Bihar News: जैव विविधता संरक्षण को मिलेगी नई दिशा, 1500 विशिष्ट वृक्षों की हुई पहचान; 32 ‘विरासत वृक्ष’ घोषित
Patna News: बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के उप निदेशक मिहिर झा ने बताया कि चिन्हित वृक्षों की अधिकतम आयु 150 वर्ष तक आंकी गई है। इन वृक्षों के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करने के लिए एक विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन भी तैयार किया जा रहा है।
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बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड (BSBB) ने राज्य में दीर्घायु और ऐतिहासिक महत्व वाले वृक्षों को संरक्षित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इस अभियान के तहत राज्यभर से 15,000 वृक्षों में से 1,500 विशिष्ट वृक्षों को चयनित किया गया है, जिनमें से अब तक 32 वृक्षों को ‘विरासत वृक्ष’ का दर्जा दिया गया है।
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चार जिलों में 11 प्रजातियों के विशिष्ट वृक्षों की पहचान
बिहार के मुंगेर, भागलपुर, जमुई और बक्सर जिलों में 11 विशिष्ट प्रजातियों के वृक्षों की पहचान की गई है। इनमें पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, कनकचंपा, इमली, सेमल और महुआ जैसे पारंपरिक और ऐतिहासिक वृक्ष शामिल हैं। इन वृक्षों की गुणवत्ता और विशेषताओं का पूरा विवरण फोटो सहित संकलित किया गया है। राज्य जैव विविधता बोर्ड के उप निदेशक मिहिर झा के अनुसार, इन वृक्षों की अधिकतम आयु 150 वर्ष तक आंकी गई है। इन वृक्षों के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करने के लिए एक विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन भी तैयार किया जा रहा है।
संरक्षण और निगरानी के लिए विशेष एप विकसित
इन विशिष्ट वृक्षों को चिन्हित करने और उनकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए एक मोबाइल एप भी विकसित किया गया है। इस एप की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने क्षेत्र में मौजूद ऐतिहासिक या विशेष वृक्षों की तस्वीरें और उनकी लोकेशन (GPS) अपलोड कर सकता है। बीएसबीबी को सूचना भेजने पर संबंधित वृक्ष का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और सही पाए जाने पर उसे ‘विरासत वृक्ष’ की सूची में जोड़ा जाएगा।
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'विरासत वृक्षों' की होगी औपचारिक घोषणा
सरकार इस परियोजना के तहत राज्य के 'विरासत वृक्षों' की आधिकारिक घोषणा करेगी। इसके साथ ही इन वृक्षों की महत्ता, पारिस्थितिक योगदान और संरक्षण की आवश्यकता पर एक विस्तृत पुस्तिका प्रकाशित की जाएगी, ताकि आम जनता भी वृक्ष संरक्षण के प्रति जागरूक हो सके। यह पहल न केवल जैव विविधता को सुरक्षित रखने में सहायक होगी बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन से निपटने और पारंपरिक वृक्षों की रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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