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BSEB 10th Result: श्मशान घाट में चल रही पाठशाला की तीन छात्राओं ने रचा इतिहास, लाईं फर्स्ट डिवीजन
Sat, 29 Mar 2025 10:03 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 10:03 PM IST
सार
BSEB 10th Result: अप्पन पाठशाला के संचालक समित कुमार ने बताया कि उन्होंने आठ साल पहले इस पाठशाला की नींव रखी थी, ताकि स्लम बस्ती के बच्चों को शिक्षित कर उनके भविष्य को संवारा जा सके। यह सफर आसान नहीं था। पढ़ें पूरी खबर...।
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छात्राओं को मिठाई खिलाते शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर श्मशान घाट में चलने वाली ‘अप्पन पाठशाला’ की तीन छात्राओं ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी से सफलता हासिल कर अपनी मेहनत का लोहा मनवा लिया। स्लम बस्तियों से आने वाली इन बच्चियों ने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है।
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इन तीनों छात्राओं निधि कुमारी, सलोनी कुमारी और चांदनी कुमारी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी और शानदार प्रदर्शन किया। इस कामयाबी पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षक समित कुमार ने इस पाठशाला को शुरू किया था, उन्होंने कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे सुखद दिन है। यह तो बस शुरुआत है, अब हम और भी बेहतर परिणाम देने के लिए मेहनत करेंगे।
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आठ साल की तपस्या का फल, मेहनत रंग लाई
अप्पन पाठशाला के संचालक समित कुमार ने बताया कि उन्होंने आठ साल पहले इस पाठशाला की नींव रखी थी, ताकि स्लम बस्ती के बच्चों को शिक्षित कर उनके भविष्य को संवारा जा सके। यह सफर आसान नहीं था। श्मशान घाट पर पाठशाला चलाना, बच्चों को प्रेरित करना और सीमित संसाधनों के साथ उन्हें बेहतर शिक्षा देना एक बड़ी चुनौती थी। समित कुमार ने भावुक होकर कहा कि जहां जीवन समाप्त होता है, हमने वहां से नए सपनों की शुरुआत की। आज हमारी मेहनत रंग लाई है। बच्चों ने जो मुकाम हासिल किया है, वह हमारे संकल्प की सफलता है। उन्होंने आगे कहा कि यह केवल एक शुरुआत है और आगे भी ऐसे कई छात्र-छात्राओं को सफल बनाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।
गरीबी की बेड़ियों को तोड़ आगे बढ़ने की जिद
इन तीनों बच्चियों का सफर आसान नहीं था। सभी का परिवार बेहद गरीब है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी उनके लिए संघर्ष से कम नहीं। सलोनी कुमारी के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सलोनी ने कहा कि हमारे परिवार में मैं पहली लड़की हूं जिसने मैट्रिक पास किया है। अब मेरा सपना आईआईटी में जाना है और इंजीनियर बनकर देश के लिए काम करना है।
चांदनी कुमारी के पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं। उन्होंने बताया कि मुझे भी फर्स्ट डिवीजन मिला है और मेरा सपना इंजीनियर बनना है। यहां के माहौल ने मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया और आज मुझे अपनी मेहनत का फल मिल रहा है।
वहीं, निधि कुमारी के पिता एक चाय पत्ती की दुकान में मजदूरी करते हैं। निधि ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मैं रोजाना चार घंटे सेल्फ-स्टडी करती थी। आगे की पढ़ाई के लिए संसाधनों की कमी है, लेकिन मुझे भरोसा है कि हमारे शिक्षकों का साथ हमें और आगे ले जाएगा।
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सफलता की यह रोशनी और दूर तक जाएगी
तीनों छात्राओं की सफलता ने पूरे इलाके में प्रेरणा का संचार किया है। जब पहली बार श्मशान घाट पर यह पाठशाला शुरू हुई थी, तब लोगों को इस प्रयास पर शक था। लेकिन आज इन बच्चियों की सफलता ने दिखा दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कुछ भी संभव है। इस मौके पर शिक्षक समित कुमार और स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटी और छात्राओं को सम्मानित किया।