फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Patna News ›   Bihar: 498 research papers discussed in Nalanda; 65 percent of the papers were presented by female researchers

बिहार: नालंदा में 498 शोध पत्रों पर मंथन, 65 प्रतिशत महिला शोधकर्ताओं ने पेश किए पेपर; क्या बोले राज्यपाल?

Wed, 28 Oct 2026 04:06 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 28 Oct 2026 04:06 PM IST
सार

नालंदा विश्वविद्यालय में 25वें अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन का समापन हुआ। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बिहार को भारत का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बताया। सम्मेलन में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और 498 शोध पत्रों पर चर्चा हुई।

विज्ञापन
Bihar: 498 research papers discussed in Nalanda; 65 percent of the papers were presented by female researchers
अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन, - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित 25वें अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन (आईएएसएससी) का चार दिवसीय आयोजन राज्यपाल सैयद अता हसनैन के संबोधन के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन के समापन समारोह में देश के भविष्य और विकास की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बिहार देश का गढ़ और भारत का 'सेंटर ऑफ ग्रेविटी' है। जब तक बिहार का सर्वांगीण विकास नहीं होगा, तब तक वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता।

विज्ञापन


बिहार की उर्वरा भूमि और नालंदा का गौरव
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भौगोलिक और बौद्धिक दृष्टि से बिहार देश का केंद्र बिंदु है। यह देश का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है, जहां अनेक नदियां बहती हैं और कृषि की अपार संभावनाएं हैं। वहीं, सभ्यता और ज्ञान के स्तर पर नालंदा की अपनी ऐतिहासिक महत्ता रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान देश के बहुत कम राज्यों में हैं। आज दुनिया भर और देश के अलग-अलग राज्यों से लोग यहां अपने नए विचार लेकर आ रहे हैं। यह संस्थान बिहार की पुरानी बौद्धिक और वैचारिक परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है।
विज्ञापन


शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी बड़ी चुनौती: प्रो. एस. महेंद्र देव
सम्मेलन में शामिल हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन प्रो. एस. महेंद्र देव ने देश के आर्थिक परिदृश्य पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी चिंता शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी है। इसके समाधान के लिए केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, बल्कि निजी क्षेत्र में निवेश को गति देनी होगी। उन्होंने कहा कि कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर मंथन किया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

महंगाई के सवाल पर उन्होंने बताया कि देश में स्थिति नियंत्रण में है। भारत के पास 60 मिलियन टन से अधिक चावल और गेहूं का बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिससे खाद्य महंगाई के बेकाबू होने का जोखिम नहीं है। बाकी मौद्रिक नीतियां रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति तय कर रही है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में ऐसे गहरे सबक हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।


महिला शोधकर्ताओं का रहा दबदबा: प्रो. सचिन चतुर्वेदी
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने चार दिवसीय सम्मेलन की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर 26 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में कुल 498 शोध पत्रों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इनमें से 65 प्रतिशत शोध पत्र महिला शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए।

कुलपति ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य रूप से संस्कृति, विकास, पोषण और खाद्य सुरक्षा की भूमिका पर मंथन हुआ। वर्ष 2030 में सतत विकास लक्ष्यों की मौजूदा समय-सीमा पूरी हो रही है। ऐसे में सम्मेलन के दौरान पोस्ट-2030 की प्राथमिकताओं को लेकर रोडमैप तैयार किया गया।



स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचेगा सतत विकास का संदेश
सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि राज्यपाल के विजन के अनुरूप नालंदा विश्वविद्यालय पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों और राज्य सरकार के माध्यम से विद्यालयों के साथ मिलकर काम करेगा। अगले दो वर्षों में पूरे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में सतत विकास लक्ष्यों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन को लेकर सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ी को विकसित भारत के लक्ष्यों के प्रति सजग करना और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed