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Bihar: सांप के काटने से 17 वर्षीय किशोर की मौत, रेस्क्यूर ने कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ा

Sun, 22 Jun 2025 06:14 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बक्सर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बक्सर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 22 Jun 2025 06:14 PM IST
सार

Bihar: मृतक राजा पांडेय रामरेखा घाट पर पूजा-पाठ कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को अविलंब आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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Bihar: 17-year-old boy dies due to snake bite, rescuer caught the cobra and released it in the forest
अस्पताल में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बक्सर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के साहोपारा गांव में रविवार तड़के सांप के काटने से एक 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 4 बजे घर में सो रहे राजा पांडेय को एक कोबरा सांप ने डस लिया। दुर्भाग्यवश, परिजनों ने उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक और ओझा-तंत्र जैसी पारंपरिक पद्धतियों का सहारा लिया, जिससे करीब तीन घंटे का कीमती समय व्यर्थ चला गया। जब तक परिजन उसे प्रतापसागर स्थित मेथोडिस्ट अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से था किशोर
ग्रामीणों के अनुसार, मृतक राजा पांडेय रामरेखा घाट पर पूजा-पाठ कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को अविलंब आर्थिक सहायता देने की मांग की है। घटना की सूचना मिलने पर प्रसिद्ध स्नेक रेस्क्यूर हरिओम कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल के पास झाड़ियों में छिपे कोबरा सांप को सुरक्षित रूप से पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। हरिओम ने बताया कि कोबरा जैसे विषैले सांप के काटने पर हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में सीधे अस्पताल ले जाना ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका होता है।

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अंधविश्वास बन रहा जानलेवा
हरिओम ने कहा कि अधिकतर मौतें देरी और अंधविश्वास के कारण होती हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में निशुल्क एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं, जिनसे समय रहते इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पीड़ित को समय रहते चिकित्सकीय उपचार मिल जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि ऐसे मामलों में पारंपरिक उपायों पर समय गंवाने के बजाय शीघ्र अस्पताल ले जाना चाहिए।

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