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Bihar: एक कमरे में सोये सात लोग कैसे जल मरे, बगल वाले सभी बचे? बेहोशी में हत्या का आरोप, एक महीने में FIR नहीं

Fri, 16 Jan 2026 10:22 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Fri, 16 Jan 2026 10:22 PM IST
सार

Bihar Police: एक साथ एक कमरे में सात की जलकर मौत हो गई और आग बिछावन तक ही रह गई। बगल वाले कमरों तक नहीं पहुंची। साजिश की ऐसी आशंका के बावजूद एक महीने तक प्राथमिकी नहीं दर्ज हुई। अब कोर्ट ने आदेश दिया है।

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Bihar news: seven person of a family burned died together in a room fire bihar police fir not lodged bihar
सात की जिंदा जलकर मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के सात लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में आग से झुलसकर मौत के मामले में अब अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। घटना के करीब दो महीने बाद भी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर एसीजेएम पश्चिमी की अदालत ने मोतीपुर थाना को अविलंब प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है।

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यह दर्दनाक घटना 15 नवंबर की सुबह करीब 5:34 बजे मोतीपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या-13 में हुई थी, जब एक घर में आग लगने से एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी शवों को कब्जे में लेकर एसकेएमसीएच भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम कराया गया। कुछ घायलों का इलाज भी किया गया, लेकिन इतने गंभीर मामले के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।

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इस घटना में जान गंवाने वालों में ललन कुमार, उनकी पत्नी पूजा कुमारी, उनकी दो बेटियां सृष्टि कुमारी और गोली कुमारी, ललन कुमार की मां सुशीला देवी, रिश्तेदार माला देवी और साक्षी कुमारी शामिल हैं। मामले के परिवादी मनोज कुमार, जो वर्तमान में नई दिल्ली में रहते हैं, ने बताया कि इस घटना में उन्होंने अपनी बहन, बहनोई, दो भांजियों सहित परिवार के कुल सात सदस्यों को खो दिया। घटना की सूचना मिलते ही वे मोतीपुर पहुंचे और थाना में लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, लेकिन पुलिस द्वारा लगातार टालमटोल की जाती रही।

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परिवादी ने इस घटना को लेकर गंभीर संदेह और साजिश की आशंका जताई है। अदालत में दायर परिवाद पत्र में कहा गया है कि जिस कमरे में सभी लोग सो रहे थे, आग केवल उसी कमरे के बेड पर लगी थी। उस कमरे में न तो कोई दरवाजा था और न ही खिड़की, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घर के अलग-अलग कमरों में सो रहे थे और वे सभी सुरक्षित बच गए। आरोप लगाया गया है कि मृतकों को पहले नशीली दवा देकर बेहोश किया गया और उसके बाद कमरे में आग लगाई गई, जिससे उनकी जलकर मौत हो गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए मोतीपुर थाना को तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

परिवादी की ओर से मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा ने अदालत में जोरदार बहस की। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज न करना घोर लापरवाही है। प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत होता है और केवल निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया।

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