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बिहार: सेनेगल में फंसे उमाशंकर की वापसी, पत्नी-बच्चों से मिलते ही छलके आंसू; बोले- अब विदेश नहीं जाऊंगा

Wed, 23 Sep 2026 01:07 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Wed, 23 Sep 2026 01:07 PM IST
सार

मुजफ्फरपुर के कुढ़नी निवासी उमाशंकर कुमार चार महीने तक पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल में फंसे रहने के बाद आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद ट्रेन से वह देर शाम कुढ़नी के कोठियां गांव स्थित अपने घर पहुंचे।

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muzaffarpur kurhani umashankar kumar return from senegal after four months
चार महीने से सेनेगल में फंसे उमाशंकर की घर वापसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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अफ्रीकी देश सेनेगल में पिछले चार महीने से फंसे जिले के कुढ़नी निवासी उमाशंकर कुमार आखिरकार अपने वतन लौट आए हैं। उमाशंकर कुढ़नी के कोठियां गांव स्थित अपने घर पहुंचे तो परिवार के लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्हें देखते ही पत्नी और बच्चे उनसे लिपटकर रोने लगे। चार महीने बाद उमाशंकर की घर वापसी की खबर मिलते ही आसपास के लोग भी उनका हालचाल जानने और उनसे मिलने घर पहुंचने लगे।

बोले- वतन लौटने की उम्मीद तक छोड़ चुका था

सेनेगल में फंसे रहने और चार महीने बाद भारत लौटने के बाद उमाशंकर ने कहा कि एक समय ऐसा आ गया था, जब उन्होंने अपने वतन लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार, केंद्रीय मंत्री सह सांसद डॉ. राजभूषण चौधरी और बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता की पहल से वह अपने देश की मिट्टी पर लौट सके हैं। उमाशंकर ने कहा कि अपने वतन लौटकर वह बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि देश की मिट्टी पर पहुंचने के बाद खुद को बेहद ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने निर्णय लिया है कि अब कभी विदेश नहीं जाएंगे और अपने देश में ही रहकर काम करेंगे।

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भारतीय दूतावास ने कराई हवाई टिकट की व्यवस्था

चार महीने तक पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल में फंसे रहने के बाद उमाशंकर की भारत वापसी के लिए भारतीय दूतावास की ओर से हवाई टिकट की व्यवस्था की गई। इसके बाद वह रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने ट्रेन पकड़ी और अपने गांव के लिए रवाना हुए। देर शाम वह कुढ़नी के कोठियां स्थित अपने घर पहुंचे। घर पहुंचते ही पत्नी और बच्चे उमाशंकर से लिपटकर रोने लगे। लंबे समय बाद परिवार से मिलकर उमाशंकर भी भावुक हो गए। इसके बाद आसपास के लोग भी उनके घर पहुंचने लगे और सेनेगल में बीते चार महीनों के दौरान उनके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी लेने लगे।

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डकार में पैसे खत्म हो गए थे, खाने तक की परेशानी

उमाशंकर ने सेनेगल में बिताए मुश्किल दिनों के बारे में बताते हुए कहा कि डकार में रहने के दौरान उनके पास मौजूद सारे पैसे खत्म हो गए थे। उनका आरोप है कि कंपनी के लोगों की ओर से उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा था। इस दौरान खाने तक की सही व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी तरह वहां से निकलकर अपने देश वापसी की है। उमाशंकर ने कहा कि विदेश भेजे जाने के नाम पर जिस तरह की परेशानियों का उन्हें सामना करना पड़ा, उससे वह पूरी तरह टूट चुके थे। अब भारत लौटने के बाद उन्हें राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने देश में ही नौकरी करेंगे और यहीं रहकर काम करने का फैसला लिया है।

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