Bihar Politics: 'अब कोई छलावा नहीं', नीतीश कुमार ने मुस्लिम समाज को लेकर साझा की लंबी पोस्ट; क्यों पड़ी जरूरत
Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दंगल में घमासान मचा हुआ है। एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला जारी है। इस बीच, नीतीश कुमार ने मुस्लिम समाज को लेकर एक लंबी पोस्ट सोशल मीडिया पर की है। चलिए बताते हैं क्या-क्या लिखा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
'मदरसा के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जा रहा'
अब तक 8 हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी कर दी गई है। मुस्लिम समाज के परामर्श से 1273 और कब्रिस्तानों को घेराबंदी के लिए चिन्हित किया गया, जिसमें 746 कब्रिस्तानों की घेराबंदी पूर्ण हो गई है और शेष का काम शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इन्हीं विपक्षी दलों की जब सरकार थी, तो वर्ष 1989 में भागलपुर में साम्प्रदायिक दंगे हुए। दंगा रोकने में सरकार विफल रही और साम्प्रदायिक दंगा पीड़ितों के लिए पूर्व की सरकारों ने कुछ नहीं किया। जब हमें सेवा का मौका मिला, तो भागलपुर साम्प्रदायिक दंगे की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई और दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिया गया। साथ ही, दंगा से प्रभावित परिवारों को पेंशन के रूप में भी मदद दी जा रही है। पहले कितना हिंदू-मुस्लिम झगड़ा होता था, अब आज कोई झगड़ा नहीं होता है। वर्ष 2006 से मदरसों का निबंधन किया गया तथा उन्हें सरकारी मान्यता दी गई। मदरसा के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जा रहा है।
मुस्लिम वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए इन योजनाओं का किया जिक्र
इसके अलावा मुस्लिम परित्यक्ता/तलाकशुदा महिलाओं को रोजगार देने के लिए वर्ष 2007 से 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाने लगी, जिसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। मुस्लिम समुदाय के लिए तालीमी मरकज और हुनर जैसी उपयोगी योजनाएं चलायी गईं। मुस्लिम वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए छात्रवृत्ति, मुफ्त कोचिंग, छात्रावास, अनुदान आदि योजनाएँ चलायी जा रही हैं। युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने के लिए उद्यमी योजना का लाभ दिया जा रहा है।
अब बिहार विधानसभा चुनाव के समय कुछ लोग फिर से अपने-आप को मुस्लिम समुदाय का हितैषी बताने में जुट गए हैं। ये सब छलावा है। सिर्फ मुस्लिम वर्ग के लोगों का वोट हासिल करने के लिए तरह-तरह के लालच और हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जबकि उन्हें किसी तरह की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी देने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
हमारी सरकार में आज मुस्लिम समाज के लोगों को उनका पूरा हक मिल रहा है। बिना किसी भेदभाव के उन्हें हर क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है, जबकि पूर्व की सरकारों ने मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल सिर्फ वोट के लिए किया और उन्हें कोई हिस्सेदारी नहीं दी। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि आप लोग किसी भ्रम में न रहें। हमारी सरकार ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिए और उसी आधार पर तय कीजिए कि अपना वोट किसे देना है।
ये भी पढ़ें- Bihar Politics: 'एक बेटा सीएम, दूसरा पीएम बनने में लगा है', अमित शाह का लालू-राबड़ी और सोनिया पर करारा प्रहार
नीतीश की इस पोस्ट के सिसायी मायनें क्या?
जैसा कि नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट पर लिखा है। लेकिन सियासी जानकारों कि मानें तो चुनाव के ठीक मुहानें में नीतीश कुमार का मुस्लिम समाज को अपनी ओर लुभाने का प्रयास इस पोस्ट के जरिए किया गया। खैर देखना होगा कि नीतीश की इस पोस्ट को लेकर मुस्लिम समाज की क्या प्रतिक्रिया आती है? क्या वो फिर से सुशासन बाबू पर भरोसा करेंगे। या फिर महागठबंधन खेमें में पलटी मारेंगे। खैर जो भी वो तो वक्त ही बताएगा।