सीतामढ़ी में शादी का भोज खाने से हाहाकार: 100 से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार, कैंप कर रही डॉक्टरों की टीम
सीतामढ़ी के बाजपट्टी प्रखंड के हरपुरवा गांव में एक शादी के भोज में दूषित भोजन खाने से 100 से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। पीड़ितों को उल्टी, दस्त और तेज बुखार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी है।
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सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी प्रखंड क्षेत्र के हरपुरवा गांव में एक शादी समारोह का खुशियों भरा माहौल उस समय हड़कंप में बदल गया, जब भोज खाने से सैकड़ों लोग एक साथ बीमार पड़ गए। मामला हरपुरवा वार्ड संख्या 9 का है, जहां सत्यनारायण भगत के पुत्र विक्रम कुमार की शादी थी। बारात प्रस्थान करने से पहले स्थानीय ग्रामीणों और रिश्तेदारों के लिए दरवाजे पर प्रीतिभोज का आयोजन किया गया था। इस भोज में शामिल होकर खाना खाने वाले लगभग सभी लोगों की तबीयत एक-एक कर बिगड़ने लगी। बीमार लोगों ने बताया कि भोजन करने के कुछ घंटों बाद ही उनके पेट में तेज दर्द शुरू हुआ, जिसके बाद लगातार उल्टी, दस्त और फिर तेज बुखार ने सबको अपनी चपेट में ले लिया।
घटना की भयावहता को देखते हुए जब मीडिया और स्थानीय प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, तो स्थिति काफी चिंताजनक मिली। स्थानीय सरपंच राजेश कुमार चौधरी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि भोज खाने वाले हर व्यक्ति की हालत खराब है। स्थिति यह है कि गंभीर रूप से पीड़ित कई मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है, जबकि दर्जनों लोग अपने घरों पर ही डॉक्टरों को बुलाकर सुई, दवा और स्लाइन (पानी) चढ़वाने को मजबूर हैं। पीड़ितों में पूर्व पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर मंडल, दीपक कुमार सिंह, संजय भगत, विजय कुमार, प्रिंस कुमार, सोनू कुमार, खेदु भगत, ओमप्रकाश और रवि किशन शामिल हैं। इस फूड प्वाइजनिंग का असर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि हरपुरवा के साथ-साथ पड़ोसी गांव भगवानपुर और रिखौली के भी सैकड़ों लोग इसके शिकार हुए हैं।
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इस बेहद गंभीर मामले में गृहस्वामी सत्यनारायण भगत का रवैया संदेहास्पद और बेहद गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि खुद उनके अपने परिवार के लोग भी इस बीमारी से ग्रसित हैं, लेकिन इसके बावजूद वह पूरे मामले पर पर्दा डालने और खुद को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूछने पर भी वह पुपरी के उस किराना दुकानदार का नाम नहीं बता रहे हैं, जहां से भोज की राशन सामग्री आई थी। इतना ही नहीं, भिट्ठा जलालपुर से खाना बनाने आए मुख्य कारीगर (हलवाई) का नाम और पता बताने से भी वह साफ कतरा रहे हैं, जिससे मिलावटी सामान या लापरवाही की जांच में बाधा आ रही है। ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि कारीगरों ने आम लोगों को चावल-दाल खिलाया, जबकि खुद के लिए अलग से पूरी-सब्जी बनाकर खाई, जिससे दाल-चावल में खराबी होने का अंदेशा और बढ़ गया है।
तुरंत हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया है। बाजपट्टी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.पी. झा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले तीन दिनों से अस्पताल में इस गांव के मरीजों का आना लगातार जारी है, जिनका आपातकालीन स्तर पर इलाज किया जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित गांव में डॉक्टरों की एक विशेष टीम भेजी गई है, जो वहां कैंप करके लोगों की जांच कर रही है और दवाइयां बांट रही है। डॉ. झा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से 'फूड प्वाइजनिंग' (खाद्य विषाक्तता) का मामला है, जिसका असर दूषित भोजन ग्रहण करने के लगभग 8 घंटे बाद शरीर पर दिखना शुरू हुआ। फिलहाल सभी मरीजों की निगरानी की जा रही है और प्रशासन मामले की तहकीकात में जुट गया है।