Bihar News: 1050 आंगनबाड़ी केंद्र बनेंगे 'नंद घर', बच्चों और महिलाओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
बिहार सरकार ने महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 1050 आंगनबाड़ी केंद्रों को 'नंद घर' के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के आईसीडीएस निदेशालय ने वेदांता लिमिटेड और जेरोधा ब्रोकिंग लिमिटेड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
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बिहार में महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण, शिक्षा और देखभाल को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 1050 आंगनबाड़ी केंद्रों को अब 'नंद घर' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के आईसीडीएस निदेशालय ने वेदांता लिमिटेड और जेरोधा ब्रोकिंग लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर बच्चों और महिलाओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
वेदांता और जेरोधा मिलकर विकसित करेंगे 1050 नंद घर
पटना के लेमन ट्री होटल में आयोजित एक दिवसीय केयर इकोनॉमी कार्यक्रम के दौरान यह एमओयू साइन किया गया। इसके तहत वेदांता लिमिटेड राज्य के 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों को 'नंद घर' के रूप में विकसित करेगा, जबकि जेरोधा ब्रोकिंग लिमिटेड दरभंगा जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण करेगा।
बच्चों और महिलाओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि इस पहल से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए आधारभूत सुविधाएं बेहतर होंगी। साथ ही प्रारंभिक बाल देखभाल, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास के लिए आधुनिक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने पर जोर
महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से आयोजित 'केयर इकोनॉमी कार्यशाला' को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पुरुषों और महिलाओं दोनों की समान जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में करोड़ों लोगों को केयर सेवाओं की जरूरत होगी, इसलिए प्रशिक्षित केयर वर्कर्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। इस क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना समय की जरूरत है।
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महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम पहल
डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो पूरा परिवार और समाज भी विकास करता है। विभाग की विभिन्न योजनाएं भी महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही हैं।
बालिकाओं के सशक्तिकरण और चाइल्ड केयर लीव पर भी चर्चा
राजस्व परिषद की अध्यक्ष हरजोत कौर बम्हरा ने कहा कि केयर इकोनॉमी में महिलाओं के साथ-साथ बालिकाओं के सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने पुरुषों के लिए भी चाइल्ड केयर लीव की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने का सुझाव भी दिया।
विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव
कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास ने केयर इकोनॉमी की आवश्यकता और उसके महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ. प्रीति ने स्वागत भाषण दिया, जबकि उप सचिव मार्गन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने भी केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने से जुड़े सुझाव साझा किए।