषद् के वैसे सदस्यों को अब सत्रावधि के दौरान नगरपालिका की बैठक में भाग लेने से छूट प्राप्त होगी जो इस नगरपालिका क्षेत्र के स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हों और उन्हें नगरपालिका का सदस्य माना गया है।
साथ ही, नगरपालिका की बैठक में भाग लेने हेतु माननीय केन्द्रीय मंत्री एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री/राज्य सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री/राज्य मंत्री तथा लोक सभा/राज्य सभा/विधान सभा/विधान परिषद के सदस्यों को अपनी व्यस्तता की स्थिति में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी व्यक्ति (अपने निकट संबंधी को छोड़कर) के मनोनयन की भी छूट होगी; परन्तु ऐसे मनोनित व्यक्ति, को मतदान में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं होगा।
पढ़ें: मुजफ्फरपुर के SKMCH में नर्सों ने सरकार के खिलाफ धरना दिया, तीन प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन
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धारा-21 की उपधारा (3) के वत्र्तमान प्रावधान में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत नगर निकाय के सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन संबंधित पार्षदों के गुप्त मतदान के द्वारा बहुमत के आधार पर जिला पदाधिकारी के पर्यवेक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण में किया जाएगा; परन्तु इस अध्यादेश के प्रवृत्त होने के उपरान्त, अधिकतम छह माह की अवधि के भीतर सशक्त स्थायी समिति के गठन हेतु निर्वाचन कराया जाएगा।
धारा-23 की उपधारा (3) संशोधन को भी मंजूरी दी गयी है। अब यदि सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के पद में कोई आकस्मिक रिक्ति होती है तो ऐसी रिक्ति धारा 21(3) में वर्णित विहित प्रक्रिया के अनुसार चयन किया जाएगा एवं ऐसा पार्षद अपने पूर्वाधिकारी के बचे हुए कार्यकाल तक पद धारण करेगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जिवेश कुमार ने कहा कि पार्षदों की लंबे समय से माँग थी कि स्थायी समिति के सदस्यों को चुनने का अधिकार मनोनयन न होकर निर्वाचन हो। अब सदस्यों का चयन जिला अधिकारी के मार्गदर्शन में होगा। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया के लोकतांत्रिक होने से नगरपालिका के काम में पारदर्शिता आएगी और योजनाओं का कार्यान्वयन तेज गति से होगा।
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साथ ही, नगरपालिका की बैठक में भाग लेने हेतु माननीय केन्द्रीय मंत्री एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री/राज्य सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री/राज्य मंत्री तथा लोक सभा/राज्य सभा/विधान सभा/विधान परिषद के सदस्यों को अपनी व्यस्तता की स्थिति में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी व्यक्ति (अपने निकट संबंधी को छोड़कर) के मनोनयन की भी छूट होगी; परन्तु ऐसे मनोनित व्यक्ति, को मतदान में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं होगा।
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धारा-21 की उपधारा (3) के वत्र्तमान प्रावधान में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत नगर निकाय के सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन संबंधित पार्षदों के गुप्त मतदान के द्वारा बहुमत के आधार पर जिला पदाधिकारी के पर्यवेक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण में किया जाएगा; परन्तु इस अध्यादेश के प्रवृत्त होने के उपरान्त, अधिकतम छह माह की अवधि के भीतर सशक्त स्थायी समिति के गठन हेतु निर्वाचन कराया जाएगा।
धारा-23 की उपधारा (3) संशोधन को भी मंजूरी दी गयी है। अब यदि सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के पद में कोई आकस्मिक रिक्ति होती है तो ऐसी रिक्ति धारा 21(3) में वर्णित विहित प्रक्रिया के अनुसार चयन किया जाएगा एवं ऐसा पार्षद अपने पूर्वाधिकारी के बचे हुए कार्यकाल तक पद धारण करेगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जिवेश कुमार ने कहा कि पार्षदों की लंबे समय से माँग थी कि स्थायी समिति के सदस्यों को चुनने का अधिकार मनोनयन न होकर निर्वाचन हो। अब सदस्यों का चयन जिला अधिकारी के मार्गदर्शन में होगा। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया के लोकतांत्रिक होने से नगरपालिका के काम में पारदर्शिता आएगी और योजनाओं का कार्यान्वयन तेज गति से होगा।